सहारनपुर में जाली नोट मिलने के मामले की जांच में नोटों के सीरियल नंबर भी अहम भूमिका निभाएंगे। टीम पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे। नोटों की गिनती और छंटाई के लिए तीन सॉर्टिंग मशीनें लगाई गई हैं। इसके साथ ही नए और पुराने नोटों के सीरियल नंबर अलग-अलग दर्ज कर उनका मिलान किया जा रहा है।
जांच का सबसे अहम हिस्सा नकली नोटों के सीरियल नंबरों का रिकॉर्ड तैयार करना माना जा रहा है। नए और पुराने नोटों के नंबरों का अलग-अलग मिलान किया जा रहा है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि नकली नोट किसी एक स्रोत से आए या अलग-अलग समय में करेंसी चेस्ट तक पहुंचे। यदि एक जैसी सीरीज या लगातार क्रम वाले नोट बड़ी संख्या में मिलते हैं तो जांच को इनके स्रोत तक पहुंचने में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता है।
करेंसी चेस्ट में मिले नोटों की संख्या अधिक है। इसलिए तीन सॉर्टिंग मशीनों की मदद से नोटों को अलग-अलग किया जा रहा है। मशीनों से नोटों की छंटाई के दौरान संदिग्ध नोटों को अलग रखकर उनकी दोबारा जांच की जा रही है।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि नकली नोटों की कोई विशेष सीरीज, नंबर पैटर्न या एक जैसी प्रिंटिंग में समानता तो नहीं है। पुलिस और बैंक स्तर पर चल रही जांच में सीरियल नंबर, सीसीटीवी फुटेज और नकदी के रिकॉर्ड अहम कड़ियां साबित हो सकती हैं।
सीसीटीवी फुटेज से खंगाली जा रही आवाजाही
पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए करेंसी चेस्ट के अंदर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। पिछले कुछ दिनों में करेंसी चेस्ट में आने-जाने वाले कर्मचारियों और अन्य लोगों की गतिविधियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। फुटेज के आधार पर यह देखा जा रहा है कि नोटों से संबंधित अवधि में कौन-कौन लोग वहां मौजूद थे और नकदी के आवागमन की प्रक्रिया क्या रही।
बैंकिंग प्रक्रिया भी जांच के घेरे में
इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट मिलने के बाद केवल नोटों के स्रोत की ही नहीं, बल्कि करेंसी चेस्ट में नकदी पहुंचने और उसकी जांच की पूरी प्रक्रिया को भी खंगाला जा रहा है। नकदी किस शाखा या माध्यम से आई, उसकी गिनती और सत्यापन कब हुआ और नोटों की जांच के दौरान इन्हें पहले क्यों नहीं पकड़ा गया, जैसे सवालों के जवाब भी तलाशे जा रहे हैं।
नोटों के एक बंडल में आठ गड्डी, तो कोई पूरा बंडल ही मिला जाली
सहारनपुर पीएनबी की करेंसी चेस्ट में जांच कर रही टीम के सामने हर बंडल के साथ चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि दस गड्डी के बंडल में पहली और आखिरी गड्डी तो असली मिली, बीच की आठ गड्डियां जाली नोट की रखी गई थी।
घंटाघर स्थित करेंसी चेस्ट में जाली नोटों की जांच बैंक मुख्यालय की टीम कर रही है। अभी तक की जांच में सामने आया है कि करेंसी चेस्ट में नोट रखने के मामले में काफी शातिर तरीका इस्तेमाल किया गया है। आमतौर पर बैंक द्वारा जमा करने वाली राशि को व्यवस्थित करने के लिए बंडल बनाए जाते हैं। इनमें एक गड्डी में 500 रुपये के 100 नोट के हिसाब से 50 हजार रुपये होते हैं। दस गड्डियों को मिलाकर पांच लाख रुपये का एक बंडल बनाया जाता है।
एक बंडल में पांच लाख रुपये की कीमत के नोट होते हैं। जांच के दौरान करेंसी चेस्ट में रखे एक बंडल की दस गड्डियों में आठ गड्डियां नकली मिली हैं। वहीं बताया जा रहा है कि टीम को जांच के दौरान कई ऐसे बंडल भी मिले, जिनमें दस की दस नोटों की गड्डियां ही नकली पाई गईं। इतनी बड़ी मात्रा में धांधली को देखकर जांच कर रहे अधिकारी भी हैरान हैं।
शुरुआती रैक में सही मिले नोटों के बंडल
करेंसी चेस्ट में शुरुआती रैक में रखे बंडल तो एकदम सही मिले। मतलब उनमें एक भी नकली नोट नहीं पाया गया। इसके बाद जब टीम ने अगली कुछ अन्य रैकों में रखे बंडल की जांच की तो नकली नोट की गड्डियां सामने आईं। बाद वाली रैकों में रखे बंडलों में भी यही खेल किया गया था। नकली नोट का खेल करने वालों ने धोखा देने के लिए तरीका अपनाया कि यदि किसी वजह से जांच की जाती है तो शुरुआत में ही जाली नोट न पकड़े जाएं। करेंसी चेस्ट में जो जाली नोट पकड़े गए हैं, वह नए नोटों के हैं।
क्वालिटी को भी परख रही टीम
करेंसी चेस्ट में मिले जाली नोटों की जांच कर रही टीम यह भी देख रही है कि चेस्ट में रखे गए जाली नोटों की गुणवत्ता किस स्तर की है। टीम को जांच में पता चला है कि जाली नोटों को बनाने में सामान्य स्याही और पेपर का इस्तेमाल हुआ है। हालांकि यह जानकारी भी जुटाई जा रही है कि इन जाली नोटों को कहां छापा गया है।
4.30 लाख रुपयों की जांच, तब खुला 17 करोड़ का गबन
पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में करीब 17 करोड़ रुपये के गबन का मामला 4.30 लाख रुपये से खुला है। चेस्ट से 11.50 करोड़ रुपये जयपुर ऑफिस भेजे गए थे। इसमें साढ़े चार लाख रुपये कम निकले। इसके बाद ही बैंक मुख्यालय से टीम सहारनपुर पहुंची।
पंजाब नेशनल बैंक की जिलेभर में तकरीबन 72 शाखाएं हैं। बैंक की दो करेंसी चेस्ट है। इनमें से एक घंटाघर के नजदीक सोफिया मार्केट में हैं। दूसरी करेंसी चेस्ट गंगोह में हैं। इन्हीं दोनों करेंसी चेस्ट में रुपये जमा और निकासी होती है। घंटाघर स्थित करेंसी चेस्ट में ही फर्जी नोट पकड़े गए हैं। मामला तब पकड़ में आया जब पांच अगस्त से करेंसी चेस्ट से 11.50 करोड़ रुपये आरबीआई की जयपुर स्थित ऑफिस में भेजे गए।
इसमें सड़े, गले, कटे-फटे आदि नोट थे। बैंक की ओर से नोट तो जमा कर दिए गए। इसके बाद जयपुर में अधिकारियों ने जमा हुए नोटों में 4,30,900 रुपये कम होने के जानकारी मेरठ ऑफिस को दी गई। इसके बाद मेरठ से टीम ने आकर करेंसी चेस्ट में जांच-पड़ताल की। जांच-पड़ताल के दौरान ही फर्जी नोट पकड़ में आए। फर्जी नोट के मिलने के बाद बैंक के स्थानीय अधिकारियों से लेकर दिल्ली स्थित मुख्यालय तक उच्चाधिकारी अलर्ट हो गए। करेंसी चेस्ट में जाली नोट मिलने के बाद मेरठ और दिल्ली मुख्यालय से टीम ने करेंसी चेस्ट में ऑडिट जारी है।
पहले 7.40 करोड़ रुपये गये पकड़े
सोफिया मार्केट स्थित पीएनबी की करेंसी चेस्ट में जांच टीम ने डेरा डाल रखा है। करेंसी चेस्ट में जमा एक-एक नोट को टीम द्वारा जांचा जा रहा है। शुरुआती जांच में 7.40 करोड रुपये मूल्य के जाली नोट पकड़े गए। टीम ने जैसे-जैसे जांच को आगे बढ़ाया यह संख्या बढ़ती चली गई। सोमवार देर रात तक टीम को जांच के दौरान करीब 17 करोड रुपए मूल्य के जाली नोट मिले हैं। माना जा रहा है कि चेस्ट में जमा किए गए फर्जी नोटों की संख्या और धनराशि बढ़ सकती है। करेंसी चेस्ट से फरवरी में राशि को भेजा गया था। इसके बाद अगस्त में राशि भेजी गई। टीम पिछले चार-पांच दिनों से करेंसी चेस्ट में जांच पड़ताल कर रही है।
फर्जी नोटों की कहां हुई छपाई, पता लगाने में जुटे बैंक-पुलिस
करेंसी चेस्ट में इतनी बड़ी संख्या में जाली नोट मिलना गंभीर मामला है। बैंकों में हर नोट के जमा होने से पहले उसकी जांच-पड़ताल की जाती है। चेस्ट में जमा हुए जाली नोट कहां से आए और उनकी छपाई कहां हुई। यह जाली करेंसी आखिर कैसे चेस्ट के अंदर तक पहुंच गई। इन सभी सवालों का जवाब पुलिस और बैंक अधिकारियों को तलाशने होंगे।
कहीं बड़ा नेटवर्क तो नहीं कर रहा काम
करेंसी चेस्ट से हर दिन लाखों-करोड़ो रुपये का लेनदेन होता है। कैश जमा भी होता है और बैंकों की शाखाओं को भेजा भी जाता है। ऐसे में इन जाली नोटों को किस स्तर पर असली नोटों के बंडल में डाला गया। इसकी भी जांच की जा रही है। इतनी बड़ी संख्या में जाली नोट की छपाई स्थानीय स्तर पर संभव नहीं लगती। ऐसे में इस पूरे खेल के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा। इसकी भी जांच की जा रही है। फर्जी नोट छापने के लिए कागज, स्याही समेत अन्य संसाधनों की आवश्यकता है। इस खेल में और कौन शामिल है। इस पहलू पर भी जांच जारी है।
चेस्ट में जाली नोट मिलने के बाद मुख्यालय से टीम आई है। टीम की जांच जारी है। प्रथम दृष्टया दोषी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है। इसके साथ ही तीन अधिकारी निलंबित कर दिए गए। पार्ट टाइम हाउस कीपर को हटा दिया गया।- निशा सिंह, मुख्य बैंक प्रबंधक, पीएनबी।