लगभग पांच सौ पेड़ों के कटान के बाद जिलाधिकारी आवास के चारों तरफ नई सड़क तो बन गई, पर इसमें बीचोंबीच अभी विद्युत खंभे खड़े हैं। सरकारी धन के दुरुपयोग की यह पराकाष्ठा ही है कि जब खंभे हटेंगे तो ताजातरीन बनी रोड फिर टूटेगी। उस पर फिर सरकारी धन कुर्बान होगा, पर किसी को इससे कोई सरोकार नहीं।
कलक्ट्रेट, डीएम आवास और स्टेडियम के सामने होते हुए रोड चौड़ी हो गई है। इसके चौड़ीकरण और डिवाइडर बनाने के लिए 166 विशाल दरख्त एक बार काटे गए तो दोबारा 327 पेड़ाें पर कुल्हाड़ा चला। खैर, इसका विरोध भी हुआ। चूंकि यह क्षेत्र साहबों के आवासों का है तो ऐसे में रोड तो चौड़ी होनी ही थी। रोड चौड़ी हो भी गई और नया लुक नजर आने भी लगा। हालांकि इन पेड़ों के बदले में काफी पौधे डिवाइडर और डीएम आवास के भीतर भी रोपे गए हैं।
रोड बनी पर नहीं हटे खंभे
यह पूरा प्रोजेक्ट सात करोड़ रुपये का है। काम मेरठ विकास प्राधिकरण करा रहा है। विडंबना यह है कि डीएम आवास के सामने रोड बन गई है। बस लास्ट कोट होना बाकी है। बावजूद इसके अभी तक यहां विद्युत लाइन शिफ्ट नहीं हुई है। बीच सड़क में खंभे खड़े हैं।
खंभे तो शिफ्ट होंगे ही, पर सवाल यह है कि इसके लिए फिर से रोड टूटेगी तो इस धन की बरबादी का जिम्मेदार कौन होगा। जब जिलाधिकारी के घर के सामने की रोड पर सरकारी धन का यह दुरुपयोग हो रहा है तो बाकी का क्या? शहर भर में यही हो रहा है कि पहले सड़क बनाओ। बाद में खंभे हटाओ। रोड टूटेगी तो फिर उसे बनाओ। ऐसे ही पहले सड़क बनती है बाद में केबल या वाटर लाइन डाली जाती है। आखिर अफसरों की आंखें क्या अपने आवासों के सामने हो रहे धन के इस दुरुपयोग को भी नहीं देख रही हैं।
पीवीवीएनएल ने पैसा लेकर भी नहीं किया काम
पावर कारपोरेशन अधिकारियों ने इस्टीमेट बनवाकर इस बाबत पैसा भी जमा करा लिया है। एमडीए एसई के मुताबिक लगभग सत्तर लाख रुपये तो हाल ही मेें जमा कराए गए हैं। बावजूद इसे कारपोरेशन काम नहीं कर रहा हैं। इस बाबत वे कमिश्नर को भी पत्र भेज रहे हैं।
दीवार के ऊपर लगे तार पिचक गए
अभी तो काम ठीक से पूरा भी नहीं हुआ कि हालत खराब हो गई है। कलक्ट्रेट और डीएम आवास की बाउंड्री के ऊपर तार कसी गई है। वह बेहद घटिया है और अभी से दबने लगी है। इस बाबत एसई ने ठेकेदार को चिट्ठी लिखी है। साथ ही अवर अभियंता को निर्देश दिए हैं कि इस बाबत कोई भुगतान न किया जाए। यदि कर दिया गया है तो उसकी कटौती की जाए।