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खुफिया एजेंसियों का काम कब से करने लगीं साध्वी प्राची : उलमा

Mon, 06 Nov 2017 11:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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दारुल उलूम देवबंद
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विश्व हिंदू परिषद की फायर ब्रांड नेता साध्वी प्राची के देवबंद को आतंकियों की शरणस्थली बताने वाले बयान पर उलमा का कहना है कि साध्वी नेतागिरी छोड़कर पुलिस और खुफिया एजेंसियों का काम कब से करने लगीं। साध्वी प्राची ने तब सवाल क्यों नहीं उठाया जब अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में गृहमंत्री रहे लालकृष्ण आडवाणी ने जांच के बाद मदरसों को क्लीनचिट दी थी। 
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पढ़ें : राम मंदिर को लेकर साध्वी प्राची के बयान से आगबबूला हुए देवबंदी उलमा

शनिवार को अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी ने कहा कि देवबंद की सरजमीं और यहां के उलमा ने हमेशा से दहशतगर्दी की पुरजोर तरीके से मुखालफत की है। जबकि यह बात भी याद रखने वाली है कि जब केंद्र में भाजपा की सरकार थी और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। तब सरकार में गृहमंत्री रहे लालकृष्ण आडवाणी ने मदरसों की जांच कराकर पार्लियामेंट में बयान देकर मदरसों को क्लीनचिट दी थी। उस समय साध्वी प्राची ने सवाल क्यों नहीं खड़ा किया। उन्होंने दोहराया कि आतंकवाद का विरोध सबसे अधिक देवबंद की सरजमीं से हुआ है। फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि साध्वी हमेशा से विवादित बयान देती हैं जबकि उन्हें किसी भी मामले की जानकारी नहीं होती। उन्होंने सवाल उठाया कि साध्वी प्राची नेतागिरी छोड़कर पुलिस और खुफिया एजेंसियों का काम कब से करने लगीं। उन्होंने कहा कि देवबंद या किसी भी जगह आतंकवादी रहते हैं या नहीं ये काम पुलिस और खुफिया एजेंसियों का है। साध्वी को यह काम उन्हीं पर छोड़ देना चाहिए। मुफ्ती अरशद ने कहा कि साध्वी प्राची देवबंद आएं और आकर देखें कि यहां अमनो अमान की तालीम दी जाती है। यदि साध्वी को सलीका सीखना है तो वह देवबंद आएं हम उन्हें अमनो अमान का पाठ पढ़ाएंगे।
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