साधारणपुर में शराब से एक और मौत, प्रधान प्रत्याशियों सहित पांच हिरासत में
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। थाना इंचौली क्षेत्र के साधारणपुर गांव में जहरीली शराब ने एक और युवक जोनी (28) की मौत हो गई। पिछले 48 घंटों में शराब पीने से मरने वालों की संख्या 10 तक पहुंच गई है। इनमें पिता-पुत्र भी शामिल हैं। पंचायत चुनाव के दौरान बांटी गई अवैध शराब के कारण इन ग्रामीणों की जान चली गई। इस मामले में काफी फजीहत होने के बाद पुलिस ने दो प्रधान प्रत्याशियों सहित पांच लोगों को हिरासत में लिया। वहीं, पुलिस से लेकर आबकारी विभाग के अफसर अब तक मामले में खामोश रहकर खुद को बचाने में जुटे हैं।
बताया गया है कि इंचौली क्षेत्र के साधारणपुर में प्रधान प्रत्याशी ने 25 अप्रैल को यह शराब बांटी थी। तभी से गांव में मौत होने का सिलसिला शुरू हुआ। सोमवार रात तक नौ लोगों की मौत हुई थी। मंगलवार गांव के ही जोनी की मौत हो गई। हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने किसी भी शव का पोस्टमार्टम नहीं करवाया।
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परिजनों ने बताया था, जहरीली शराब से गई जान
- मरने वाले लोगों के कुछ परिजनों ने मीडिया और पुलिस को बताया था कि प्रधान प्रत्याशी ने शराब बांटी थी। इस जहरीली शराब से ही लोगों की जान गई। गांव में पिता-पुत्र समेत 10 लोगों की मौत से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। मेरठ में जहरीली शराब से लोगों की मौतें हो रही हैं, जिस पर पुलिस-प्रशासन और आबकारी विभाग ने चुप्पी साधी हुई है। सवाल सरकारी मशीनरी पर भी उठ रहे हैं। एक ही गांव में जहरीली शराब से इतनी मौत होने की गूंज लखनऊ तक है।
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पुलिस बनी डॉक्टर, बिना जांच कर दिया बीमारी से मौत का दावा
मेरठ। गांव में लगातार 10 लोगों की मौत के बावजूद पुलिस का रवैया सबसे हैरान करने वाला रहा। अपनी नाकामी छिपाने के लिए पुलिस खुद ही डॉक्टर बन गई और बिना जांच ही दावा कर दिया कि ग्रामीणों की मौत बीमारी से हुई है। शवों का पोस्टमार्टम तक नहीं करवाया गया। अगर बीमारी से भी मौतें हुई हैं तो पुलिस ने पोस्टमार्टम क्यों नहीं करवाया। वहीं, पुलिस और गांव के प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण पीड़ित परिवार भी खुलकर नहीं बोल पा रहे हैं। सरकारी तंत्र इसी कोशिश में है कि कोरोना के शोर में शराब से मौतों का मामला दब जाए।
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शराब से आ रही थी अजीब दुर्गंध
गंगानगर। शराब पीने की वजह से साधारणपुर निवासी एक व्यक्ति की तबियत सोमवार को बिगड़ी थी, लेकिन मंगलवार को वह स्वस्थ हो गए। उन्होंने बताया कि शराब में मिट्टी के तेल जैसी अजीब दुर्गंध आ रही थी। कुछ लोगों नेे कोल्ड ड्रिंक मिलाकर पी थी। शायद इसी शराब को पीने के बाद लोगों की हालत बिगड़ी।
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खुद को बचाने में जुटे जिम्मेदार अफसर
- पुलिस प्रशासन से आबकारी विभाग के अफसर भी इस मामले में खुद को बचाने में जुटे हैं। इसलिए जहरीली शराब बांटने से लेकर सप्लाई करने वालों पर कार्रवाई करने की बजाय बीमारी से मौत होने शोर ज्यादा मचाया जा रहा है। वहीं, गांव के कुछ प्रबुद्ध लोगों ने नसीहत देना शुरू किया है कि वे नशे के चक्कर में जहरीली शराब न पीएं अन्यथा और परिवार बर्बाद हो जाएंगे।
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साधारणपुर में 10 मौतों से परिवारों में मचा कोहराम
गंगानगर। साधारणपुर गांव में लगातार 10 मौतों के बाद पीड़ित परिवारों में कोहराम मच गया है। अपनों को खो चुके कुछ परिवारों की महिलाएं और बच्चे दिनभर रोते बिलखते रहे तो कुछ में मातम पसरा रहा। मरने वालों में सात लोग एक ही मोहल्ले के हैं। ये राज मिस्त्री थे। पड़ोसियों और अन्य ग्रामीणों ने पीड़ित परिवारों को सांत्वना दी। गांव में लाला, महेंद्र, पंकज, अंकित सहित अन्य लोगों की स्थिति गंभीर बताई जा रही हैं। इनके परिजन दहशत में हैं। कुछ ग्रामीणों ने चुनाव के समय शराब बांटने वाले प्रत्याशियों को कोसना शुरू कर दिया। वहीं, कुछ बुजुर्ग और जिम्मेदार लोग युवाओं को शराब की लत से दूर रहने की नसीहत दे रहे हैं। ग्रामीणों में इस बात को लेकर गुुस्सा रहा कि पुलिस ने समय रहते ध्यान नहीं दिया। यदि पुलिस और आबकारी विभाग सक्रिय रहता तो शायद इतनी जिंदगियां खत्म न होतीं।
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