पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर से लेकर गाजियाबाद तक 154 गांवों का पानी पूरी तरह से दूषित हो गया है। हिंडन किनारे बसे इन गांवों के हैंडपंप पानी के साथ जहर उगल रहे हैं। जिससे ग्रामीण कैंसर जैसी बीमारी के शिकार हो रहे हैं। शिकायत के बावजूद इसका कोई समाधान नहीं निकालने वाले जिला प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने फटकार लगायी तो सच सामने आने पर हड़कंप मच गया।
हिंडन नदी से भूगर्भीय जल प्रदूषित होने के बाद बागपत के दाहा गांव निवासी सीबी सिंह ने एनजीटी में रिट दायर की थी। जिसमें ये 154 गांव चिन्हित किए गए। याची का दावा है कि इन गांवों का पानी प्रदूषित हो गया है। जिससे गांव के लोग बीमार हो रहे हैं। रिट में यह भी हवाला दिया कि कुछ लोग कैंसर से भी पीड़ित हैं। एनजीटी ने निर्देश दिए कि गांवों के हैंडपंपों का सत्यापन कराया जाए। जिसके बाद मुख्य सचिव ने सभी डीएम को सख्त निर्देश भेजे हैं। जिस पर 17 अगस्त से काम शुरू हो गया। इसकी सैंपलिंग सत्यापन रिपोर्ट एनजीटी में दाखिल करनी है।
धड़ाधड़ लग रहे लाल निशान
एनजीटी की फटकार के बाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग, जल, स्वास्थ्य और जिला प्रशासन की टीमें गांव-गांव जाकर हैंडपंपों के पानी की टेस्टिंग कर रही है। जिस हैंडपंप का पानी दूषित आ रहा है, उस पर लाल निशान लगाया जा रहा है ताकि लोग उस हैंडपंप का पानी न पी सकें।
मेरठ के ये गांव चिन्हित
किनौनी, छिलौरा, पांचली बुजुर्ग, कलीना, खिवाई, डालमपुर, डालूहेडा, रसूलपुर जाहिद, हर्रा, नाहली, मीरपुर जावेडा आदि गांवों के हैंडपंपों का पानी दूषित बताया जा रहा है। इन गांवों में करीब एक हजार हैंडपंपों की जांच होनी है। अभी तक करीब 100 हैंडपंपों का पानी सैंपलिंग में दूषित पाया गया है। जिस पर इन हैंडपंपों की हत्थी निकालकर इन पर लाल निशान लगाकर लिख दिया कि इन हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं है।
इन गांवों में ताजा स्थिति
बागपत : 53 गांवों मेें पानी पीने योग्य नहीं। 1274 हैंडपंपों के नमूने लिए गए। 743 हैंडपंपों का जल पीने योग्य नहीं मिला।
मुजफ्फरनगर : 54 गांव चिन्हित, जिनका पानी पीने योग्य नहीं। इनमें 2928 हैंडपंपों की जांच में अभी तक 62 हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं मिला।
शामली : 28 गांवों को चिन्हित कर 2770 हैंडपंपों की सैंपलिंग होनी है। अभी तक 183 हैंडपंपों में पीने योग्य पानी नहीं मिला।
सहारनपुर: यहां एक ही गांव बनहैड़ा के 28 हैंडपंपों की सैंपलिंग की जानी है। जिनमें से 6 हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहंी पाया गया।
मेरठ : चिन्हित दस से ज्यादा गांवों में 1126 हैंडपंपों की सैंपलिंग होनी है। करीब 100 हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं। ऐसे हैंडपंपों की हत्थी निकालकर रखी जा रही है।
यह मिल रहा हैंडपंपों में
हैवी मैटल (टैक्सिक मैटल) लैड, आयरन, क्रोमियम, कैडियम आदि की शिकायत है।
ऐसे हो रहा प्रदूषित
अभी तक की जांच में पाया गया कि हिंडन में नगरीय ठोस अवशेष, घरेलू मल, औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाला मल, कचरा, पेस्टीसाइड, फर्टिलाइजर जा रहा है।