राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 11 जनवरी से 15 फरवरी तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया। इनका समापन शहर के विभिन्न हिस्सों में आयोजित देशहित के अनुष्ठानों के साथ हुआ, जिनमें लाखों की संख्या में हिंदू समाज के लोगों ने भाग लिया। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज में देश हित के प्रति जागृति लाना और पूरे शहर को एकजुट करना रहा।
कार्यक्रमों में उपस्थित संत, विचारक और वक्ताओं ने समाज में संस्कार, एकजुटता और सर्व समाज के हित में कार्य करते हुए भारत को विश्व पटल पर अग्रणी बनाने के महत्व पर जोर दिया। प्रवेश विहार में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रांत प्रचार प्रमुख सुरेंद्र और गंगानगर में प्रांत बौद्धिक प्रमुख कृष्ण कुमार ने हिंदू एकता का संदेश देते हुए समाज को संगठित रहने का आह्वान किया।
विभिन्न स्थानों पर हुए महत्वपूर्ण आयोजन
शास्त्रीनगर चाणक्यपुरी बस्ती में संघ के सह प्रांत प्रचारक आनंद ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए पुलवामा कांड के शहीदों को स्मरण किया और आदिवासी क्षेत्रों में संघ द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी दी। मंगल पांडेय नगर सद्भावना पार्क में साध्वी डॉ. प्राची ने संघ पर प्रतिबंध लगाने की बात करने वालों को देशद्रोही बताया और हिंदू समाज से जातियों में न बंटने का आग्रह किया। उन्होंने बच्चों को शिवाजी, महाराणा प्रताप और भगत सिंह जैसे महापुरुषों के बारे में बताने और भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए लड़ने, पढ़ने और देश हित में कट्टर बनने की प्रेरणा दी।
आध्यात्मिक जागरण और सांस्कृतिक एकता पर जोर
मोदीपुरम एटूजेड कॉलोनी में संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख पद्म सिंह ने संघ द्वारा किए गए जागरण कार्यों का उल्लेख किया और देश के महापुरुषों के त्याग व समर्पण से सीख लेने की बात कही। शाश्वत प्रवाह धर्म प्रचार संघ के संस्थापक शाश्वतानंद ने आध्यात्मिक जागरण के साथ लोगों को जोड़ने का प्रयास किया और हिंदू, जैन, बौद्ध व सिख सभी को एक ही पूर्वजों की संतान बताते हुए जनसंख्या वृद्धि पर चिंता जताई।
सैनिक नगर नंगला बस्ती में कथावाचक मथुरा योगेंद्र माधव ने सनातन संस्कृति को जीवित रखने के लिए संगठन और परिवार से शुरुआत करने की आवश्यकता बताई जबकि रोहटा रोड लखवाया में योगी स्वामी कर्मवीर महाराज ने मातृ शक्ति की भूमिका पर प्रकाश डाला। माधवकुंज सरस्वती शिशु मंदिर की प्राचार्य डॉ. प्रियंका चौहान ने हिंदुत्व की कल्पना को स्पष्ट किया। इन आयोजनों में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं, जिन्होंने एकता और राष्ट्रवाद के संदेश को और मजबूत किया।