इसके बाद आरएसएस नेता ने पत्रकारों से वार्ता में कहा कि वह भाईचारे का पैगाम लेकर देवबंद आए हैं, इससे पूर्व भी वह वर्ष 2004 में दारुल उलूम आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा और रोजगार के लिए रास्ते बनाए, जनता आपस में एकजुट होकर भाईचारे के साथ रहे इसी से देश की तरक्की संभव है। कोई भी धर्म हो, उस पर कायम रहना चाहिए। एक दूसरे के धर्म और उनकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारी पहचान किसी धार्मिक व्यक्ति के रूप में नहीं होती बल्कि एक हिंदुस्तानी के तौर पर होती है। सभी को मिलजुलकर इस देश के विकास में योगदान देना चाहिए। इसके लिए उन्होंने मुस्लिम रहनुमाओं से आगे आने का आह्वान किया। इस मौके पर मौलाना शुएब कासमी, कुंवर बासित अली समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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