जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने कहा कि रमजान के महीने में लोग अल्लाह की रजा (खुशी) हासिल करने के लिए रोजे रखते हैं।
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छत्ता मस्जिद में जौहर की नमाज के बाद अपने बयान में मौलाना ने कहा कि रमजान में पूरे दिन भूख और प्यास की शिद्दत आती है। अगर रोजेदार चाहे तो इस शिद्दत को कहीं भी अकेले या सुनसान जगह में जाकर खत्म कर सकते हैं। लेकिन वह जानते हैं कि अल्लाह उन्हें हर जगह देख रहा है। साथ ही यह मानता है कि जब यह काम मैं अल्लाह की रजा के लिए कर रहा हूं तो इसका इनाम भी वही देगा। मौलाना मदनी ने कहा कि रमजान का आखिरी अशरा चल रहा है जिसमें शब-ए-कद्र की ताक रातें आती हैं। अल्लाह ने इन रातों में की जानी वाली इबादत का सवाब एक हजार महीनों से बढ़कर बताया है। इसलिए सभी को चाहिए कि वह इन रातों में अल्लाह की इबादत करें और अपने गुनाहों की तौबा करने के साथ रहमत और बरकतों की दुआएं मांगे। क्योंकि अल्लाह मांगने वालों को देता है।
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