माछरा/मुंडाली(मेरठ)। रमजान उल मुबारक पर 30 रोजे के अलग-अलग तीन चरणों के महत्व पर रोशनी डाली। इमाम शफीक अहमद ने कहा कि रोजे जहन्नुम की आग से निजात दिलाते है।
किठौर-हापुड़ मार्ग स्थित बेतुउलूम मदरसा के इमाम मौलाना शफीक अहमद त्यागी ने कहा कि 30 रोजों में पहले 10 रोजे गुनाह से माफी के लिए हैं। इसके बाद 10 रोजे जहन्नुम की आग से निजात दिलाते हैं।
अल्लाह से माफी मांगने पर गुनाहगारों के गुनाह माफ हो जाते हैं। इसी तरह तीसरे चरण के आखिरी 10 रोजों के बारे में मौलाना हाफिज शफीक अहमद त्यागी ने कुरआन पाक के हवाले से बताया कि यह रोजे जन्नत में दाखिल के लिए रोजेदार की मदद करते हैं।
क्षेत्र मे दूसरे रमजान पर माछरा, नंगली किठौर, बहरोड़ा, रछौती, शोल्दा, हसनपुर कलां, खंद्रावली, रहदरा, राधना, भटीपुरा, जिसोरा, अजराड़ा, जिसोरी, शाफियाबाद लोटी, नंगलामल, मऊखास, सिसौली, मुरलीपुर, आलमपुर, भगवानपुर चट्टावन, समयपुर, नंगला कबूलपुर, पचगांव, मानपुर, कायस्थ बड्ढ़ा, मेघराजपरु आदि गांवों में बडी तादाद में अकीदमंदो ने रमजान रखा।
सोशल डिस्टेंसिंग के तहत अपने अपने घरों से ही नमाज अदा की तथा तरावीह की नमाज भी अदा की। हर मुसलमान को दिन में 5 बार नमाज पढ़ने का नियम है। रमजान में मुस्लिमों द्वारा फितरा और जकात अपनी हैसियत के मुताबिक देना होता है ये एक तरह का दान होता है।