फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सूची दिखाकर हित साध गए हेल्थ के खिलाड़ी

Wed, 23 Sep 2015 01:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग के खिलाड़ियों ने आरएनटीसीपी संविदा भर्ती में भी बड़ा खेल कर डाला। एकाएक जो साक्ष्य सामने आए हैं, उनसे साफ हो रहा है कि चयनित अभ्यर्थियों के नाम से अलग सूची जारी कर गंभीर अनियमितताएं बरती गईं। आरएनटीसीपी (रिवाइज्ड नेशनल टीबी कंट्रोल प्रोग्राम) संविदा भर्ती के साक्षात्कार के बाद डीएम कार्यालय से पहले ही सीएमओ कार्यालय की तरफ से चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी कर दी गई। खास बात यह रही कि इसके बाद डीएम के हस्ताक्षरों से जो असली सूची जारी हुई, उसमें चयनित अभ्यर्थियों के साथ ही दो पद ही गायब हो गए। पूरा मामला सामने आने के बाद अब जिम्मेदार लोग सामने आने से बच रहे हैं।
विज्ञापन


यह हुई थी संविदा पर भर्ती
28 जुलाई 2015 को आरएनटीसीपी के तहत विभिन्न पदों पर संविदा भर्ती के लिए साक्षात्कार आयोजित किए गए थे। इसके तहत ट्यूबर क्लॉसेस हेल्थ विजीटर (टीबीएचवी) के दो और एसटीएस (सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर) के 11 पदों के लिए साक्षात्कार लिए गए थे। जिलाधिकारी पंकज यादव की अध्यक्षता में आयोजित साक्षात्कार के बाद चयनित अभ्यर्थियों के नामों की सूची डीएम कार्यालय की तरफ से तुरंत जारी नहीं की गई थी।

यह हो गया खेल
इस बीच स्वास्थ्य विभाग की तरफ से चयनित अभ्यर्थियों की एक सूची तैयार की गई। जिला कार्यक्रम प्रबंधक इमरान खान के हस्ताक्षर से तैयार की गई सूची में आरएनटीसीपी के तहत संविदा के पद टीबीएचबी और एसटीएस के रिक्त पदों पर चयनित और प्रतीक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थियों के नाम जारी किए गए। जिसमें टीबी एचबी पद पर दो चयनित और दो प्रतीक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थियों के नाम शामिल बताए गए। इसी तरह से एसटीएस पर 11 अभ्यर्थियों को चयनित और चार को आरक्षण के हिसाब से प्रतीक्षा सूची में दिखाया गया। इस जारी सूची में दो बातें खास रहीं। पहली, इस सूची में केवल जिला कार्यक्रम प्रबंधक इमरान खान के ही हस्ताक्षर थे। दूसरी, इस सूची को जारी करने की डेट 28 जुलाई 2015 को दिखाई गई।
विज्ञापन


एक माह बाद असली सूची
चयनित अभ्यर्थियों की इस सूची के करीब एक माह बाद दूसरी असली सूची जारी हुई। इस सूची में तीन खास बातें रहीं। पहली, इस सूची में टीबीएचवी के चयनित और प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों के नाम तो छोड़िए, इन पदों का कॉलम ही नहीं था। दूसरी, इस सूची में जिला कार्यक्रम प्रबंधक, उप मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला क्षय रोग अधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी और जिलाधिकारी के हस्ताक्षर थे। तीसरी, इस सूची को जारी करने की डेट भी 28 जुलाई 2015 ही दिखाई गई।

इस अंतराल में हो गई धांधली
इन दोनों सूची के सामने आने से साफ है कि धांधली कैसे और किस स्तर पर हुई होगी। बताया जा रहा है कि पहली सूची दिखाकर स्वास्थ्य विभाग के खिलाड़ियों ने एक माह के अंतराल में अपने हित साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अंतिम साक्षात्कार के बाद इमरान खान के हस्ताक्षर से बनाई गई सूची के आधार पर अभ्यर्थियों को यह भरोसा दिलाया गया कि डीएम कार्यालय की तरफ से यही नाम फाइनल किये जा चुके हैं। इसकी भनक जब जिलाधिकारी के कानों तक पहुंची तो असली सूची जारी होने के बाद इसकी पोल खुल गई। मंगलवार को जब यह मामला सामने आया तो सीएमओ कार्यालय में खलबली मची रही। जिसका नतीजा यह हुआ कि सारे मामले पर प्रतिक्रिया देने के बजाए सीएमओ डॉ. रमेश चंद्रा और जिला कार्यक्रम प्रबंधक इमरान खान ने फोन ही रिसीव नहीं किया।

ज्वाइनिंग में भी तोड़े नियम
खेल अभ्यर्थियों की चयनित सूची तक ही नहीं, बल्कि ज्वाइनिंग तक भी चला है। सीएमओ ने बिना जिला क्षय रोग अधिकारी को जानकारी दिए सीधे एसटीएस पद पर चयनित अभ्यर्थियों को मनपसंद जगहों पर तैनाती दे दी है। हैरत की बात है कि जिस विभाग के लिए 11 एसटीएस का चयन किया गया है, उस कार्यालय को उनके ज्वाइनिंग पत्र की छायाप्रति भी नहीं भेजी गई है। जबकि नियम के हिसाब से ज्वाइनिंग लेटर सीएमओ कार्यालय जारी करता है और किस जगह पर उनकी तैनाती करनी है, यह फैसला लेने का अधिकार जिला क्षय रोग अधिकारी का होता है। बीते 15-20 साल के दौरान जो भी क्षय रोग विभाग के लिए जितनी भी नियुक्तियां हुई हैं, अगर उन्हें उठाकर देखा जाए तो स्थिति साफ हो जाएगी।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें