इसके चलते पार्टी ने फिर से सियासी वजूद पाने के लिए संगठन को न केवल पूरी तरह बदला है बल्कि भाजपा की तर्ज पर पहली बार मंडल अध्यक्ष के पद को खत्म कर क्षेत्रीय अध्यक्षों की नियुक्ति की है। शुक्रवार को जारी क्षेत्रीय अध्यक्षों की सूची में पश्चिमी यूपी क्षेत्र के हस्तिनापुर क्षेत्र (मेरठ-सहारनपुर मंडल) की जिम्मेदारी जाट बिरादरी से आने वाले पूर्व मंडल अध्यक्ष चौधरी यशवीर सिंह को सौंपी है।
दोनों मंडलों में जाटों की संख्या अच्छी खासी है और पार्टी ने अपने इस हार्डकोर वोटों को फिर से वापस लाने के लिए जाट कार्ड खेला है। हालांकि अब सबकी नजर क्षेत्रीय अध्यक्षों द्वारा बनाए जाने वाले जिलाध्यक्षों पर लगी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में जातिगत समीकरणों के साथ ही पार्टी वफादारों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।
हालांकि वर्तमान राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए पार्टी पदाधिकारियों के सामने पार्टी के बेस वोटर जाट-मुसलिम को जोड़ने की बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए क्षेत्र की कमेटी में जाटों के अलावा मुसलिम और अन्य बिरादरियों के नेताओं को भी उचित भागीदारी देकर इस कार्य