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भाजपा की तर्ज पर नए संगठन से सियासी जमीन तैयार करेगा रालोद 

Sat, 14 Sep 2019 05:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा राजदीप जाखड़, मेरठ
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रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह - फोटो : अमर उजाला
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पश्चिमी यूपी में प्रभाव रखने वाली पार्टी रालोद पिछले छह साल से खोए सियासी वजूद को पाने के लिए संघर्ष कर रही है। इस कड़ी में पार्टी ने प्रदेश संगठन को पूरी तरह बदलते हुए भाजपा की तर्ज पर बनाया है। 

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चार क्षेत्रों में बांटे गए प्रदेश में शुक्रवार को पार्टी हाईकमान ने सभी क्षेत्रीय अध्यक्षों की घोषणा कर दी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अपने क्षेत्र में राजनीतिक रसूख रखने और लंबे समय से पार्टी से जुड़े नेताओं को ही जिम्मेदारी दी गई है। 

वर्ष 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगे के चलते रालोद की राजनीति पटरी से उतरी हुई है। कैराना लोकसभा उपचुनाव को अपवाद के रूप में छोड़ दें तो पार्टी को लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 के अलावा विधानसभा चुनाव 2017 में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा है। 
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छपरौली से जीते पार्टी के एकमात्र विधायक सहंदर रमाला भी पिछले दिनों पाला बदलकर भाजपाई हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2019 में बसपा और सपा के साथ के बावजूद पार्टी के लचर संगठन से हुई पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी की हार ने सबकुछ बदलकर रख दिया है। 

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इसके चलते पार्टी ने फिर से सियासी वजूद पाने के लिए संगठन को न केवल पूरी तरह बदला है बल्कि भाजपा की तर्ज पर पहली बार मंडल अध्यक्ष के पद को खत्म कर क्षेत्रीय अध्यक्षों की नियुक्ति की है। शुक्रवार को जारी क्षेत्रीय अध्यक्षों की सूची में पश्चिमी यूपी क्षेत्र के हस्तिनापुर क्षेत्र (मेरठ-सहारनपुर मंडल) की जिम्मेदारी जाट बिरादरी से आने वाले पूर्व मंडल अध्यक्ष चौधरी यशवीर सिंह को सौंपी है। 

दोनों मंडलों में जाटों की संख्या अच्छी खासी है और पार्टी ने अपने इस हार्डकोर वोटों को फिर से वापस लाने के लिए जाट कार्ड खेला है। हालांकि अब सबकी नजर क्षेत्रीय अध्यक्षों द्वारा बनाए जाने वाले जिलाध्यक्षों पर लगी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में जातिगत समीकरणों के साथ ही पार्टी वफादारों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। 

हालांकि वर्तमान राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए पार्टी पदाधिकारियों के सामने पार्टी के बेस वोटर जाट-मुसलिम को जोड़ने की बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए क्षेत्र की कमेटी में जाटों के अलावा मुसलिम और अन्य बिरादरियों के नेताओं को भी उचित भागीदारी देकर इस कार्य 
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