डॉ. बालियान ने बताया कि मरीजों में यह देखा जा रहा है कि उनकी उम्र 40 से 60 साल के बीच है। साथ ही उन्हें बीपी और शुगर की बीमारी है। यह लोग बीपी की नियमित दवाई नहीं ले रहे थे। इस वजह से बीपी और शुगर लगातार बढ़ा हुआ रहता है। ऐसे में अगर मरीज अचानक ठंड से गर्मी या गर्मी से ठंड में जाते हैं, तो ब्रेन हैमरेज की आशंका बढ़ जाती है।
जिला अस्पताल प्रभारी डॉ. कौशलेंद्र ने बताया कि एसी से तुरंत धूप में न जाएं या फिर धूप से तुरंत एसी वाली जगह न बैठें। ऐसा करने से पहले एसी को कम कर दें, ताकि शरीर का तापमान बाहर के तापमान के बराबर आ जाए।
आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुब्रतो सेन ने बताया कि भीषण गर्मी में वात, पित्त, कफ के असंतुलित होने के कारण उच्च रक्तचाप, हृदय, मधुमेह आदि रोगों से ग्रस्त लोग चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, घबराहट, थकान आदि समस्याओं का सामना कर रहे हैं। बीमारी बढ़ने पर ब्रेन हेमरेज, हार्ट अटैक जैसी घातक बीमारी का भी सामना करना पड़ सकता है। लो ब्लड प्रेशर की समस्या बहुत अधिक बढ़ गई है।
ब्रेन हैमरेज के लक्षण
शरीर के एक हिस्से में अंतर दिखना।
चेहरे, हाथ-पैरों का सुन्न होना।
किसी बात को बोलने में दिक्कत होना, दृष्टि में समस्या, सिर दर्द।
उल्टी व मतली होना, शरीर में अकड़न होना।
अस्पतालों में मरीजों की संख्या हुई दोगुना
डॉ. कौशलेंद्र ने बताया कि जिला अस्पताल में आम दिनों में 1 हजार से 1200 के आसपास ओपीडी होती थी। अब मरीजों की संख्या बढ़कर 1800 से 2000 के आसपास पहुंच रही हैं। आईएमए मेरठ अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन ने बताया कि मेडिकल कॉलेज, प्राइवेट अस्पतालों के साथ निजी चिकित्सकों के पास भी मरीजों की संख्या दोगुना हो गई है। ऐसे में आंकड़ा 5000 के पार पहुंच गया है।