एक साल बाद भी रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) रीडर सिस्टम परवान नहीं चढ़ पा रहा है। पहले इसे जोर शोर से लागू करने की बात थी, लेकिन अब इस पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत टैक्स चोरी रोकने के लिए वाणिज्य कर विभाग ने पिछले साल अक्तूबर में चिप (टैग) लगाना शुरू किया था। एक नवंबर 2018 से बिना इस चिप के प्रांत के अंदर प्रवेश करने वाले ईवे बिल धारक माल वाहक वाहन के विरुद्ध जीएसटी अधिनियम की धारा-129 के तहत अर्थदंड की कार्रवाई की जानी थी। लेकिन विभाग इस काम को लेकर लापरवाही दिखा रहा है। अब तक 50 हजार से ज्यादा वाहनों में इस चिप को लगाया जाना था, लेकिन लगे हैं सिर्फ 13 हजार। वाणिज्य कर के डिप्टी कमिश्नर ओपी वर्मा ने बताया कि टैग लगाए जाने का काम चल रहा है। चिप को माल ढोने में एक-दूसरे जिले या प्रदेश में आने जाने वाले वाहनों में लगाया जाना है।
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ईवे बिल सही है या नहीं, चलेगा पता
आरएफ आइडी सिस्टम भी एक दूसरे से जुड़ने हैं। इस तकनीक से पता लगाया जा सकेगा कि कौन सा ट्रक किस लोकेशन में है। किस रास्ते से होकर गुजरा है। किस रास्ते पर ट्रक ज्यादा देर रुका। ट्रक में लदे माल का ईवे बिल सही है या नहीं। बिना ईवे बिल का माल तत्काल पकड़ा जाएगा। रास्ते में लगने वाली सचल दल इकाइयों का काम आसान होगा। सचल दल इकाइयों को अलर्ट मिलेगा कि कौन सी गाड़ी दोषपूर्ण है।