मेरठ में गन्ना विभाग में लंबे समय से चला आ रहा पर्ची घोटाला पकड़ में आया है। विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए उप गन्ना आयुक्त द्वारा कराए गए मंडल के सर्वे में 5 हजार से ज्यादा मृतक किसानों के बांड चलते पाए गए तो वहीं 3139 हेक्टेयर रकबा फर्जी मिली। इतने बड़े फर्जी रकबे को दर्शाकर किसानों को पर्ची जारी की जा रही थी। 625 किसानों के डबल बांड मिले। प्रदेश में भी यही स्थिति है। अगर सही तरीके से जांच कराई जाए तो अन्य मंडलों में भी भारी धांधली मिलेगी और गन्ना माफियाओं का खेल उजागर हो सकेगा।
उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग द्वारा संचालित गन्ना विकास समितियां शुगर मिल और किसान के बीच सेतु का काम करती है। गन्ना एक्ट के मुताबिक प्रदेश के किसान शुगर मिलों को सीधे गन्ना ना देकर समिति के माध्यम से मिलों को अपना गन्ना आपूर्ति करते हैं। इसके लिए किसानों को निर्धारित फीस अदा करके गन्ना विकास समिति का सदस्य बनना पड़ता है। समिति अपने सदस्यों को गन्ना आपूर्ति करने के लिए बांड (अनुबंध पत्र) जारी करती है, जिसके आधार पर किसान अपना गन्ना मिल को सप्लाई करते हैं। गन्ना माफिया और रसूखदार किसान समिति कर्मचारियों की मिलीभगत से बांड में खेल कराते हैं। मंडल के किसान हर साल वास्तविक रकबे से ज्यादा रकबा होने, कुछ किसानों के डबल बांड होने और मृतक किसानोें के भी बांड चलने की शिकायत करते रहे हैं। मेरठ परिक्षेत्र के उप गन्ना आयुक्त हरपाल सिंह ने शिकायतों को देखते हुए रकबे और बांड की जांच कराई थी। जांच में बेहद चौंकाने वाले मामले सामने आए।
5030 मृतक किसानों के मिले बांड, 3139 हेक्टेयर रकबा फर्जी
जांच में 5030 मृतक किसानों के बांड चलते मिले। ये बांड पिछले कई सालो से चालू थे और इन पर लगातार पर्ची जारी की जा रही थी। इसके अलावा मंडल के वास्तविक गन्ना रकबे से 3139 हेक्टेयर रकबा अधिक मिला जो फर्जी तरीके से दर्शाकर रसूखदार किसानों और गन्ना माफियाओं ने अपने बांड बढ़ाए हुए थे।