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आबादी के हिसाब से निगम के पास नहीं कोरोना से बचाव के संसाधन

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निगम के पास नहीं कोरोना से बचाव के संसाधन
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मेरठ। शहर में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं संक्रमण पर काबू पाने के लिए नगर निगम के पास पर्याप्त संसाधन ही नहीं है। बाजारों, गलियों और मोहल्लों आदि को सैनिटाइज करने के लिए 10 टैंकर किराए पर लेने पड़े हैं। इतना ही नहीं सीवर जेटिंग मशीनों को भी सैनिटाइजेशन कार्य के लिए प्रयोग किया जाने लगा है। बजट होने के बाद भी यदि निगम समय रहते जरूरी संसाधन बढ़ा लेता तो आज दिक्कत न होती।
नगर निगम का काम कंटेनमेंट जोन से लेकर पूरे शहर की सफाई और सैनिटाइज कराना है। शहर के 90 वार्डों में करीब 19 लाख की आबादी है। इन सभी वार्डों को सैनिटाइज किया जाना है। इस समय कुल 19 टैंकरों से सैनिटाइजर का छिड़काव किया जा रहा है। इनमें 10 टैंकर किराए पर लिए हुए हैं। इस हिसाब से एक टैंकर के हिस्से में जहां करीब 5 वार्ड हैं, वहीं 12 हजार से ज्यादा मकान हैं। एक टैंकर में 2 हजार लीटर पानी आता है। सैनिटाइजर के काम में लगे कर्मचारियों का कहना है कि सैनिटाइजर का घोल कुछ देर में ही खत्म हो जाता है। बार-बार घोल तैयार करके लाने में ही काफी समय खर्च हो जाता है।
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आपदा के लिए मिला था 50 लाख का बजट
कोरोना आपदा के लिए नगर निगम को 50 लाख रुपये का बजट मिला था। इस बजट से निगम को फ्रंट लाइन वर्करों को सुरक्षा किट, सैनिटाइजर और सफाई में लगे वाहनों को ईंधन और सोडियम हाईपो क्लोराइड, चूना और ब्लीचिंग पाउडर आदि की खरीद करनी थी, लेकिन नगर निगम ने जरूरी संसाधनों को नहीं जुटाया। आज हालात ये हैं कि कंट्रोल रूम में शिकायत मिलने के घंटों बाद ही सैनिटाइजर के लिए टैंकर पहुंचता है।
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नगर निगम मौजूदा संसाधनों का सदुपयोग कर कोरोना से लड़ाई में निर्णायक भूमिका निभा रहा है। कर्मचारी सैनिटाइजेेशन और सफाई के लिए हर जगह पहुंच रहे हैं। अधिकारी लगातार पूरे अभियान की निगरानी कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर और संसाधन जुटाए जाएंगे। -मनीष बंसल, नगरायुक्त
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