सहारनपुर के पुवांरका क्षेत्र की प्रशांत विहार और परशुराम कॉलोनी के लोगों ने सड़क और नाले का निर्माण न होने से नाराज होकर चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया है और कॉलोनी में बैनर लगा दिए हैं।
सहारनपुर जनपद के पुवांरका क्षेत्र की प्रशांत विहार और परशुराम कॉलोनी में विकास कार्य न होने से नाराज कॉलोनीवासियों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। आक्रोशित लोगों ने कॉलोनी की मुख्य सड़क से लेकर अंदरूनी रास्तों तक चुनाव बहिष्कार के बैनर लगा दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से सड़क और नाले के निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन शासन और प्रशासन की ओर से उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया।
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25 साल पुरानी कॉलोनी, फिर भी नहीं बनी सड़क
वार्ड-13 पुवांरका ब्लॉक के सामने स्थित प्रशांत विहार और परशुराम कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि उनकी कॉलोनी करीब 25 वर्ष पुरानी है और यहां लगभग चार हजार की आबादी रहती है। यह मुख्य सड़क कृष्ण धाम से होते हुए भगवती कॉलोनी और बेहट रोड को जोड़ती है, लेकिन आज तक यहां न तो सड़क बन पाई और न ही जर्जर नाले का निर्माण कराया गया।
हल्की बारिश में भी बन जाता है तालाब
कॉलोनीवासियों के अनुसार हल्की बारिश होते ही मुख्य सड़क तालाब बन जाती है। जलभराव के कारण बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो जाता है और लोगों को अपने काम पर जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सड़कों पर कीचड़ और पानी भरे रहने से दुपहिया वाहन चलाना लगभग असंभव हो जाता है। सबसे अधिक परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ती है।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से लगाई गुहार
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे नगर आयुक्त, मेयर, सांसद, क्षेत्रीय विधायक और वार्ड पार्षद तक से कई बार शिकायत कर चुके हैं। बावजूद इसके समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका आरोप है कि जनप्रतिनिधि यह कहकर जिम्मेदारी से बचते हैं कि यह कॉलोनी उनके वार्ड का हिस्सा नहीं है, बल्कि चक सैद रजा क्षेत्र में आती है। जबकि चुनाव के समय इसे वार्ड-13 का हिस्सा बताकर वोट मांगे जाते हैं।
मजबूरी में लिया चुनाव बहिष्कार का फैसला
कॉलोनी में दो स्कूल, दो मंदिर और एक मदरसा-मस्जिद भी है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। स्थानीय निवासी राजकुमार सैनी, श्वेता, मोहम्मद तालिब, सोनू, सत्तर अहमद, सोनी दास, परमजीत सिंह, नवीन कुमार, मोहम्मद वसीम और रिजवाना सहित अन्य लोगों का कहना है कि अब उनके सामने चुनाव बहिष्कार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।