चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के प्रेमचंद सेमिनार हॉल में प्रेमचंद का साहित्य वर्तमान और भविष्य विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में स्कॉलर डॉ. प्रदीप जैन ने कहा कि प्रेमचंद ने तीन सौ से अधिक कहानियां लिखीं, लेकिन चर्चा सिर्फ कुछ ही कहानियों पर होती है। उन पर ब्राह्मण, इस्लाम और दलित विरोधी जैसे आरोप लगाए गए, जो गलत हैं। उन्होंने जोर दिया कि प्रेमचंद पर गहन शोध की जरूरत है।
प्रो. प्रज्ञा पाठक ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ऐसे कहानीकार हैं जिनका महत्व हर दौर में एक-सा रहेगा। उनकी रचनाओं में सामाजिक समस्याएं, इंसानी भावनाएं और वर्तमान के मुश्किल मुद्दे स्पष्ट दिखते हैं। आमिर मेहंदी ने उर्दू को सिर्फ मुसलमानों की भाषा न बताते हुए कहा कि यह भारतीय भाषा है। इसमें फारक गोरखपुरी, बेदी, कृष्ण चंद्र जैसे गैर-मुस्लिम लेखक भी लिखते रहे। शहर काजी जैनुल सालिकिन ने शोध में ईमानदारी पर जोर दिया। प्रो. असलम जमशेदपुरी ने कहा कि अच्छी कहानी पाठक को बार-बार पढ़ने पर मजबूर करती है। प्रेमचंद की कहानियों में कलात्मक चपलता और बेहतरीन शैली है। आज की समस्याओं को उन्होंने अपने समय में ही महसूस कर लिया था, इसलिए उनका साहित्य कभी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।