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गूगल की अपेक्षा रिसर्च सेंटर पर अधिक समय दें शोधार्थी

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गूगल की अपेक्षा रिसर्च सेंटर पर अधिक समय दें शोधार्थी
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मेरठ। मेरठ कॉलेज के रक्षा अध्ययन विभाग के सेमिनार हॉल में शुक्रवार को राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (आरवीएसए) और एडवांस रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट ऑफ सोशल साइंस (एआरआईडीएसएस) के संयुक्त तत्वावधान में सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसका विषय शोध प्रविधि पर्यावरण पोषणीय विकास रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर किया।
उद्घाटन सत्र में प्रबंध समिति सचिव सेठ दयानंद गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में पूरा विश्व पर्यावरण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। इस पर सभी को ध्यान देने की जरूरत है। कॉलेज प्राचार्य संगीता गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में पर्यावरण और पोषणीय विकास पर मौलिक शोध की आवश्यकता है। क्योंकि भौतिकतावाद, व्यक्तिवाद और उपभोक्तावाद के कारण हमारी जीवन शैली पूरी तरह से बदल चुकी है। आधुनिक मानव ने प्राकृतिक साधनों का दुरुपयोग किया है। आज पूरे विश्व को जनसंख्या नियंत्रण की आवश्यकता है। हमें भावी पीढ़ी के लिए पेड़, जंगल, जल एवं मृदा आदि संसाधनों को संरक्षित करने को पोषणीय विकास अपनाना होगा। कन्वीनर डॉ. भूपेंद्र सिंह ने बताया कि आरवीएसए की स्थापना 2013 में भारत सरकार द्वारा की गई थी। इस वित्तीय संस्थान का अधिकांश भाग शोध और नवोन्मेष पर खर्च किया जाएगा।
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कोआर्डिनेटर डॉ. संजय कुमार ने कहा कि एफडीपी और यूजीसी ने मॉडल कॉलेजों को चिन्हित किया है। महाविद्यालयों में इस तरह के प्रोग्राम आयोजित करने की जिम्मेदारी भी दी गई है। इस प्रोग्राम के अंतर्गत शिक्षकों को ज्ञान के क्षेत्र में होने वाले नए विकास और नई तकनीकी जानकारियों से अवगत कराया जाएगा।
डीएन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बीएस यादव ने कहा कि आज गुणात्मक रिसर्च की आवश्यकता है। रिसर्च सेंटर व्यक्ति के विकास का सर्वोत्तम केंद्र माया गया है। शोधार्थियों को गूगल की अपेक्षा रिसर्च सेंटर पर अधिक समय देना चाहिए। वहां के माहौल में वह सहज रूप में व्यक्तित्व का विकास कर सकते हैं। हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज से आए डॉ. सुबोध कुमार सिंह ने रिसर्च कॉलेजों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कापीराइट और प्लेजरिज्म में अंतर बताया और सिविल व क्रिमिनल लायबिलिटी वाला बताया। खुद की रिसर्च के साहित्य चोरी हो सकते हैं, यदि उसका रेफरेंस न दिया जाए। रिसर्च के अंत में रेफरेंस देने पर उन्होंने बड़ा बल दिया। घोस्ट राइटर को रोकने का प्रबंध होना चाहिए। डॉ. रामकुमार गुप्ता ने कहा कि आज के समय में गूगल की नहीं स्वाध्याय की आवश्यकता है। शोधार्थियों के लिए एकाग्रता और अनुशासन जरूरी है।
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- ये रहे मौजूद
संचालन नोडल अधिकारी डॉ. नीलम ने किया। कार्यक्रम में डॉ. राजकुमार उपाध्याय, डॉ. एसपी वर्मा, डॉ. राजीव राठौर, डॉ. कल्पना मित्तल, डॉ. रमेश यादव मौजूद रहे।
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