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किसानों ने ट्रैक्टर-ट्राली अड़ाकर हाईवे पर ही तंबू गाड़ा, चढ़ा दी कढ़ाई

Tue, 02 Feb 2016 02:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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गन्ना मूल्य, बकाया भुगतान और बिजली की बढ़ी दरों के विरोध में सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) द्वारा आहूत हाईवे जाम सफल रहा। कार्यकर्ताओं ने जहां मेरठ-करनाल हाईवे और मेरठ-बागपत रोड को तीन घंटे के बाद आजाद कर दिया गया तो नेशनल हाईवे-58 को सात घंटे तक किसानों ने अपने कब्जे में रखा।
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किसानों ने हाईवे पर ही तंबू गाड़ दिया और कढ़ाई चढ़ा दी। ट्रैक्टर-ट्राली अड़ाकर किसानों ने सड़क पर ही डेरा जमा लिया। सड़क के दोनों तरफ पांच किलोमीटर से लंबा जाम लग गया। पुलिस-प्रशासन को ज्ञापन लेने के लिए गुहार लगानी पड़ी। जिसके बाद ही देर शाम ज्ञापन सौंपकर धरना खत्म किया गया।

भाकियू कार्यकर्ताओं ने सुबह 11 बजते-बजते हाईवे और मुख्य मार्गों पर कब्जा कर लिया था। एनएच-58 पर बाईपास स्थित खिर्वा चौराहा, मेरठ-करनाल मार्ग पर गांव दबथुआ और मेरठ-बागपत रोड पर गांव जानी के सामने सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए जाम लगा दिया। देखते ही देखते यहां वाहनों की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। लोगों ने किसानों से जाम खोलने की गुहार की, लेकिन किसान नहीं माने। एनएच-58 पर किसानों ने बीच सड़क पर ही तंबू गाड़ दिया और कढ़ाई चढ़ाकर भोजन बनवाना शुरू कर दिया।
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केंद्र और प्रदेश सरकार पर निशाना
इस बीच किसानों ने केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी जारी रखी। भाकियू नेता जवाहर सिंह जिटौली, रवींद्र दौरालिया और सतबीर जंगेठी ने कहा कि दोनों सरकारों ने किसानों से किए वादे पूरे नहीं किए हैं। तीन साल से गन्ना रेट नहीं बढ़ाया। भुगतान भी समय से नहीं हो रहा है। भारतीय किसान आंदोलन के कुलदीप त्यागी ने कहा कि बिजली बिलों को तीन से चार गुणा तक बढ़ाकर भेजा जा रहा है।

विनोद जिटौली, बाबा इलम सिंह और संजय दौरालिया ने कहा कि सरकार ने चीनी मिलों पर रियायतों की बौछार कर रखी है। किसानों को गन्ना उत्पादन लागत भी नहीं दी जा रही है। प्रदेश की मिलों पर पिछले सत्र का 1500 करोड़ और इस साल का साढ़े हजार करोड़ रुपये बकाया हो गया है।

कहीं माने तो कहीं अड़ गए
दबथुआ और जानी में पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों की गुहार के बाद तीन घंटे बाद दोपहर दो बजे जाम खत्म कर दिया। लेकिन खिर्वा चौराहे पर जाम लगाकर बैठे कार्यकर्ता अड़ गए। यहां पर करीब सात घंटे तक किसानों ने हाइवे जाम रखा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मान मनव्वल करते रहे, लेकिन भाकियू नेता जाम खोलने को तैयार नहीं हुए। काफी हील हुज्जत के बाद शाम करीब छह बजे किसानों ने जाम खोल दिया। इस दौरान टीटू जिटौली, सुभाष प्रजापति, मुजम्मिल, मोहब्बत, कुशल खुर्द, शिब्बू जेवरी, सुभाष जिटौली, बीसी पंवार, अजय शर्मा मौजूद रहे। दबथुआ में जगबीर दबथुआ, विनेश प्रधान छुर, नीटू, सुरेंद्र, वीरेंद्र मलिक जबकि जानी में हरेंद्र जानी, डॉ. नत्थु, भीम सिंह, भोपाल टीकरी, रामबीर टीकरी, कवींद्र आदि मौजूद रहे।

इनको नहीं परेशान किया
भाकियू कार्यकर्ताओं ने लोगों की परेशानी को समझते हुए बीमार लोगों के अलावा स्कूली वाहनों को जाने दिया। हालांकि यह पहले ही तय हो गया था कि एंबुलेंस, स्कूली वाहन और बारात बस को रोका नहीं जाएगा।

जहां से जगह मिली, निकल लिए
हाईवे जाम में फंसे लोगों को जहां से जगह मिली, वे वहीं से वाहनों को निकालते रहे। लोग एक-दूसरे से सुरक्षित रास्ते पूछते रहे। इसके चलते गांवों के रास्तों पर भी भारी जाम लग गया। बहुत से वाहन खेतों में फंस गई। लोग किसानों से निकलने के लिए गुहार भी लगाते देखे गए। किसी ने बीमार होने का बहाना बनाया तो किसी ने जरूरी काम से जाने का।
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