प्रख्यात उपन्यासकार और मेरठ की धरोहर वेद प्रकाश शर्मा शनिवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उनका जाना साहित्य जगत के लिए ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई शायद ही कोई कर पाए। वह अपने जमाने के बेस्ट सेलर उपन्यासकार थे। करीब एक साल से कैंसर से पीड़ित वेद प्रकाश शर्मा का शुक्रवार देर रात निधन हो गया था। सूरजकुंड पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। परिवार, मित्र और साहित्य जगत के लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
वेद प्रकाश शर्मा के निधन की खबर जैसे ही सुबह अखबारों में पढ़ी तो प्रशंसक और चाहने वालों का उनके घर पर तांता लग गया। उपन्यास जगत में अपना साम्राज्य स्थापित करने वाला अचानक इतनी जल्दी चला जाएगा, प्रशंसकों को विश्वास नहीं हो रहा था। शनिवार पूर्वाह्न 11 बजे सूरजकुंड श्मशानघाट पर वेद प्रकाश शर्मा के पार्थिव शरीर को उनके बेटे शगुन शर्मा ने मुखाग्नि दी। इस दौरान उनकी तीनों बेटियां करिश्मा, गरिमा और खुशबू मौजूद रहीं। उनकी अंतिम यात्रा में परिवार और मित्रों के अलावा साहित्य और सियासत से जुड़े लोग भी शामिल हुए। वरिष्ठ कवि डॉ. हरिओम पंवार, परशुराम शर्मा, शैलेंद्र तिवारी, निर्मल गुप्त, आबिद रिजवी, सुरेश जैन रितुराज, सुमनेश सुमन, संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष नवीन गुप्ता, महामंत्री अरुण वशिष्ठ, कृष्ण कुमार किशनी, डॉ. ज्ञानेंद्र शर्मा, मुकेश जैन, ओमकार चौधरी, नितिन सबरंगी आदि मौजूद रहे।
वह मंच से बचते थे, दिलों में बसते थे : डॉ. हरिओम पंवार
वेद प्रकाश शर्मा की अंतिम यात्रा में पहुंचे उनके मित्र कवि डॉ. हरिओम पंवार ने कहा कि वह मेरठ की धरोहर थे। शहर को उनके नाम से जाना जाता था। कवि सम्मेलन में लोग उनसे वेद प्रकाश शर्मा के उपन्यास की मांग करते थे। वह लेकर जाते थे। व्यक्तिगत रिश्ते निभाने में उनका कोई सानी नहीं था। कवि सम्मेलन में आते थे तो पीछे चुपचाप बैठ जाते थे। कई बार वह उन्हें उठाकर मंच पर लेकर गए। वह मंच से बचते थे, लेकिन अपनी सादगी से लोगों के दिलों में बसते थे। वह कितने बड़े साहित्यकार थे, मेरठ यह समझ ही नहीं पाया। अगर उनके उपन्यासों का अंग्रेजी में अनुवाद होता तो दुनिया में उनका डंका बजता। क्राइम राइटिंग में उन्होंने नए मापदंड बनाए। पिछले दिनों वेद प्रकाश की एक प्रशंसक डॉ. वीणा सागर मेरे पास आईं। उन्होंने कहा कि आपके शहर में मेरा भगवान रहता है। वेद प्रकाश शर्मा जी का नाम लेकर मिलवाने की गुजारिश की। एक दिन सुबह घर आ गईं, तब वह बीमार चल रहे थे। मुलाकात कराई। डॉ. वीणा अपनी बेटी को भी उनसे मिलवाने के लिए लाई थीं।
उपन्यासकार वेदप्रकाश शर्मा के पिता मिश्री लाल शर्मा मूलत: बुलंदशहर के बिहरा गांव के रहने वाले थे। बाद में उनका परिवार मेरठ में कोतवाली के स्वामीपाड़ा में रहने लगा। वर्तमान में शास्त्रीनगर के ब्लॉक में परिवार रह रहा है। वेदप्रकाश शर्मा का जन्म छह जून 1955 को हुआ था। 17 फरवरी को शास्त्रीनगर में अपने आवास पर उन्होंने आखिरी सांस ली।
वेदप्रकाश शर्मा की पत्नी मधु शर्मा के अलावा तीन बेटी और एक बेटा है, सभी की शादी हो चुकी है। बेटी करिश्मा एमबीबीएस डॉक्टर हैं, गरिमा गौड़ बुलंदशहर में अधिवक्ता हैं। खुशबू जैन का कपड़ों का कारोबार है, खुशबू के पति वैभव जैन पंजाबीपुरा के व्यापारी हैं।