हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान के चौथे दिन धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। शांतिधारा अमित जैन ने की। शांतिधारा का वाचन बाल ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने किया। तीर्थ क्षेत्र कमेटी सदस्य एवं विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने मंगल तिलक और माल्यार्पण किया। कपिल जैन ने भजनों की प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
अनुष्ठान को युवा विधानाचार्य पंडित आशीष जैन शास्त्री और दिलीप जैन शास्त्री ने संपन्न कराया। विधान के चौथे दिन 160 परिवारों ने भाग लिया। सायंकालीन कार्यक्रम में आरती के बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। पुरस्कार वितरण नीरज जैन, पंकज जैन और उषा जैन ने किया।
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मंगल प्रवचन में मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि जिनेंद्र भगवान और जीवात्मा के गुण समान हैं। अंतर केवल इतना है कि भगवान कर्मों से मुक्त हैं जबकि जीव कर्मबंधन में बंधा हुआ है। उन्होंने कहा कि जिनेंद्र भगवान की भक्ति, स्तुति और पूजन से आत्मबोध जागृत होता है। मन की पवित्रता और धर्म के प्रति रुचि बढ़ती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को नियमित देवपूजा करनी चाहिए।