उधर, मामले को लेकर हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भी हंगामा किया। विवाद गहराता देख फिलहाल महिला व उसके बच्चों को गांव मखियाली स्थित आशा ज्योति केंद्र की संचालिका व डायल-181 प्रभारी अंजना चौहान के सुपुर्द कर दिया गया है।
इन्होंने कहा...
एडीएम प्रशासन अमित कुमार सिंह का कहना है कि महिला की गुमशुदगी दिल्ली के जहांगीरपुरी थाने में दर्ज है। ऐसे में उसकी सुपुर्दगी को लेकर जो भी कार्रवाई होगी, वह दिल्ली पुलिस के स्तर से ही होगी। रविवार को महिला को पुलिस टीम के साथ जहांगीरपुर भेजकर दिल्ली पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा।
बकरीद पर लापता हुई थी शहजादी
तितावी के गांव जसोई निवासी महबूब के दस बच्चे हैं, जिनमें सात लड़कियां व तीन लड़के हैं। इनमें दूसरे नंबर की बेटी शहजादी आठ साल की उम्र में करीब 20-22 साल पूर्व बकरीद पर लापता हो गई थी। परिजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन वह नहीं मिली। अब रेखा द्वारा खुद को कथित रूप से शहजादी बताए जाने पर महबूब व उसके परिजन उसे बेटी तो मानते रहे, लेकिन इस संबंध में कोई भी तथ्य पुलिस-प्रशासन के समक्ष पेश नहीं कर सके। यही नहीं, जब महिला हेल्पलाइन व डायल-181 की टीम ने महिला के कथित भाई शहजाद से उनका डीएनए टेस्ट कराने की बात कही तो वह फरार हो गया।
दिल्ली से आने के बाद हरिद्वार में रही महिला
खुद को शहजादी बताने वाली महिला रेखा पत्नी राजकुमार दिल्ली से 15 मई को लापता होने के बाद पहले हरिद्वार पहुंची थी। जांच में पता चला कि वहां वह तीनों बच्चों के साथ एक आश्रम में रही। वहां से तीन दिन पूर्व वह सीधे जसोई पहुंची और खुद को शहजादी बताते हुए महबूब के घर जा पहुंची।
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