गन्ने की फसल में बीमारी की जांच करते गन्ना अधिकारी और वैज्ञानिक
मेरठ। गन्ने की फसल में रेड रॉट का खतरा मंडरा रहा है। यह गन्ने की फसल के लिए विनाशकारी है। इससे फसल को 30 से 70 प्रतिशत तक का नुकसान पहुंचता है। समय रहते बीमारी का उपचार नहीं किया गया तो गन्ना किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह निर्देश सोमवार को उपगन्ना आयुक्त राजीव राय के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने नंगलामल चीनी मिल के नंगलामल, रछौती, जसौरी और मुंडाली क्षेत्र में गन्ने की फसलों का निरीक्षण करते समय किसानों को दिए।
उन्होंने निरीक्षण के दौरान 2.513 हेक्टेयर में रेड रॉट, पोका बोईंग एवं चोटी बेधक कीट के आंशिक आपतन का 18 कलंप का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि यह रोग एवं कीट गन्ने की उपज, शर्करा प्रतिशत एवं भविष्य के उत्पादन चक्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। इसके लिए रेड रॉट जैसी फफूंदी जनित बीमारी पर सतत निगरानी की जाए। संक्रमण स्थल पर ब्लीचिंग पाउडर डालकर मिट्टी से पूरी तरह बंद किया जाए। उप गन्ना आयुक्त ने कहा कि अब तक के सर्वेक्षण में 20 खेतों में 57 कलम्प रेड रॉट से ग्रसित पाए गए हैं। जिनसे लगभग 5.953 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हो रहा है। भ्रमण के दौरान ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक, वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नंगलामल महाप्रबंधक, उप महाप्रबंधक रहे।