फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

योगीराज में वसूली करने वालों से डर गए अफसर, ऐसे कैसे सुधरेंगे हालात?

Wed, 12 Apr 2017 02:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
यूपी के सीएम आदित्यनाथ योगी का भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश का सपना मेरठ में टूटता  नजर आ रहा है। शहर में अवैध पार्किंग में जनता से वसूली अफसरों की निगाह में आ चुकी है, मगर अफसर कार्रवाई से बच रहे हैं। सवाल ये है कि अफसर डर रहे हैं या जानबूझकर कार्रवाई करना ही नहीं चाहते। 
विज्ञापन

 अवैध पार्किंग के खेल में प्रतिदिन जनता से खुलेआम एक लाख से अधिक की लूट हो रही है। जिसको लेकर नगर निगम अधिकारी तो चुप्पी साधे हुए हैं ही साथ में जिला प्रशासन भी कुछ भी बोलने से बच रहा है। नगरायुक्त देवेन्द्र कुमार कुशवाहा के आदेश को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन अपर नगरायुक्त ने न तो अवैध पार्किंग की जांच करायी है और न ही किसी के खिलाफ एफआईआर की कार्रवाई की गई है। वसूली का खेल लगातार चल रहा है।
अमर उजाला ने एक के बाद एक अवैध वाहन पार्किंग और उसमें हो रही जनता से अवैध वसूली को अभियान चलाकर उजागर किया। निगम प्रशासन यह भी उजागर करने को तैयार नहीं है कि आखिर किसके दबाव में वह कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। 
विज्ञापन


मंगलवार को यहां खूब चला वसूली का खेल
केस नं. एक, मूलचंद शर्बती देवी अस्पताल के बाहर अवैध वाहन पार्किंग चल रही है। जिसमें प्रतिदिन 800 से एक हजार टू और फोर व्हीलर पहुंचते हैं। पार्किंग का ठेका 31 मार्च को खत्म हो चुका है। उसके बाद भी वाहन पार्किंग में वसूली हो रही है। 
केस नं. दो, पश्चिमी कचहरी गेट पर पिछले दो साल से अवैध वाहन पार्किंग चल रही है। पूर्व में अवैध पार्किंग के संचालन में सपा नेताओं का संरक्षण बताया जाता था। अब किसका संरक्षण है, ये पता नहीं। लेकिन कार्रवाई के नाम पर निगम अफसरों की जान सूख रही है। इस अवैध पार्किंग के कारण मार्ग अक्सर जाम रहता है। 
विज्ञापन


ये है जनता के सवाल 
- जब शहर में सारी पार्किँग अवैध तो जनता से वसूली क्यों बंद नहीं
- एफआईआर के बाद एसएसपी अवैध पार्किंग चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई को तैयार हैं तो निगम अधिकारी क्यों खींच रहे हैं हाथ?
- निगम के अफसर डर रहे हैं तो क्यों खुद संज्ञान नहीं लेते पुलिस अधिकारी।
- किसने बांध रखे हैं पुलिस अफसरों के हाथ।
- नगरायुक्त के आदेश पर आखिर अपर नगरायुक्त क्यों करना नहीं चाहते अमल?
- अधिकारी जवाब दें कि क्या इसी तरह होगा शहर अतिक्रमण मुक्त ? 
- क्या अवैध वसूली को भ्रष्टाचार और गुंडाराज नहीं मानते अधिकारी? 

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें