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पेट की भूख मिटाने के लिए हर जोखिम लेने को तैयार

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भीमकुंड तराहे पर बाढ़ के पानी में मस्ती करते बच्चे स्रोत संवाद
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- राशन के लिए जान जोखिम में डाल रहे ग्रामीण
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रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर। प्रशासन द्वारा लगातार जलमग्न और गहरे रास्तों से अभी बाहर ने आने की ग्रामीणों से अपील की जा रही है। बाढ़ राहत सामग्री भी पहुंचाई रही है। इसके बाद भी पेट की भूख मिटाने के लिए ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
रविवार को भीमकुंड गांव के समीप चांदपुर मार्ग पर तीन युवक हाथ में थैले में राशन लेकर एक छोटी सी ट्यूब के सहारे करीब 10 से 12 फीट गहरे पानी को पार कर रहे थे। जब उन युवकों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि घर में बच्चे भूखे हैं। खाने के लिए राशन नहीं है। चांदपुर के नारनौल की ओर भी जल स्तर बहुत ज्यादा है, जहां पर अभी आवागमन आसान नहीं है। वहीं हस्तिनापुर की ओर भी इस टूटे संपर्क मार्ग पर पानी बह रहा है। ऐसे में दोनों ओर वह गंगा के बीच में फंसे हैं। जीवित रहने के लिए राशन और दवाइयों की जरूरत है। ऐसे में अगर एक बार जान संकट में चली जाए तो कोई परेशानी नहीं है, क्योंकि उनके इस प्रयास से उनके परिवार के लोग सुरक्षित रह सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि इस समय परिस्थितियां ही कुछ ऐसी हैं कि जान का जोखिम लेंगे तो ही जीवित रहेंगे। सोचा था कि हस्तिनापुर से चांदपुर मार्ग का निर्माण हो चुका है और अब उनके गांव के रास्ते भी पूरी तरह दुरुस्त हैं। परंतु बाढ़ के कारण सड़कें जलमग्न हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पीडब्ल्यूडी ने गंगा पार करने के लिए संपर्क मार्ग को बनाया तो इसमें बड़ी लापरवाही कर दी। इसमें एक भी बड़ा पुल नहीं बनाया। इस कारण प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये से बनी सड़कें बाढ़ के पानी में बह जाते हैं। इसके बाद फिर करोड़ों रुपये का बजट पास कर कर इसे दुरुस्त कराया जाता है। हर साल यही दोहराया जाता है। यह सिलसिला तभी से चला आ रहा है जब से यह संपर्क मार्ग बना है। उन्होंने कहा कि इस संपर्क मार्ग के बनने से पहले उनका आवागमन आसान था। वह गंगा के सहारे आवागमन करते थे। उस समय संपर्क मार्ग का मामला ही नहीं था।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में वितरित की 757 राशन किट

एडीएम सूर्यकांत त्रिपाठी त्रिपाठी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सरकार द्वारा दी जाने वाली बाढ़ राहत सामग्री किट वितरित की जा रही है। अभी तक 757 किट का वितरण किया गया है जो सरकार के पोर्टल पर भी ऑनलाइन अपलोड कर दी गई हैं। उन्होंने बताया कि एक किट में 26 तरह की सामग्री है, जिसमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में फंसे लोगों की हर जरूरत का सामान है। इस किट के सहारे वह गहरे पानी में डूबने से भी आसानी से बच सकते हैं। साथ ही एक सप्ताह से अधिक किसी भी स्थान पर फंसे रहने की स्थिति में अपना जीवन यापन भी कर सकते हैं।

भीमकुंड तराहे पर बाढ़ के पानी में मस्ती करते बच्चे स्रोत संवाद

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