युवाओं ने निभाई अहम भूमिका
शहर के विद्यार्थी राष्ट्रीय आंदोलन में तेजी से आगे आए। विद्यार्थी खादी संघ, हिंदुस्तानी सेवा दल, यंग कामरेड लीग आदि संस्थाओं ने सविनय अवज्ञा आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इतिहासकार केडी शर्मा ने बताया कि विद्यार्थी प्रदर्शनकारियों ने इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए। लाल स्याही से लिखे गए इश्तहार को पुलिस थानों, कोतवाली, सैनिक भवनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर चिपकाया गया। इन इश्तहारों में सोवियत प्रतीक हथोड़ा और हसिया अंकित था। विप्लवी दल हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का क्रांतिकारी संदेश लिखा हुआ था। आंख के बदले आंख की चेतावनी के साथ कहा गया था कि महात्मा के शांतिमय सैनिकों के साथ दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना को लाल पोस्टर केस के नाम से जाना जाता है। सुंदर लाल जैन को इस केस में गिरफ्तार किया गया।
मौलाना आजाद की आजादी की मांग
मौलाना आजाद 1930 के दशक में मेरठ आए और विशाल जन समूह को उन्होंने संबोधित किया। भाषण में उन्होंने आजादी की मांग की। मेरठ से उन्हें बंदी बनाया गया और छह माह की सजा दी गई। यह समय उन्होंने मेरठ जेल में बिताया।
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मेरठ में चला साम्यवादी षड्यंत्र केस
मेरठ 1857 के बाद देश और विश्व में चर्चा का विषय बना रहा। साम्यवादी षड्यंत्र केस में भारत के विभिन्न भागों से नेताओं को गिरफ्तार कर मेरठ लाया गया। इनमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महासमिति के सदस्य भी थे। मेरठ लाकर इन सभी नेताओं पर सरकार के विरुद्ध षड्यंत्र करने के आरोप में मुकदमा चलाया गया। अभियुक्तों पर साम्यवादी प्रचार का भी आरोप था। ब्रिटिश पार्लियामेंट और इंग्लैंड के अखबारों ने इस केस में बहुत रुचि ली। मुकदमे के समय सरकारी प्रकाशन विभाग के निदेशक स्वयं उपस्थित रहते थे और मुकदमे से संबंधित प्रकाशन कार्य खुद देखते थे। मेरठ के दो लोग-गौरी शंकर और धर्मवीर अभियुक्त थे। गांधीजी और नेहरू अभियुक्तों से मिलने मेरठ आये। अभियुक्तों को लंबी सजाएं हुईं।