पुतला
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कस्बे के मोहल्ला तीरग्रान रामलीला के पुतले बनाने के लिए जाना जाता है। करीब 50-55 साल से शब्बीर का परिवार पुतले बनाने का कार्य करता है। फिलहाल तीसरी पीढ़ी इस कार्य में जुटी है। शब्बीर के सात पुत्र लियाकत, रियासत, इरफान, शराफत, शमीम, नसीम, शहजाद और उनके पौत्र समेत तीन दर्जन सदस्य इस धंधे में जुटते थे। ऑर्डर समय से पूरा करने के लिए जन्माष्टमी से ही पुतले तैयार करने शुरू कर दिए जाते थे। पुतलों के ढांचे में लगने वाली सामग्री तैयार कर लेते थे।