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शक्तिशाली और बुद्धिमान थे रावण और कंस, अभिमान ने कर दिया पतन

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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
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हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के मल्लिनाथ भगवान के समवशरण में दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन मुख्य वेदी में विराजमान त्रय तीर्थंकरों का जलाभिषेक किया गया। विधान की मांगलिक क्रियाएं पंडित आशीष जैन शास्त्री व पंडित आयुष शास्त्री ने की। शांतिधारा की बोली विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने प्रारंभ की। शांतिधारा जेके जैन, शीला जैन, संजना जैन, सुरेंद्र जैन, नूपुर जैन, सानिका जैन ने की। राजेंद्र जैन ने सहयोग किया।
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आचार्य ज्ञान भूषण महाराज ने उत्तम मार्दव धर्म पर मंगलमय प्रवचन देते हुए कहा कि मान, घमंड, अभिमान को छोड़ो। मान को महान विष की संज्ञा दी गई है। जिस प्रकार से विष व्यक्ति का सर्वनाश कर देता है, उसी प्रकार से घमंड करने वाले का भी सर्वनाश हो जाता है। चाहे हम कितने ही धनवान, ज्ञानवान, बलवान हों परंतु इसका घमंड न करें। क्योंकि अभिमान पतन का कारण है। यह इंसान की सुख, शांति भंग कर देता है। रावण, कौरव, कंस बहुत शक्तिशाली, बुद्धिमान थे। किंतु इनके पतन का कारण इनका अहम रहा है। घमंड के वशीभूत होकर इनका सर्वनाश हुआ है।







भक्तों ने पूर्ण भक्ति के साथ भगवान मल्लिनाथ का गुणगान करते हुए वातावरण को गुंजायमान कर दिया। सायंकालीन बेला में सभी श्रद्धालुओं ने संगीतमय आरती की।
इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, सुनील जैन, प्रवीण जैन, महाप्रबंधक मुकेश जैन, अतुल जैन, उमेश जैन, कमल जैन, आदि ने सहयोग किया।

प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद

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