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रतनपुरी से राधना-सरधना मार्ग खस्ताहाल

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शामली में ब्लॉक रोड पर फैली गंदगी - फोटो : SHAMLI
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रतनपुरी से रार्धना-सरधना मार्ग खस्ताहाल
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शामली, रतनपुरी। रतनपुरी से रार्धना होते हुए सरधना जाने का संपर्क मार्ग पिछले काफी समय से बदहाल है। इस मार्ग की मरम्मत डेढ़ वर्ष पूर्व गन्ना विभाग ने कराई थी। यह मार्ग रतनपुरी से मेरठ जिले के अकलपुरा, रार्धना, कुशावली, भमौरी, खेड़ा, सलावा, आखेपुर, ज्वालापुर, झिटकरी, नवाबगढ़ी आदि गांवों को जोड़ते हुए सरधना तक जाता है। यह मार्ग मेरठ जिले के पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा सरधना से मेरठ की अंतिम सीमा तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत साढ़े तीन मीटर चौड़ा बनाया गया था। लेकिन मुजफ्फरनगर सीमा में पड़ने वाला करीब दो किमी का टुकड़ा जर्जर हालत में ही पड़ा है।
अब गन्ने का सीजन भी आरम्भ हो चुका है। ऐसी स्थिति में गन्ना किसानों को गन्ना डालने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग पर तीन ईंट भट्टे और सीमेंट की टाइल ईंटों की दो फैक्टरी भी है, जहां हर समय भारी वाहनों का आना जाना लगा रहता है। बुढ़ाना, शामली, कांधला की ओर से आने वाले वाहन चालक इस मार्ग को मेरठ के शॉर्टकट के रूप में भी प्रयोग करते हैं। मार्ग की हालत जर्जर होने से वाहन चालकों के अलावा ग्रामीणों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
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- बिजेंद्र सिंह का कहना है कि मुजफ्फरनगर सीमा में पड़ने वाला करीब दो किमी का टुकड़ा पहले जैसी जर्जर हालत में पड़ा है। रतनपुरी के ग्रामीण मार्ग के जीर्णोद्धार हेतु विधायक विक्रम सैनी, ब्लॉक प्रमुख से भी मुलाकात कर चुके हैं लेकिन अभी तक किसी ने इस मार्ग की कोई सुध नहीं ली है।
-सतेंद्र सोम का कहना कि मार्ग की हालत जर्जर होने के कारण गन्ने के सीजन में किसानों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग पर बनाया गया नाला भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चुका है। इस कारण मार्ग पर जलभराव की स्थिति बनी रहती है। बरसात के समय स्थिति बदतर हो जाती है।
-पूर्व प्रधान रिछपाल सिंह का कहना है कि यह मार्ग मेरठ के लिए शॉर्टकट के रूप में जाना जाता है। इस मार्ग से रतनपुरी बस स्टैंड से सरधना की दूरी करीब 12 किमी ही पड़ती है। लेकिन इस मार्ग के जर्जर होने से क्षेत्रवासियों के अलावा वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
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- जनेश्वर सिंह का कहना है कि उनका मकान इस मार्ग पर स्थित है। फिलहाल इस मार्ग पर सड़क का नामोनिशान नहीं बचा है। दिनभर यहां धूल मिट्टी उड़ती रहती है। इस कारण यहां सांस लेना भी दूभर हो गया है।
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