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शौचालय में मिले प्रतिबंधित दवाओं के रैपर-सिरिंज

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एथलेटिक्स प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने लीं प्रतिबंधित दवाएं
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। एथलेटिक्स प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने धड़ल्ले से प्रतिबंधित दवाओं का सेवन किया। स्टेडियम का टॉयलेट में काफी सिरिंज और दवाओं के रैप मिले हैं।
भारतीय एथलेटिक्स संघ ने राज्यों को कड़ी चेतावनी दी थी, कि अगर डोपिंग का मामला पकड़ में आया तो खिलाड़ी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उत्तर प्रदेश को पहले स्थान पर रखा गया था। बावजूद इसके कैलाश प्रकाश स्टेडियम में प्रतिबंधित दवाओं का इस्तेमाल कर पदक पाने की चाहत दिखी। क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी आले हैदर ने बताया कि डोपिंग केस को रोकने के लिए कोचों को जागरूक करना चाहिए। खिलाड़ी प्रतिबंधित दवा लेकर पदक जीत रहा है तो उसका लाभ उसको नहीं मिलेगा। नेशनल एंट्री डोपिंग एजेंसी (नाडा) राट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं में सैंपल लेंगे तो जीवन बर्बाद हो जाएगा। जिला एथलेटिक संघ सचिव अनु कुमार ने बताया प्रतियोगिताओं के दौरान नाडा की टीम मैदान पर होनी चाहिए थी। संघ ने खिलाड़ियों पर नजर रखी, लेकिन खिलाड़ियों ने टॉयलेट में जाकर प्रतिबंधित दवाएं लीं।
एक साथ दौड़ाए 15 खिलाड़ी, चोटिल हुए
मैदान पर 7 ब्लॉक का ट्रैक बनाया गया था, लेकिन खिलाड़ियों की संख्या अधिक होने के कारण आयोजकों ने 10 से 15 खिलाड़ी एक साथ दौड़ा दिए। इसका खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ा। कई खिलाड़ी बीच में ही गिरकर चोटिल हो गए। स्पाइक शूज की नोंक ने एक खिलाड़ी को लहूलुहान कर दिया। इससे खिलाड़ियों में गुस्सा भी था। लेकिन मैदान पर किसी खिलाड़ी की कोई सुनवाई नहीं थी। मैदान पर प्राथमिक उपचार की भी व्यवस्था नहीं की गई थी। खिलाड़ी दर्द से तड़पते रहे, साथी उन्हें उठाकर चिकित्सक के पास ले गए।
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मेरठ के हाथों से फिसल गया पदक
200 मीटर अंडर-18 बालिका वर्ग में मेरठ की उड़न परी रूपल चौधरी दौड़ में प्रतिभाग नहीं कर सकीं। स्टार्टर की ओर से फायरिंग कर दी गई, तब तक रूपल तैयार नहीं हुई थी। हालांकि रूपल के विरोध के बाद उसको सिंगल दौड़ाया गया , जिसमें उसने 27 सेकंड में दौड़ पूरी की। लेकिन पहली दौड़ में विजेता देवरिया की शैली के परिजनों ने विरोध कर दिया। जिसके बाद संघ ने फाउल मानते हुए शैली को विजेता घोषित कर दिया। रूपल और कोच विशाल सक्सेना ने मामले में संघ के फैसले को सही बताया।
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