एनसीआरटीसी के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पुनीत वत्स का कहना है कि रैपिड एक्स के छह कोचों में से एक प्रीमियम कोच में यह सुविधा हासिल होगी। प्रीमियम कोच में आरामदायक घूमनेवाली सीटें, मोबाइल व लैपटॉप चार्जिंग पोर्ट, सामान रखने की रैक, मैगजीन होल्डर सहित अन्य आधुनिक सुविधाएं होंगी।
रैपिडेक्स में मौजूद रहेंगे अटेंडेट
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जरूरतमंद यात्रियों को मिलेगी सुविधा
रैपिड एक्स ट्रेन में अटेंडेंट की सुविधा होने से सबसे ज्यादा राहत बुजुर्गों, दिव्यांगों, बीमारों और अन्य जरूरतमंद यात्रियों को विशेष रूप से मिलेगी। अटेंडेंट की ओर से ऐसे यात्रियों की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा। अगर किसी यात्री को सामान उठाने और रखने में परेशानी का सामना करना पड़ता है तो वह उसकी मदद करेगा। किसी आपात स्थिति में वह पूरी ट्रेन में सवार अन्य यात्रियों की मदद भी करेगा।
पूरी तरह प्रशिक्षित होंगे अटेंडेंट
ट्रेन अटेंडेंट को यात्रियों की सुविधा के साथ किसी भी आपात स्थिति के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ऐसे में ट्रेन खराब होने के साथ आपात स्थिति में ट्रेन ऑपरेटर के दिशा-निर्देशों के तहत अटेंडेंट कोच में लगे निकास उपकरण को संचालित करेगा।
वहीं स्टेशन साइट डोर को खोलकर यात्रियों को ट्रेन से बाहर निकालने में मदद करेगा। अगर किसी तकनीकी कारणवश ट्रेन एलिवेटेड ट्रैक के बीच में रुक जाती है तो इस स्थिति में ट्रेन अटेंडेंट सवार सभी यात्रियों को आपातकालीन द्वार से ट्रैक से नीचे उतरने में सहायता करेगा।
पहले चरण के 17.2 किमी. मार्ग पर फरवरी में कराए गए ट्रायल रन के सफल होने के बाद अब इस रेल खंड पर रैपिड रेल की नियमित परिचालन शुरू करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए दुहाई यार्ड में रैपिड रेल कॉरिडोर के ऑपरेशन एंड कमांड कंट्रोल सेंटर के निर्माण का काम भी अंमित चरण में है। पूरे रूट पर चलने वाली सभी रैपिड ट्रेनों का संचालन और नियंत्रण संचालन इसी केंद्र से किया जाएगा।
180 किमी की रफ्तार से दौड़ेगी
पहले चरण के रैपिड रेल मार्ग पर पांच स्टेशन होंगे। इनमें साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर और दुहाई शामिल हैं । इस रेल मार्ग पर रैपिड रेल 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी, जो देश की सबसे तेज गति से चलने वाली ट्रेन होगी। योजना के मुताबिक दिल्ली से मेरठ के रूट पर कुल 30 रैपिड रेल चलाने की योजना है, लेकिन फिलहाल सिर्फ 13 ट्रेनों का परिचालन किया जाएगा।
2025 तक पूरा होगा काम
दिल्ली से मेरठ तक बन रही आरआरटीएस का काम दिसंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।