रैपिड रेल को मुजफ्फरनगर तक चलाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंजूरी दे दी है। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने के आदेश अधिकारियों को दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर यह जानकारी दी। सरायकाले खां से मोदीपुरम तक बनाए जाने वाले रैपिड रेल के 82 किमी कॉरिडोर का काम दो चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में साहिबाबाद से दुहाई तक 16 किमी और दुहाई से शताब्दी नगर तक लगभग 34 किमी में रैपिड रेल के पिलर निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है।
अब मुजफ्फरनगर तक प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्ताव पर मुहर लगने से केंद्र सरकार को इस पर अंतिम निर्णय लेना है। मेरठ से मुजफ्फरनगर तक रैपिड रेल कॉरिडोर निर्माण होने के बाद यह 50 किमी अतिरिक्त बढ़ जाएगा। अगर अनुमति मिल जाती है तो कुल 132 किमी का रैपिड रेल कॉरिडोर हो जाएगा। मेरठ से मुजफ्फरनगर तक हाइवे होने के कारण एलिवेटेड ट्रैक से ही रैपिड रेल मुजफ्फरनगर तक पहुंच जाएगी।
रैपिड रेल के 12 स्टेशनों के स्टील स्ट्रक्चर के लिए निकले टेंडर
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम की तरफ से पोर्टल पर 12 स्टेशनों के स्टील स्ट्रक्चर के लिए टेंडर अपलोड किए गए हैं। इसमें परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ नॉर्थ, मोदीपुरम, मुरादनगर, मोदीनगर साउथ, नॉर्थ, मेरठ साउथ, एमईएस कॉलोनी, डौरली शामिल किए गए हैं। इसके लिए बोली लगाने की अंतिम तिथि छह अक्तूबर रखी गई है।
जमीन का नहीं सुलझ रहा मामला
रैपिड रेल स्टेशनों के लिए कई स्थानों पर जमीन की जरूरत है। कमिश्नर अनीता सी. मेश्राम के निर्देश देने के बाद भी रैपिड रेल को दी जाने वाली जमीन का मामला नहीं सुलझ रहा है। रैपिड रेल स्टेशनों के लिए सबसे अधिक समस्या शहर के बीचोंबीच आएगी। अभी तक भैंसाली बस अड्डे की जमीन पर जिलाधिकारी की तरफ से कोई वार्ता भी नहीं की गई है। डिपो बनाने के लिए भी दौराला में अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। यहां भी किसानों के साथ कोई वार्ता नहीं हो सकी है।