प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद मेट्रो से पहले रैपिड पर काम होने की उम्मीद बढ़ गई है। ये प्रोजेक्ट मेरठ के लिए अहम हैं और दोनों की ही डीपीआर इस समय प्रदेश सरकार के पास है। लेकिन मेट्रो सपा सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट था, इसलिए रैपिड शहर में पहले आने की उम्मीद बढ़ गई है।
मेरठ में मेट्रो ट्रेन चलाने के लिए सूबे की सपा सरकार गंभीर थी। सीएम अखिलेश यादव का यह ड्रीम प्रोजेक्ट था। यही कारण रहा कि इसकी डीपीआर को मंजूर कर प्रदेश सरकार को भेज दिया गया। पिछले साल 30 जून को तत्कालीन मुख्य सचिव ने इसे हरी झंडी दे दी थी। उसके बाद कैबिनेट को यह जानी थी। वहां से अनुमोदित कर केंद्र सरकार के पास प्रोजेक्ट भेजा जाना था।
जहां तक रैपिड की बात है, नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (एनसीआरटीसी) बोर्ड ने दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट को मंजूरी देकर दिल्ली और यूपी सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा है। दोनों राज्यों की मंजूरी के बाद ही आगे का काम शुरू होगा। दो माह पूर्व ये प्रस्ताव भेजे गए थे। अब नई सरकार का गठन होेते ही माना जा रहा है कि इन प्रस्तावों पर फिर मंथन होगा। जिस प्रोजेक्ट में नई सरकार को लाभ दिखाई देगा, उसी को वरीयता दी जाएगी। हालांकि रैपिड पर केंद्र सरकार पहले से ही गंभीर थी।
मेट्रो के 29 स्टेशन
प्रथम कॉरिडोर में 16 स्टेशन होंगे, जिनमें परतापुर, डीएन पॉलीटेक्निक, रिठानी, शताब्दीनगर, संजय वन, ब्रह्मपुरी, बागपत रोड क्रॉसिंग, रेलवे रोड चौराहा, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कालोनी, सोफीपुर, डोरली, गुरुकुल, पल्लवपुरम, मोदीपुरम हैं। द्वितीय कॉरिडोर में 13 स्टेशन होंगे, जिनमें श्रद्धापुरी फेस-2, कंकरखेड़ा, मेरठ कैंट, रजबन बाजार, बेगमपुल, बच्चा पार्क, शाहपीर गेट, हापुड़ अड्डा चौराहा, गांधी आश्रम, मंगलपांडे नगर, तेजगढ़ी, मेडिकल कालेज, जागृति विहार एक्सटेंशन हैं। एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन की औसत दूरी प्रथम कॉरिडोर में 1.2 किमी और द्वितीय कॉरिडोर में 1.1 किमी होगी।
रैपिड ट्रेन में ये है खास
6 कोच की ट्रेन में 182 यात्री बैठ सकेंगे। दोनों तरफ होंगे तीन-तीन दरवाजे।
परिचालन की अधिकतम स्पीड 160 किमी प्रति घंटा और औसत स्पीड 100 किमी रहेगी।
आग लगने की दशा में तुरंत सूचना देने की तकनीक से लैस होगी ट्रेन।
ट्रेन के कोच में ऐसा सिस्टम लगा होगा कि अचानक बिजली से संपर्क खत्म होने पर भी 90 मिनट तक वेंटिलेशन की दिक्कत नहीं होगी।
ओवरहेड वायर से बिजली मिलनी बंद हो जाए, तो भी तीन घंटे तक लाइट और उद्घोषणा काम करेगा।
ट्रेन एक सेकेंड में 1.3 मीटर की रफ्तार पकड़ लेगी।
ट्रेन और ट्रैक स्टैंडर्ड गेज (1435 एमएम) की होगी।