आरोपी आकाश ने बताया कि मोबाइल फोन में अश्लील फिल्म देखकर उसने इस घटना को अंजाम दिया है। उसके खेत के पास ही दूसरे खेत में बच्ची व उसकी मां काम करते हैं। उसने पहले कभी भी बच्ची को नहीं देखा था। वह खेत में गया तो बच्ची अकेली थी। इसके बाद उसने दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।
अध्यादेश आते ही दे दिया घटना को अंजाम
शनिवार को ही प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पॉक्सो एक्ट में बदलाव से जुड़े आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश 2018 को मंजूरी दी गई थी। इसमें 12 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों से रेप के मामले में न्यूनतम 20 साल कारावास और अधिकतम फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है। इस कानून के बनने के बाद भी अपराधियों पर कोई खासा असर नहीं दिख रहा है, जिसके चलते बागपत में फिर मासूम बच्ची को हवस का शिकार बनाया गया।
रेपिस्ट को चौराहे पर दी जाए मौत की सजा
जनपद में मासूम बच्चियों से लेकर वृद्ध महिलाओं तक कोई सुरक्षित नहीं है। आए दिन मासूम बच्चियों व महिलाओं के साथ हो रही रेप की घटनाओं से हर कोई सहमा हुआ है। लोगों का कहना है कि मासूम बच्चियों से रेप करने वालों को फांसी के सजा के बजाए, चौराहों पर खड़ा करके खुलेआम मौत की सजा दी जाए।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/