फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ramzan 2024: जिंदगी जीने का तरीका सिखाता है रमजान, रोजेदार सेहत का रखें ध्यान, बरतें ये एहतियात

Thu, 14 Mar 2024 03:48 PM IST
Dimple Sirohi शाह आलम त्यागी, संवाद न्यूज, एजेंसी

सार

इबादत, नेकियों और रौनकों से भरा पाक माहे-रमज़ान लोगों जीने का तरीका सिखाता है। इस बार प्रत्येक रोजा 13 घंटे का होगा। ऐसे में रोजेदारों को इबादत के साथ साथ सेहत के प्रति सचेत रहने की सलाह दी जा रही है।
विज्ञापन
मस्जिद में नमाज अदा करते अकीदतमंद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पाक माहे-रमज़ान इबादत, नेकियों और रौनक का महीना है। इस पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों का खजाना लुटाता है और भूखे-प्यासे रहकर खुदा की इबादत करने वालों के गुनाह माफ किए जाते हैं।

विज्ञापन


रोजा अच्छी जिंदगी जीने का तरीका सिखाता है। आलिमों ने बताया कि रमजान के मायने संपन्न लोगों को भी भूख-प्यास का अहसास कराकर पूरी कौम को अल्लाह तआला के करीब लाकर नेक राह पर डालना है।
 

खुद को खुदा की राह में इबादत के लिए लगाना पाक महीना ‘’माह-ए-रमजान’’ न सिर्फ रहमतों और बरकतों की बारिश करता है, बल्कि समूची इंसान की कौम को प्यार, भाईचारे और इंसानियत का भी पैगाम देता है। रोजे का फर्ज अदा करने का मौका रमजान में आता है।

विज्ञापन


यह भी पढ़ें: अपनों से किनारा गैरों का सहारा: मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर  प्रत्याशी को लेकर असमंजस में बसपा

कहा जाता है कि रमजान में हर नेकी का सवाब 70 नेकियों के बराबर होता है। रोजा अच्छी जिंदगी जीने की कसरत है, जिसमें इबादत कर खुदा की राह पर चलने वाले इंसान का जमीर रोजेदार को नेक इंसान के व्यक्तित्व के लिए जरूरी हर बात की तरबीयत देता है।

कुरआन शरीफ में अल्लाह तआला फरमाते हैं कि रोजे रखवाने का मकसद तुम्हे भूखा रखना नहीं है, बल्कि तुम्हें रोजा रखने का हुक्म इसलिए दिया गया है कि तुम अपनी नफ्स व ख्वाहिशों पर काबू पाकर परहेजगार बन सको। 

शहर काजी मुफ्ती शाकिर कासमी ने हदीस के हवाले से बताया कि रोजे के दौरान झूठ बोलने, चुगली करने, किसी पर बुरी निगाह डालने व हर बुराई से दूर रहना जरूरी है। रमजान के महीने को तीन हिस्सों (असरों) में बांटा गया है।

पहले दस दिनों में अल्लाह अपने रोजेदार बंदों पर रहमतों की बारिश करता हैं। दूसरे असरे में अल्लाह रोजेदारों के गुनाह माफ करता है और तीसरा असरा दोजख की आग से निजात पाने की इबादत के लिए तय किया गया है। 

जामिया दारूस सलाम पांचली बुजुर्ग के मोहतमिम मौलाना यूसुफ कासमी ने बताया कि रमजान में कुरान की तिलावत, नमाज की अदायगी सहरी की तैयारियां आम होती हैं।
विज्ञापन

इबादत के साथ सेहत का रखें खयाल
रमजान का पाक महीना शुरू हो गया है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही की सलाह है कि माह ए रमजान के दौरान जो मरीज हैं, वे दवा लेने में लापरवाही न बरतें और अपने चिकित्सक की सलाह से ही रोजा रखें। लापरवाही नुकसानदायक हो सकती है।

यह बरतें एहतियात
- कम तली हुई चीजें खाएं, तेलीय चीजों को खाने से प्यास ज्यादा लग सकती है
- सहरी और इफ्तारी में प्रोटीन और फाइबर वाली चीजें ज्यादा लें, मल्टीग्रेन रोटी, छिलके सहित फल, अंडे, पनीर और चिकन आदि खाएं
- फाइबर युक्त भोजन प्यास से बचाता है और लंबे समय तक पेट भरा रहता है
- सहरी के दौरान कैफीन वाली चीजें लेने से बचें। चाय या कॉफी शरीर का पानी सोख लेती हैं और इससे बार-बार प्यास लग सकती है
- इफ्तार की शुरुआत हल्की चीजों से करें, भारी बीजों से करने से पेट में जलन, उल्टी या पेट दर्द हो सकता है
- सहरी के वक्त हरी पत्तेदार सब्जियां और सलाद खूब खाएं
- शाम को रोजा खोलने के बाद धीरे-धीरे हल्का भोजन लें
- रोजे के बाद फल और जूस लेना ज्यादा फायदेमंद रहेगा
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें