फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भूल से खाने-पीने पर नहीं टूटता रोजा, हेल्पलाइन पर रोजेदारों के इन सवालों के दिए जवाब

Thu, 09 May 2019 08:57 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
विज्ञापन
फाइल फोटो
विज्ञापन

सहारनपुर में हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों की शंकाओं का समाधान किया गया। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व इमाम कारी इसहाक गोरा ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भूल से खाने-पीने पर रोजा नहीं टूटता है।

विज्ञापन


गुरुवार को इमाम कारी इसहाक गोरा ने हेल्पलाइन के जरिए बताया कि भूखा-प्यासा रहने के साथ जिस्म के हर हिस्से का रोजा होता है। आंख, जुबान और कानों का भी रोजा होता है। आंखों का रोजा यह है कि बुरी चीजों को नहीं देखना चाहिए। कान का रोजा है कि बुरी बात नहीं सुननी चाहिए। जुबान का रोजा है कि गलत बात नहीं बोलनी चाहिए। रोजेदारों को चाहिए शरीयत के उसूल के साथ रोजा रखे।  

सवाल - मुजफ्फरनगर के पुरकाजी निवासी ऐहतेशाम ने पूछा कि उनको कई बीमारियां हैं। कमजोरी के कारण उन्हें भूलने की आदत है। उन्होंने रोजे की हालत में भूल से दो बार पानी पी लिया। उसके बाद एक बिस्कुट खा लिया। बाद में उनको याद आया वह रोजे से हैं। अब ऐसी सूरत में उनका रोजा रहेगा या नहीं। 
विज्ञापन

जवाब - रोजे की हालत में किसी व्यक्ति ने भूल से पानी पी लिया और कुछ खा लिया तो रोजा खत्म नहीं होगा। क्योंकि, भूल पर कोई मवाखजा नहीं है। शरीयत में आया है कि अगर रोजेदार ने भूल से कई बार खाया-पिया है तो उसका रोजा सलामत रहेगा।

विज्ञापन

सवाल - मेरठ निवासी इब्राहिम ने पूछा कि हम जहां तरावीह पढ़ रहे हैं, वहां हाफिज साहब इतनी जल्दी कुरान पढ़ते हैं कि अक्सर शब्द समझ में नहीं आते हैं। इस तरह पढ़ने पर शरीयत की किताबों में क्या हुकुम है। 
जवाब - अगर कोई व्यक्ति कुरान करीम को जल्दी पढ़ता है और शब्द कटते हों तो ये बड़ा गुनाह है। शरीयत की किताबों में आया है कि इस सूरत में न तो सुनाने और न ही सुनने वाले को सवाब मिलेगा। लिहाजा कुरान पढ़ने वालों को चाहिए कि कुरान-ए-करीम उसके उसूल को समझते हुए पढ़े। सही कुरान पढ़कर सवाब मिलता है। इस तरह कुरान को जल्दी पढ़कर खुद को और सुनने वालों को गुनाह में शुमार नहीं करना चाहिए।

सवाल - मुजफ्फरनगर निवासी सुबहान ने मालूम किया कि उन्होंने रोजे की हालत में लिफाफे पर लगे गोंद को जुबान से तर कर चिपकाया है। ऐसे में उनका रोजा रहा है या नहीं। 
जवाब - शरीयत की पुस्तकों में इस मसले को इस तरह बताया गया है कि लिफाफे पर लगे गोंद को तर करना कराहत से खाली नहीं है। गोंद को पानी या अंगुली पर थूक लगा कर भी तर किया जा सकता है। जुबान से तर करने की जरूरत नहीं है। यदि ऐसा करते हुए रोजे की हालत में गोंद के अंश हलक में चले गए तो रोजा टूट जाएगा।

नोट- इन खबरों के बारे अपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें


https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें