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...जब क्रांतिधरा से अयोध्या गया था 25 कारसेवकों का जत्था, मेरठ में हुई थी जमकर आतिशबाजी

Tue, 04 Aug 2020 12:22 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

  • मेरठ से 25 कारसेवकों का जत्था गया था अयोध्या
  • सदर बाजार चूने वाली धर्मशाला में हुआ था स्वागत 
  • श्रीराम के नारों से गूंज रहा था पूरा क्षेत्र 
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बुढ़ाना गेट पर कारसेवकों में सर्वेश सराफ और अन्य लोग। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्रीराम जन्म भूमि पूजन की चर्चा होते ही 25 कारसेवकों को याद आ जाता है छह दिसंबर 1992 के दिन का सजीव चित्र। 30 नवंबर 1992 में सदर बाजार चूने वाली धर्मशाला से प. नरेश द्वारा तिलक पूजन के बाद करुणेश नंदन के नेतृत्व में 25 कारसेवकों के जत्थे ने अयोध्या के लिए कूच किया था। सीने में भगवान राम की जन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए पूरा सदर क्षेत्र गूंज रहा था। स्वर थे रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। 

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व्यापारी नेता मुकुल सिंघल ने बताया कि मेरठ से लखनऊ होते हुए अयोध्या प्रस्थान किया गया। एक दिसंबर को हम भगवान राम की नगरी अयोध्या पहुंचे। नगर भ्रमण के बाद ज्ञात हुआ कि पूरे देश से कारसेवक, विभिन्न प्रांतों से आए हुए है। विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में साधु संतों व राजनेताओें का उद्बोधन ह्रदय को रामजन्म भूमि की मुक्ति के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने की प्रेरणा देता था। मुकुल सिंघल ने बताया कि छह दिसंबर तय था कार सेवा के लिए। पांच दिसंबर की शाम, रामजन्म भूमि सभा स्थल के मंच से यह घोषणा हुई कि सभी कारसेवक, सरयू से एक मुठ्ठी रेत लाकर डालेंगे और कारसेवा पूर्ण हो जाएगी। छह दिसंबर 1992 को आक्रोशित कार सेवक नारे लगाते हुए बेकाबू होने लगे थे। रैला बेकाबू होकर जन्मस्थली में प्रवेश कर चुका था। कारसेवक गुंबद पर चढ़ प्रहार करने लगे थे। मुकुल सिंघल ने बताया कि लगभग तीन बजे दूसरा गुंबद भी गिरा लिया गया। फिर वो ऐतिहासिक विजय का पल 500 साल से हिंदुओं की गुलामी व मुगलों के अत्यचारों की निशानी का तीसरा व अंतिम गुंबद भी कारसेवकों के शौर्य के आगे नेस्तनाबूत कर दिया गया।

मेरठ में हुई थी आतिशबाजी
नगर में चारों ओर अयोध्या वासी, कारसेवकों का तिलक अभिनंदन व रंगों की होली, आरती के साथ धन्यवाद कर रहे थे। वहीं मेरठ के कारसेवकों ने जमकर आतिशबाजी कर अपनी विजय का उत्सव मनाया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश व मध्य प्रांत के कारसेवकों को आदेश हुआ था कि जन्मभूमि पहुंचे। अब पांच अगस्त 2020 को श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण हेतु, भूमिपूजन का काम होने जा रहा हैं।
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बुढ़ाना गेट से हुई थी कारसेवकों की गिरफ्तारी
सन् 1992 में नारा प्रचलित हो गया था, कि सौगंध राम की खाते हैं मंदिर वहीं बनाएंगे, बच्चा बच्चा राम का जन्म भूमि के काम का। संयुक्त व्यापार संघ मंत्री विजय आनंद अग्रवाल ने बताया कि चार दिसंबर सन 1992 को मेरठ महानगर के विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष केदारनाथ जैन, महानगर संयोजक राजेश्वर प्रसाद, महामंत्री मास्टर चंद्र प्रकाश सिंघल, डॉ. राम प्रकाश गुप्ता के साथ उनके पिता स्वर्गीय विश्वनाथ अग्रवाल, सुरेंद्र पाल रस्तोगी आदि कारसेवकों के जत्थे ने लाला का बाजार, प्रह्लाद वाटिका आदि जगह से अयोध्या कूच की तैयारी की। बुढ़ाना गेट तक आते-आते यह सारे जत्थे एक विशाल जनसैलाब में परिवर्तित हो चुके थे। परिषद के पदाधिकारियों और कार सेवकों को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन भेजा गया। फिर वहां से शामली अस्थाई जेल में भेज दिया गया। संयुक्त व्यापार संघ मंत्री विजय आनंद अग्रवाल ने बताया कि पुलिस की कई बार दबिश उनके निवास पर पड़ी। संगठन से निर्देश पर निष्काम सेवा ट्रस्ट द्वारा संचालित अग्रवाल सेवा सदन भूपतवाला ऋषिकेश भेज दिया गया। परिषद के राष्ट्रीय स्तर के नेतृत्व सहित लालकृष्ण आडवाणी, विनय कटियार, राजेंद्र सिंह पंकज आदि वरिष्ठों का सानिध्य मिला।

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