जिला जेल में रामभक्त भड़क उठे थे। उन्होंने जेल के गेट नंबर दो को तोड़ने की कोशिश की थी। इस पर जेल प्रशासन ने उन पर लाठी चार्ज कर दिया था। पूर्व मंत्री अमर सिंह समेत तमाम रामभक्त घायल हुए थे। उस समय विश्व हिंदू परिषद से जुड़े अधिवक्ता अभयकृष्ण सक्सेना के हाथ में भी डंडा लगा था।
अभयकृष्ण सक्सेना पर 14/15 अक्तूबर को रासुका लगा दी गई थी। उन्हें बिजनौर से लखनऊ सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। हाईकोर्ट लखनऊ बेंच में रासुका पर सुनवाई हुई थी। दो दिसंबर 1990 को अभय कृष्ण सक्सेना जेल से बाहर आए। अभय कृष्ण सक्सेना पर रासुका लगने से बहुत बवाल मचा था। जिले के सभी रामभक्त एकजुट हो गए थे।
प्रदेश स्तर तक इस मामले को लेकर आंदोलन चलाने की बात कही गई थी। इस दौरान जेल में लाला धनीराम, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रहे राधेश्याम कर्णवाल, विपिन पांडेय, सुनील पांडेय, राकेश वर्मा, हीमपुर निवासी यशपाल सिंह, पूर्व मंत्री महावीर सिंह, डॉ. नेमीशरण वर्मा, बालेश्वर प्रसाद, विद्याभूषण विश्नोई, नगर पालिका बिजनौर के पूर्व चेयरमैन जनार्दन अग्रवाल समेत तमाम लोग उस समय जेल गए थे।