पैसे की कमी से जूझ रहे मेरठ विकास प्राधिकरण को किसानों ने रास्ता दिखाया है। कहा है कि रक्षापुरम योजना के किसानों को तो बढ़ा मुआवजा दे दिया। लेकिन आवंटियों से इसका प्रतिकर नहीं वसूला। यह रकम 40 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। ऐसे में एमडीए में इस योजना का हिसाब-किताब नए सिरे से बनाया जा रहा है।
यह है प्रकरण
विभिन्न योजनाओं के साथ ही गांव कसेरूबक्सर और अम्हेड़ा के किसानों की जमीन का अधिग्रहण रक्षापुरम आवासीय योजना के लिए किया गया था। मुआवजे की मांग को लेकर यहां के किसानों ने कोर्ट का सहारा लिया। चार साल पहले यहां के किसान सुप्रीम कोर्ट से इस लड़ाई को जीत गए। किसानों को बढ़ी दर पर मुआवजे का वितरण किया गया। लड़ाई 175 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से अतिरिक्त भुगतान करने की थी। जिसका भुगतान ब्याज के साथ एमडीए ने किसानों को किया।
अब फिर हो रहा आंदोलन
अब फिर से किसान आंदोलन की राह पर हैं। लोहियानगर, गंगानगर तथा वेदव्यासपुरी में समझौता हो चुका है, पर लागू नहीं हो पाया है। यहां बढ़ी दर की रकम के बदले किसानों को भूखंड दिया जाना तय हुआ था। उधर, शताब्दी नगर के किसान भी नई भू अधिग्रहण नीति से मुआवजा मांग रहे हैं। लगभग दो साल से धरना दे रहे हैं। कई बार टंकी पर चढ़कर विरोध जता चुके हैं। दो दिन पूर्व अंतिम चेतावनी भी दे चुके हैं।
पैसा नहीं, किसान बोले यहां से लाओ
इन सभी योजनाओं में एमडीए अधिकारियों का कहना है कि एमडीए के पास पैसा नहीं है। ऐसे में एमडीए कहां से पैसा किसानों को दे। योजनाओं में संपत्ति फंसी है। न भूखंड बिक रहे हैं न ही फ्लैट। ऐेसे में पैसे की भारी किल्लत है। उधर, गंगानगर के किसानों ने एमडीए अधिकारियों से बात कर कहा है कि एमडीए अपना पैसा ही भूला है। जब रक्षापुरम योजना से जुड़े किसानों को बढ़ा मुआवजा दिया गया तो उसका प्रतिकर रक्षापुरम के आवंटियों से क्यों नहीं वसूला गया। जब लोहियानगर, गंगानगर, शताब्दीनगर आदि के आवंटियों से बढ़ा प्रतिकर वसूला गया तो रक्षापुरम पर ही यह करम क्यों? किसानों का दावा है कि यह रकम लगभग चालीस करोड़ रुपये है।
अब बनेगा पूरा हिसाब
वीसी एमडीए योगेंद्र यादव ने इस बाबत सारा लेखा-जोखा तैयार करने को कहा है। कहां किसानों को कितना पैसा मिला और आवंटियों से कितना वसूला, इसका आंकड़ा तैयार कर देखा जाएगा कि वास्तविक स्थिति क्या है। माना जा रहा है कि रक्षापुरम के आवंटियों को जल्द ही इस बाबत नोटिस जारी हो सकते हैं।