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रजनीगंधा से महकेगी फिजा

Wed, 08 Jun 2016 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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कृषि विवि में लगाये गये रजनीगंधा के पौधे - फोटो : अमर उजाला
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गन्ना और धान पर निर्भर रहने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को फूलों की खेती के लिए बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में रजनीगंधा की 15 नयी प्रजातियों पर शोध चल रहा है। यहां की जलवायु के अनुसार वैज्ञानिक इन प्रजातियों को तैयार कर रहे हैं, जिन्हें किसानों को उपलब्ध कराने के साथ ही प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
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वेस्ट यूपी में फूलों की खेती को अधिक प्रभावी बनाने के दिशा में कृषि विश्वविद्यालय का उद्यान विभाग आगे आया है। विभाग के प्रोफेसर डॉ. सुनील मलिक के निर्देशन में विभिन्न राज्यों से मंगाई गई रजनीगंधा की 15 नयी प्रजातियों पर शोध किया जा रहा है। शोध के माध्यम से ऐसी प्रजाति तैयार की जाएगी, जो कम लागत और यहां की जलवायु के अनुसार अधिक पैदावार दे। साथ ही उस पर फूल भी अच्छे आएं और गुणवत्ता में भी सुधार हो सके। जिससे किसान को मंडी में उसका अच्छा दाम मिल सके।

पश्चिम के किसान ले रहे रुचि
शोध के माध्यम से प्रजाति में यह भी देखा जाएगा कि उसमें किसी कीटनाशक का तो प्रयोग नहीं हो रहा है, जिससे फसल को नुकसान हो रहा हो। फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए मेरठ समेत सहारनपुर, बिजनौर, शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, मुरादाबाद आदि के किसान इस बारे में जानकारी ले रहे हैं। शोध के माध्यम से किसानों को खेतों पर भी रजनीगंधा की प्रजातियों के बारे में जानकारी देने के साथ जागरूक किया जाएगा।
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इन पर चल रहा शोध
सिक्किम सलेक्शन, हैदराबाद डबल, मैकिजन सिंगल, स्वर्ण रेखा, वैभव, फूले रजनी, निरंतरा, सुहासनी, प्रज्ज्वला, पर्ल डबल, श्रीनगर, अंर्काखुंगी बंगलूरू, जीकेटीसी-4, हैदराबाद सिंगल, मैककिजन व्हीट डबल आदि पर शोध कार्य चल रहा है। प्रजाति पूने, लुधियाना, बंगलूरू, हैदराबाद आदि शहरों से मंगाई गई हैं।

इन बिंदुओं पर शोध
कौन सी प्रजाति में सबसे अधिक पैदावार है।
सबसे ज्यादा इत्र की मात्रा किस प्रजाति में है।
सबसे ज्यादा फूल किस प्रजाति में आते हैं।
वेस्ट यूपी की जलवायु के अनुरूप कौन सी प्रजाति बेहतर है।
शोध के माध्यम से गुणवत्ता को बढ़ाना।
कौन सी प्रजाति में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है।
सुंदरता और खुशबू के लिए कितनी उपयोगी है।

एक हेक्टेयर में उत्पादन
रजनीगंधा की खेती करते एक हेक्टेयर में दो से चार लाख पुष्प डंडिया प्रतिवर्ष मिलती हैं। सिंगल किस्म में 30 से 50 क्विंटल फूल प्रति हेक्टेयर पुष्प डंडिया बनती हैं। साथ ही 35 से 60 क्विंटल कंद भी प्राप्त होते है। जिनकी बिक्री कर किसान आमदनी ले सकता है। इसके अलावा रजनीगंधा में बीमारी कम लगती है, सूत्रकृमी की शिकायत अधिक मिलती है। जिसके लिए समय पर उपचार किया जा सकता है।


कृषि विवि में बाहर से लायी 15 प्रजातियों पर शोध किसानों के हित में शोध चल रहा है। ऐसी प्रजाति तैयार की जाएंगी, जिन पर किसानों का खर्चा कम और लाभ ज्यादा मिलेगा। - डॉ. सुनील मलिक, उद्यान विभाग

वेस्ट में फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए विवि काम कर रहा है। गन्ना या धान ही नहीं फूलों की खेती से भी किसान लाभ ले सकते है। - डॉ. बिजेंद्र सिंह, उद्यान विभागाध्यक्ष

गन्ना और धान पर अधिक निर्भर रहने वाले वेस्ट के किसानों को अन्य फसलों पर ध्यान देना चाहिए, जिससे अधिक लाभ मिल सकता है। फूलों की मांग देश और प्रदेश में लगातार बढ़ रही है। जिसके चलते किसानों को खेती के प्रति जागरूक होना होगा। - डॉ. गया प्रसाद, कुलपति कृषि विवि
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