उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद एटीएस की टीम ने प्रारंभिक जांच के बाद आतंकी साजिश की आशंका को खारिज कर दिया। फिलहाल रेल कर्मियों की लापरवाही हादसे का कारण बताई जा रही है। हादसे के संबंध में एक रेलकर्मी की अपने साथी के साथ बातचीत की ऑडियो क्लिप और प्रत्यक्षदर्शी इसका खुलासा कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने 22 यात्रियों के मरने की पुष्टि की है। मुजफ्फरनगर में 20 शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके अलावा दो शवों का पोस्टमार्टम मेरठ और गाजियाबाद में हुआ है। सभी मृतकों के डीएनए नमूने जांच के लिए रखे गए हैं। हालांकि अभी तक 17 शवों की पहचान हो पाई है। पांच यात्रियों के शवों की शिनाख्त नहीं हो पाई। 98 घायलों की सूची भी जारी की गई है।
एडीजी रेलवे वीके मौर्या ने बताया कि घटनास्थल का बारीकी से जायजा लिया गया है। ट्रैक बदल रहे कर्मचारियों से भी मामले की जानकारी ली जा रही है। अभी तक जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उनमें ट्रैक की मरम्मत का कार्य चलना और ट्रेन की तीव्र गति को हादसे की वजह माना जा रहा है। हालांकि इसी स्थान पर लगातार पटरी टूटने की घटनाओं को भी एटीएस संज्ञान ले रही है। उधर, रविवार को मेरठ मेडिकल कालेज में एक और घायल राजाराम की मौत हो गई। वहीं गाजियाबाद में भी एक घायल की मौत हो गई। अस्पतालों में मंत्रियों और अधिकारियों का दिन भर जमावड़ा लगा रहा। इसके अलावा घायलों के परिजन भी अपनों को तलाशते हुए यहां पहुंचे। रेलवे अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचे और यहां गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार तथा सामान्य रूप से घायलों को 25-25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी। मेरठ से गुजरने वाली एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनों का संचालन बंद होने के कारण रविवार को रेलवे स्टेशन सूने रहे। यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए रोडवेज ने मोर्चा संभाला।
16 साल के सफर में पहली बार देखा ऐसा मंजर
पेंट्रीकार मैनेजर भूपेंद्र
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कलिंग उत्कल एक्सप्रेस हादसे में पैंट्री कार के मैनेजर भूपेंद्र सिंह भदौरिया भी घायल हुए। भूपेंद्र ने रविवार को खतौली में आंखों देखा हाल सुनाया। भूपेंद्र के अनुसार वे 16 साल से ट्रेन में सफर कर रहे हैं। करीब ढाई साल से उत्कल एक्सप्रेस में ही पैंट्री कार में चल रहे हैं। हादसे के समय पैंट्री में 16 लोग सवार थे। ट्रेन जब खतौली पहुंची तो स्पीड काफी तेज थी। मैं हिसाब लगा रहा था। तभी अचानक ट्रेन की बोगियां तेजी से लहराने लगीं। मैं कुछ समझ पाता, तभी बोगियां पटरी से उतरनी शुरू हो गईं। अचानक जोरदार आवाज के साथ अंधेरा छा गया। बोगी से बाहर निकलना भी मुश्किल हो रहा था। मैं इमरजेंसी गेट के पास ही था, तो किसी तरह बाहर निकल आया। बाहर देखा तो लाशें एक-दूसरे पर पड़ी थीं। खून से लथपथ लोग चिल्ला रहे थे। हमारी बोगी के ऊपर एक बोगी थी, जो एक मकान में घुसी हुई थी। हादसे की वीभत्स तस्वीर ऐसी थी कि कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैं पैर में चोट लगने पर खुद भी घायल हो चुका था। लेकिन हिम्मत कर दोबारा बोगी में घुसा और जैसे-तैसे कर घायलों को बाहर निकाला।
बच्चे बोले, आ जाओ पापा
भूपेंद्र की पत्नी शोभा और बेटी रोशनी व प्राची को ट्रेन हादसे की जानकारी मिली तो उन्होंने भूपेंद्र को फोन कर जल्द घर आने को कहा। भूपेंद्र ने कहा कि वह ठीक है और दो-तीन दिन में आ जाएंगे। भूपेंद्र का परिवार जनपद भिंड लाहा रोड दुर्गानगर कॉलोनी मध्यप्रदेश में रहता है।
दो लोग किस्मत से बचे
हादसे के दौरान पैंट्री कार में मनोज और कर्ण जिस जगह सो रहे थे, वहां बोगी की हालत बिगड़ी हुई थी। बोगी का हाल देखकर नहीं लगा कि दोनों बचे होंगे। लेकिन उनकी किस्मत अच्छी थी और घायल होने के बावजूद वह बच गए। दोनों ने जब हादसे को देखा तो उनकी भी रूह कांप उठी।
आंखों के सामने पत्नी को दम तोड़ते देखा
क्रेन से हटाया गया मलबा
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मेरठ। ‘मैं और पत्नी रामवती उत्कल ट्रेन की क्षतिग्रस्त बोगी में फंसे थे। रामवती तड़प रही थी। लेकिन अफसोस मैं उसकी मदद नहीं कर सका। मैंने अपने साथी से चिल्लाकर कहा कि उसे बचा लो, वो मर रही है। लेकिन कोशिश सफल नहीं हुई और मेरी आंखों के सामने रामवती ने दम तोड़ दिया। एक पल में 30 साल का साथ छूट गया।’ यह कहते हुए रामजी लाल की आंखें भर आईं और गला रुंध गया। करौली, राजस्थान निवासी रामजी लाल (60) जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराए गए थे। पत्नी रामवती (50) के साथ हरिद्वार दर्शन करने जा रहे थे। एक ही बोगी में सवार थे। इनके चार बच्चे हैं। वह क्षतिग्रस्त बोगी में खुद ऐसे फंसे थे कि निकल नहीं पा रहे थे। जब उन्हें लगा कि वह पत्नी को नहीं बचा सकते तो उन्होंने अपने परिवार के ही सदस्य परमाल (50) को आवाज लगाकर कहा कि किसी तरह रामवती को बचा ले। लेकिन बोगी इस कदर क्षतिग्रस्त थी कि वह भी कुछ नहीं कर सका। रामजीलाल को लोगों ने बोगी को काटकर निकाला। उनकी पत्नी को भी लोगों ने निकालने की कोशिश की। लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
रेलवे से मिली आर्थिक मदद
रामजीलाल और परमाल को रविवार को जिला अस्पताल से छुट्टी दे गई। दोपहर में दिल्ली रेलवे से कॉमर्शियल इंस्पेक्टर (सीएमआई) डीसी शर्मा अस्पताल पहुंचे। दोनों घायलों को 25-25 हजार रुपये की नगद आर्थिक सहायता दी गई।
जांच कमेटी गठित, 22, 23 अगस्त को करा दर्ज करा सकते हैं बयान
पुरी-हरिद्वार कलिंग उत्कल एक्सप्रेस की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। कमेटी 22 व 23 अगस्त को सुनवाई करेगी। इसमें आम जनता को भी दुर्घटना से संबंधित साक्ष्यों के साथ अपना पक्ष रखने के लिए आमंत्रित किया गया है। वहीं आज कमिश्नर आफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) एसके पाठक मौके पर पहुंचकर जर्जर हो चुके ट्रैक व घटना की जांच करेंगे। यह जांच कमेटी डीआरएम आफिस में मामले की सुनवाई करेगी। कमेटी के वहीं सोमवार को कमिश्नर आफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) एसके पाठक घटना स्थल पर पहुंचकर मामले की जांच करेंगे और जर्जर हो चुके ट्रैक को भी परखेंगे।
सड़क दुर्घटना के दो मृतकों को ट्रेन हादसे के मृतकों में में गिन लिया
मेरठ मेडिकल कॉलेज पहुंचे विधायक रफीक अंसारी
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रेल हादसे में मृतकों की गिनती में भी प्रशासन ने चूक कर दी। सड़क हादसे में मारे गए दो लोगों के शवों को ट्रेन हादसे के मृतकों में गिन लिया गया। इसी रिपोर्ट के आधार पर डीजीपी कार्यालय से मृतकों का आंकड़ा 23 बतया गया। अस्पताल के अधिकारियों की लापरवाही से यह स्थिति पैदा हुई। मोर्चरी में रखे सभी शवों को रेल हादसे के मृतकों की संख्या में शामिल कर दिया। मेरठ में एक मौत होने की खबर के बाद 23 के मरने की सूचना लखनऊ से भी जारी कर दी गई। रात में अस्पताल के अधिकारियों को यह मालूम हुआ कि मोर्चरी में रखे शवों में दो शव सड़क हादसे में मृत नावला के सोहनलाल और हापुड़ के राजेंद्र के हैं। दरअसल हुआ यह था कि अज्ञात में आए इन दोनों के शवों को अधिकारियों ने रात में मोर्चरी से अस्पताल में वहां पहुंचा दिया जहां ट्रेन हादसे में मृतकों के शव रखे हुए थे। मामला तब खुला जब सुबह जट मुझेड़ा के ग्रामीणों ने ट्रेन हादसे में मरे प्रमोद का शव हादसे के मृतकों के शवों के साथ नहीं है। ग्रामीणों ने इसे लेकर हंगामा कर दिया। वहीं ट्रेन हादसे में मृत सहारनपुर के सुमित गर्ग की पहचान के बाद भी उसका शव अज्ञात में डाल देने से परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। जांच के बाद ट्रेन के हादसे में मृत दो इन दोनों के शवों के अज्ञात के शवों से अलग किया गया।
वेंटीलेटर पर तुलसीराम की मां चतुरीबाई
मेरठ। चतुरी बाई (65) मेडिकल अस्पताल के आईसीयू वार्ड में वेंटीलेटर पर हैं और मौत से लड़ रही हैं। आईसीयू के बाहर बैठा उनका बेटा तुलसीराम उनकी जिंदगी के लिए दुआ कर रहा है। तुलसीराम ने बताया कि उनका परिवार घासमंडी ग्वालियर निवासी है। उनकी मां चतुरीबाई करीब 30 साल से हर साल हरिद्वार दर्शन करने जाती हैं। इस बार साथ में मां की दो बहनें संतो बाई और सरजो बाई भी थीं। वे दोनों कहां हैं, उनका पता नहीं है। मां की तबियत में सुधार हो तो वे उनके बारे में भी जानकारी करें। तुलसीराम ने बताया कि मां के पास उनका आधार कार्ड था, जिस पर उनके घर का पता था। इसी के जरिये उन्हें सूचना दी गई कि उनकी मां मेडिकल अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती हैं, तब वे वहां से आए। मेडिकल अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी ने बताया कि उनकी हालत चिंताजनक है। उन्हें बचाने की हरसंभव कोशिश की जा रही है।
‘सरकार पीड़ितों के साथ, हरसंभव मदद होगी’
अस्पताल पहुंचे सुरेश राणा और सतीश महाना
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मेरठ/मोदीपुरम। खतौली में कलिंग उत्कल एक्सप्रेस हादसे के घायलों का हाल जानने मोदीपुरम के एसडीएम ग्लोबल अस्पताल पहुंचे कैबिनेट मंत्री सतीश महाना और स्वतंत्र प्रभार मंत्री सुरेश राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री इस हादसे को लेकर गंभीर हैं। सरकार पीड़ितों के साथ है और हरसंभव मदद होगी। वहीं, खाद्य एवं रसद मंत्री अतुल गर्ग के साथ मेडिकल अस्पताल पहुंचे सांसद राजेंद्र अग्रवाल बोले कि ये बड़ी लापरवाही का मामला है। रेलमंत्री इस पर संज्ञान ले रहे हैं। जवाबदेही बनती है। 120 की स्पीड से ट्रेन जा रही थी। ये सिस्टम की विफलता है। बड़ी कार्रवाई होगी। घायलों का हाल जानने के बाद दोनों मंत्रियों ने पत्रकारों से कहा कि घायलों का हरसंभव उपचार कराया जा रहा है। हर स्तर से उनकी मदद होगी। अस्पताल प्रबंधन से भी घायलों की मदद के लिए कहा गया है। इस दौरान ग्लोबल अस्पताल के प्रबंध निदेशक केके गुप्ता ने कैबिनेट मंत्री सतीश महाना को बताया कि घायलों का नि:शुल्क उपचार किया जा रहा है। इस दौरान डॉ. जेवी चिकारा, डॉ. सरोजनी अग्रवाल, भाजपा जिला उपाध्यक्ष अजित चौधरी, भाजपा नेता सुनील भराला, माटू चौधरी, मनोज गोयल, आलोक सिसौदिया, आदि मौजूद रहे। देर शाम भाजपा जेजे प्रकोष्ठ के सह संयोजक सुनील भराला ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना। कहा कि इस हादसे के दोषी बख्शे नहीं जाएंगे। मेडिकल अस्पताल पहुंचे मंत्री अतुल गर्ग ने कहा कि यह बेहद दुखद घटना है। खतौली के लोगों ने जिस तरह से हादसे के बाद मदद की है, वह काबिल-ए-तारीफ है। उन लोगों का दिल से धन्यवाद। सरकार की तरफ से मृतक आश्रितों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। इसके अलावा प्रशासन अपने स्तर से भी इन लोगों की मदद कर रहा है। इनके अलावा शहर विधायक रफीक अंसारी, सपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह, विजयपाल कश्यप और पूर्व पार्षद आशु आदि ने भी घायलों का हाल जाना।
रेलवे ने दी आर्थिक सहायता
हादसे के बाद सूना पड़ा मेरठ स्टेशन
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मेरठ। रेलवे की तरफ से रविवार को जिला अस्पताल में दो घायलों को 25-25 हजार देने के अलावा मेडिकल में 11 घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता की गई। एसआईसी ने बताया कि मेडिकल में रेलवे दिल्ली से कॉमर्शियल इंस्पेक्टर गौरव पाठक आर्थिक सहायता देने आए थे। ग्लोबल अस्पताल में कॉमर्शियल इंस्पेक्टर पंकज शर्मा और आनंद अस्पताल में मयंक आर्थिक सहायता देने पहुंचे।
सोमेंद्र तोमर ने दी आर्थिक मदद और जाना हाल
मेरठ। दक्षिण विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर और किठौर विधायक सत्यवीर त्यागी ने शुक्रवार रात घायलों के खाने पीने के खर्च के लिए मेडिकल अस्पताल के सीएमएस डॉ. अजित चौधरी को पांच-पांच हजार रुपये की नगद धनराशि प्रदान की। शनिवार को भी विधायक सोमेंद्र तोमर ने मेडिकल अस्पताल जाकर घायलों से बात की और उन्हें बेहतर इलाज के लिए आश्वस्त किया।
344 लोगों ने कराए टिकट निरस्त
मेरठ। रविवार को पैसेंजर समेत मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों के बाधित होने से मेरठ सेक्शन से गुजरने वाली ट्रेनों के करीब 344 लोगों अपना रिजर्वेशन कैंसिल कराया। लोग सुबह से ही ट्रेनों की स्थिति की जानकारी करने सिटी व कैंट स्टेशन पर पहुंचते रहे। सिटी स्टेशन के पीआरएस के अनुसार अमृतसर-इंदौर एक्सप्रेस में 66, दिल्ली-अंबाला एक्सप्रेस में 6, देहरा-बांद्रा एक्सप्रेस में 14, शालीमार एक्सप्रेस में 174, उत्कल एक्सप्रेस में 1, जालंधर एक्सप्रेस में 43, योगा एक्सप्रेस में 40 यात्रियों ने रिजर्वेशन कराया था। ट्रेन बाधित होने से रिजर्वेशन कैंसिल कराए गए।
रेलवे हादसे में दोषी बख्शे नहीं जाएंगे : बालियान
अधिकारियों से जानकारी लेते संजीव बालियान
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मोदीपुरम। मेरठ सहारनपुर रेल हादसे में गई यात्रियों की जान के बाद अभी भी ट्रेक को चालू नहीं किया गया है। वहां पर बचाव कार्य चल रहा है। केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान ने रविवार को ट्रेक पर पहुंचकर बचाव कार्य की जानकारी ली। मंत्री बोले कि मुजफ्फरनगर में 20 शव थे, जिनमें से 15 की शिनाख्त हो गई, उन शव को उनके घरों पर भेज दिया गया है। केंद्रीय राज्यमंत्री डा संजीव बालियान रविवार की शाम करीब तीन बजे खतौली रेलवे ट्रेक पर हुए हादसे के बीच पहुंचे। बालियान ने पत्रकारों से कहा कि हादसे होने के बाद वह पहुंच गए थे, रात में तीन बजे तक घटनास्थल पर रहे और घायलों को निकलवाकर मेरठ और मुजफ्फरनगर भेजा। घायलों को निकालने का काम बहुत ही तेजी से किया गया। 40 मिनट में भी अधिकतर घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया गया था। खतौली की जनता ने जो काम किया, वह कोई नहीं कर सकता। पूरे देश में इसका नाम होगा, पुलिस और रेलवे से पहले ही जनता बचाव कार्य में जुट गई। जिसका नतीजा यह रहा है कि जल्द से जल्द घायलों को अस्पताल भेज दिया गया। रात में 20 शव मुजफ्फरनगर भेजे गए थे, जिनमें से 15 की शिनाख्त हो गई, उन्हे दोपहर तक भेज दिया गया है। अन्य शवों की भी शिनाख्त कराई जा रही है। हादसे के सवाल पर मंत्री ने कहा कि यह हादसा बहुत ही बड़ा हादसा है, रेल मंत्री ने जांच के आदेश दिए है, जांच में जो भी दोषी होगा, वह बख्श््रा नहीं जाएगा। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस हादसे की जानकारी ले रहे है। जिन कारणों से हादसा हुआ है, उस पर सरकार सख्त कार्यवाही करेगी। यह रेल हादसा बहुत ही वीभत्स है और आबादी के बीच में होने से और भी बड़ा हो गया है। इस दौरान शहर विधायक कपिल देव अग्रवाल, बुढाना विधायक उमेश मलिक, जिलाध्यक्ष रुपेंद्र सैनी समेत अन्य भाजपाई मौजूद रहे।
मौके पर पहुंचे मंत्री ने रेलवे अधिकारियों से ली जानकारी
मोदीपुरम। केंद्रीय राज्यमंत्री डा संजीव बालियान ने खतौली हादसे में दुख व्यक्त करते हुए रेलवे अधिकारियों से राहत कार्य के बारे में जानकारी ली। मंत्री ने निर्देश दिए कि ट्रेक को जल्द से जल्द सुचारु किया जाए, यह एक बड़ा रेलवे ट्रेक है, इस हादसे के होने पर ट्रेने भी प्रभावित हो रही है। रेलवे की टीम जल्द से जल्द क्षतिग्रसत बोगियों को ट्रेक से हटाकर ट्रक को पूर्णरुप से संचालित करे।
घायलों को सरकारी स्तर पर दी जायेगी हर मदद : सतीश महाना
लोगों की मदद करते स्थानीय युवक
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मेरठ। खतौली में रेल हादसे के बाद घायलों को हाल जानने शहर में आज भाजपा के तीन मंत्रियों का दौरा रहा। तीनों मंत्रियों सतीश महाना, सुरेश राणा और अतुल गर्ग ने मेडिकल, आनंद हॉस्पिटल और एसडीएस ग्लोबल का दौरा किया। इस दौरान मंत्रियों ने घायलों के उपचार में कोई कमी न आने की बात मेडिकल प्राचार्य और एसडीएस ग्लोबल अस्पताल और आनंद अस्पताल प्रबंधन से कही। मेडिकल इमरजेंसी में पहुंचे केबिनेट मंत्री सतीश महाना, गन्ना राज्य मंत्री सुरेश राणा करीब 11 बजे मेडिकल की इमरजेंसी में पहुंचे। जहां उन्होंने मेडिकल की इमरजेंसी में भर्ती 14 मरीजों का हाल जाना। इमरजेंसी में चार मरीजों के कपड़े न बदलने और खून से लथपथ घायलों को प्राथमिक उपचार में देरी होने पर वह भड़क गए। मंत्री सुरेश राणा ने चारों मरीजों के अविलंब कपड़े बदलने और उन्हें उपचार देने के आदेश दिए। मौके पर पहुंचे सीएमएस अजीत चौधरी से उन्होंने मेडिकल की योजना और उपचार हेतु़ उठाए गए कदम के बारे में विस्तार से जाना। साथ ही चेतावनी दी कि यदि किसी भी घायल को चिकित्सीय सुविधा में जरा भी लापरवाही बरती तो परिणाम अच्छे नहीं होंगे। घायलों के उपचार में जरा सभी भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। घायलों के उपचार में किसी भी प्रकार का व्यवधान बजट अथवा सरकारी मशीनरी की वजह से नहीं आना चाहिए। 24 घंटे चिकित्सकों की टीम इमरजेंसी और वार्डों में मौजूद रहनी चाहिए। साथ ही प्रत्येक दो घंटे में घायलों की लिस्ट सहित उनके उपचार का ब्यौरा लखनऊ कार्यालय में भेजा जाना चाहिए। क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अरुण वशिष्ठ, पूर्व एमएलसी डा. सरोजनी अग्रवाल, आलोक सिसौदिया, अजीत चौधरी, अजय भराला, राजेश सिंह, आदि मौजूद रहे। वहीं दूसरी तरफ शाम को प्रदेश के खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री अतुल गर्ग ने भी अस्पतालों में जाकर घायलों का हाल जाना और उपचार की व्यवस्था देखी।
घायलों का उपचार सरकारी की प्राथमिकता
केबिनेट मंत्री सतीश महाना ने कहा कि रेल हादसे में घायलों का उपचार प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। मेडिकल अस्पताल में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि घायलों के इलाज में किसी तरह की कोई कमी नहीं आने दी जायेगी। इसके लिए सरकारी और प्राइवेट दोनों अस्पतालों को सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं। रेल हादसे पर उन्होंने कहा कि इसकी उच्च स्तरीय जांच गठित हो चुकी है। जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों पर निश्चित ही कार्रवाई तय होगी।
प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे मेडिकल
जिलाधिकारी समीर वर्मा ने सभी अस्पतालों के चिकित्सकों को निर्देश दिये है कि मुजफफरनगर रेल हादसे के घायलों के उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरते और उन्हें बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलबध करायें। जिलाधिकारी ने सर्वप्रथम मैडिकल कालेज, आनन्द अस्पताल, प्यारे लाल अस्पताल एवं एसडीएस ग्लोबल हास्पिटल में पहुंचकर घायल मरीजों का हाल जाना। इसअवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजिल सैनी, एडीएम सिटी मुकेश चन्द्र, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. राज कुमार, नगर मजिस्ट्रेट एनपीएस एवं एसीएम ज्ञान प्रकाश सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
यार्ड में लाकर खड़े किए उत्कल के क्षतिग्रस्त पांच डिब्बे
हादसे के बाद सूना पड़ा स्टेशन
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मेरठ। खतौली में डिरेल हुए कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के पांच कोच सिटी स्टेशन के यार्ड स्थित रेल कोच केयर सेंटर में लाकर खड़े किए गए है। अधिकारियों का कहना है कि ये कोच रिपेयर होने की स्थिति में हैं। जो कोच रिपेयर नहीं हो सकते उन्हें नहीं लाया गया है। लाए गए कोच भी हादसे की भयावह तस्वीर बयां कर रहे हैं। कोच के शीशे चकनाचूर हो चुके और सीटें भी क्षतिग्रस्त हुई है। शनिवार को दुर्घटना ग्रस्त हुई उत्कल एक्सप्रेस के डिब्बे ट्रैक से उठाने का काम रविवार को भी देर रात तक चला। घटना में कम क्षतिग्रस्त हुए एसी थ्री कोच संख्या बी-2, बी-3 और बी-4 के अलावा एक जनरल कोच व एसएलआर को सिटी स्टेशन के रेल कोच केयर सेंटर पर भेजा गया है। इन कोचों की प्राथमिक मरम्मत करके रेल कोच फैक्ट्री भेजा जाएगा, जहां इनकी रिपेयर कर पहले जैसा कर दिया जाएगा। जो कोच ज्यादा क्षति ग्रस्त हुए है उन्हें फिलहाल सेक्शन पर ही किनारे डाल दिया गया है। इन क्षति ग्रस्त कोचों को बाद में उठाया जाएगा या साइट से ही नीलाम कर दिया जाएगा।
मेरे घर में घुसी बोगी, बाल-बाल बचे
मोदीपुरम। जिस समय खतौली में उत्कल एक्सप्रेस हादसा हुआ, जगत सिंह अहलावत परिवार के साथ घर से बाहर बैठे थे। पलक झपकते ही ट्रेन की बोगियां पलटीं तो एक बोगी उनके घर में आ घुसी। जगत सिंह तो घायल हो गए जबकि उनकी पत्नी, बेटा और पुत्रवधू ने भागकर जान बचाई। हादसे के बाद कोई अधिकारी या नेता हाल जानने तक नहीं आया। जगत सिंह के अनुसार उन्हें दूर से ही दिखाई दे गया था कि ट्रेन की बोगियां असामान्य रूप से लहरा रही हैं और कभी भी पलट सकती हैं। इसलिए वह चिल्लाकर भागे कि ‘बच्चों भागो ट्रेन पलट रही है। लेकिन ट्रेन की स्पीड इतनी तेज थी कि उन्हें भागने का मौका नहीं मिला और एक कोच उनके घर में घुस गया। मकान क्षतिग्रस्त होने से चीख पुकार मच गई। गनीमत रही कि सभी की जान बच गई। रविवार दोपहर वह मुजफ्फरनगर अस्पताल से घर लौटे तो आसपास के लोगों का तांता लग गया। उन्होंने नाराजगी जताते कहा कि मदद के लिए स्थानीय लोग ही आगे आए। लेकिन कोई भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि उनकी सुध लेने तक नहीं आया। यह हादसा तो रेलवे की लापरवाही से हुआ है, इसका जिम्मेदार कौन है।
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