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तीर्थनगरी जा रहे थे, अब लाश लेकर लौटेंगे घर, पढ़े ट्रेन हादसे की UPDATE खबरें

Mon, 21 Aug 2017 10:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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तीर्थनगरी जा रहे थे
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राजस्थान के कई परिवार एक साथ हरिद्वार सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान करने के लिए जा रहे थे। अनहोनी ऐसी हुई कि अब उनको अपने साथ दो शवों को लेकर जाना पड़ेगा। झारखंड महादेव देवालय में शरण लिए हुए ये परिवार प्रशासन द्वारा शव भेजे जाने की इंतजार में बैठे रहे।                        
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राजस्थान के जिला करौली की तहसील सपोटरा के गांव शाहनापुरी निवासी जगराम, हजारी, फपले, घनश्याम, रामप्रसाद, प्रहलाद, महिपाल, प्रभु व अंगद आदि परिवार के लोगों ने बताया कि वे पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के एस-1 कोच में शनिवार को हंसी खुशी परिवार के साथ सोमवार को हरिद्वार में गंगा स्नान करने के लिए जा रहे थे। खतौली में ऐसा हादसा हुआ कि उसका मंजर कभी सपने में भी सोचा नहीं होगा। इस वीभत्स हादसे में घायल महिला रामपति व रामजीलाल की जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। इन परिवारों के लोगों ने बताया कि उनको भी कोच से बाहर निकाला था। नगर के  मोहल्ला शिवपुरी के श्री झारखंड महादेव देवालय में पहुंचा। मंदिर में समिति के सदस्य उसी समय से उनकी देखरेख और इलाज कराने में लगे हैं। साथी महिला समेत दो लोगों की मौत से परिवार के सदस्यों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। मंदिर में मौजूद मददगार लोगों ने उनको ढांढस बंधाया। इन लोगों ने बताया कि उनको जाना था तीर्थनगरी, लेकिन अब अपने साथ शवों को साथ ले जाना पड़ेगा। इन लोगों को अपने के बिछड़ने को बेहद दुख है। उनका कहना था कि अब वे सिर्फ इस इंतजार में हैं कि सरकार उनके शवों के साथ कब राजस्थान भिजवाने की व्यवस्था कराएगी।

पड़ोसियों ने पेश की ईमानदारी की मिसाल

रेल हादसा
उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद तिलकनगर कॉलोनी के लोगों ने कोच में फंसे यात्रियों को सबसे पहले बाहर निकालना शुरू किया। कॉलोनी के लोगों ने उनका बैग अपने घरों में सुरक्षित रख लिया था। शनिवार शाम को कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ बढ़नी शुरू हो गई थी। भीड़ के कारण राहत कार्य में बाधा हो रही थी। ऐसे में कॉलोनी के लोग कोच के चारों ओर खडे़ हो गए तथा किसी को भी कोच के अंदर नहीं जाने दिया। कुछ लोगों ने कोच में फंसे यात्रियों का सामान उठाकर सुरक्षित कर जगत सिंह अहलावत, राजीव अहलावत के मकान में रख दिया था। रविवार सुबह दोनों लोगों ने जीआरपी थानाध्यक्ष किशन अवतार को इसकी सूचना दी। जिस पर थानाध्यक्ष उनके घरों पर पहुंचे तथा सभी सामान की वीडियोग्राफी की गई। बैग तथा सामान की जांच करने पर जगत सिंह अलावत के यहां पर रखे एक बैग में राम खिलाड़ी गुर्जर निवासी परदौनपुर थाना एकट तहसील सपोहरा जिला करौली राजस्थान का आधार कार्ड मिला और कुछ फोटो मिले। इसी बैग में 1,2500 रुपये की नगदी भी मिली। दूसरे बैग की जांच करने पर गुड्डी निवासी परदौनपुर जिला करौली राजस्थान का आधार कार्ड मिला। इस बैग में जीआरपी को छह हजार रुपये की नगदी मिली। वीडियोग्राफी कराए जाने के बाद थानाध्यक्ष ने तमाम सामान को अपने कब्जे में लिया। इसको देखकर लोग दोनों परिवारों और सामान निकाल कर सुरक्षित करने वालों की ईमानदारी की मुक्तकंठ से सराहना कर रहे हैं।

पकड़नी थी उत्कल, मिली शालीमार

रेल हादसा
मुजफ्फरनगर से दिल्ली गाजियाबाद और नोएडा जाने वाले सैकड़ों युवक नौकरी के अलावा विभिन्न कोचिंग सेंटरों में पढ़ाई करने के लिए जाते हैं। चरथावल के छात्रों की शनिवार में उत्कल निकल गई, तो दिल्ली स्टेशन से शालीमार पकड़कर घर के लिए चले, लेकिन मेरठ आकर जब उन्हें उत्कल ट्रेन के खतौली में दुर्घटनाग्रस्त होने का पता चला तो वह कांप गए। कस्बे के इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले छात्र सार्थक, अंकित और अर्पण शनिवार सुबह नोएडा और गुरुग्राम कोचिंग के सिलसिले में गए थे। सार्थक और खतौली निवासी शिवम को कोचिंग के बाद इंटरसिटी ट्रेन मिल गई थी। हादसे से पहले शिवम खतौली उतर गया था। उनके दो साथी अंकित और अर्पण की काम में देरी के कारण निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से उत्कल एक्सप्रेस पकड़नी थी। लेकिन वह भी निकल गई, तो दोनों ने पुरानी दिल्ली स्टेशन जाकर मुजफ्फरनगर के लिए शालीमार एक्सप्रेस पकड़ी थी। मेरठ आकर उन्हें हादसे की सूचना मिली तो वह सिहर उठे। उनके परिजनों और दोस्तों ने उनके पास फोन पर संपर्क साधा। दोनों के शालीमार से मेरठ उतरकर रोडवेज बस द्वारा आने की जानकारी मिली, तो परिजनों और दोस्तों ने राहत की सांस ली। दरअसल कस्बे का अंकित दो दिन पूर्व भी गुरुग्राम से इंटरव्यू देकर उत्कल एक्सप्रेस से ही मुजफ्फरनगर आया था।       

रेल हादसे पर जताया शोक      
खतौली रेल हादसे में मारे गए यात्रियों की आत्मा की शांति के लिए कस्बे के लोगों ने शोक संवेदना प्रकट की। पूर्व चेयरमैन सुधीर सिंघल, भाजपा नेता कुबेर दत्त त्यागी, अर्पित भारद्वाज, सपा नेता कुशलपाल त्यागी, नगराध्यक्ष सलीम त्यागी, कांग्रेस नेता नवीन गर्ग, जिपंस राकेश वशिष्ठ एडवोकेट ने रेल हादसे पर दु:ख जताते हुए मृतकों की आत्मा की शांति के लिए शोक संवेदना प्रकट की।

मंत्री बालियान ने शव राजस्थान भिजवाए

केंद्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान
केंद्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान रविवार शाम श्री झारखंड महादेव मंदिर पहुंचे। मंत्री ने राजस्थानी लोगों की पीड़ा सुनी। इसके बाद मंत्री ने पोस्टमार्टम के बाद एंबुलेंस से दोनों शवों को राजस्थान के लिए भेजा और दो बसों का प्रबंध कर महिलाओं और बच्चों समेत परिवार के सभी लोगों को राजस्थान के लिए रवाना किया। उधर, खतौली विधायक विक्रम सैनी ने जगत कॉलोनी में लोगों से घटना की जानकारी ली। रालोद जिलाध्यक्ष अजित राठी और पूर्व मंत्री योगराज सिंह ने खतौली पहुंचकर घटनास्थल के आसपास के लोगों से जानकारी ली। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत एवं जिलाध्यक्ष राजू अहलावत ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ितों से बात की।

पेंट्री कार बोगी खाली होने पर मिली राहत  
क्षतिग्रस्त हो चुके रसोईयान में लोगों को 24 घंटे तक यही भ्रम बना रहा कि इसमें कई लाशें मिल सकती हैं। रेलवे कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद पावर वैगन से 24 घंटे बाद रसोईयान को उठाकर सीधा किया तो, उसमें एक भी शव नहीं मिल सका। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक रसोईयान की जांच पड़ताल करने पर उसमें मात्र दो रसोई गैस के सिलेंडर ही मिले। गनीमत यह रही कि हादसे के दौरान गैस सिलेंडर नहीं फटे।

शनिवार शाम 5.47 मिनट के करीब हुए उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे में एक ही झटके में तीन-चार कोच रसोईयान पर चढ़ गए थे। जिससे रसोईयान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। हादसे के बाद से ही मौके पर सैकड़ों की संख्या में यात्रियों के बचाव कार्य में लगे लोगों में भ्रम पैदा हो गया था कि रसोईयान में मौजूद लोगों की जान नहीं बची होगी। यहां तक कि लोग रसोईयान तक में घुसने तक का रास्ता नहीं बना सके थे। इसलिए लोगों का भ्रम विश्वास में बदलने लगा था। रविवार को भी लोगों की भीड़ जस की तस मौके पर एकत्र थी। लगातार 24 घंटे तक लोग रसाईयान पर ही ध्यान लगाए हुए थे कि इसमें कितने शव मिलेंगे। रेलवे कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद 24 घंटे बाद क्रेन से पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके रसोईयान को उठाया तो उसमें एक भी शव नहीं मिल सका। शव न मिलने से अधिकारियों ने भी राहत की सांस ली।

उड़ीसा के विधायक पहुंचे खतौली

ट्रैक से बोगियां हटाते कर्मचारी
उड़ीसा के जिला पुरी से कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन में वहां के काफी संख्या में लोग सोमती अमावस्या पर हरिद्वार गंगा में स्नान करने के लिए कोच में बैठे थे। शनिवार को ट्रेन हादसे की जानकारी मिली तो उड़ीसा की विधानसभा सीट कोचिंडा संभलपुर से लगातार तीन बार चुनाव जीतने वाले भाजपा विधायक रविनारायण नायक अपनों की सुध लेने के लिए नगर में पहुंचे। विधायक श्री झारखंड मंदिर में पहुंचे, उनको हादसे वाली ट्रेन में एससी कोच में काम करने वाले प्राइवेट कर्मचारी उड़ीसा निवासी सुखनदास, जितेंद्र मिले। विधायक ने इन दोनों कर्मचारियों से कुशलक्षेम पूछा और ट्रेन में सफर करने वाले उड़ीसा के अन्य लोगों के बारे में जानकारी ली। इन कर्मचारियों ने बताया कि उड़ीसा के रहने वाले घायलों को लोगों ने ट्रेन के कोचों से बाहर निकालकर अस्पताल में पहुंचाया था। इसके बाद उनका किस अस्पताल में इलाज चल रहा है, इसकी उनको जानकारी नहीं है। विधायक ने बताया कि उनको केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उड़ीसा के मुसाफिरों को तलाश कर उनको वापस उड़ीसा लाने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसलिए वे उड़ीसा से चलकर खतौली पहुंचे हैं। विधायक के साथ गणेश महालिग, भूपेंद्र प्रधान, विवेक त्रिवेदी, पद्माचरण गुरु मौजूद रहे। 

हादसे की बात सुनकर सहम जाते हैं बच्चे 
राजस्थान परिवार के साथ तीन बालक ट्रेन हादसे का मंजर अभी तक नहीं भूले हैं, हादसे से तीनों बच्चे डरे और सहमे हुए हैं। श्री झारखंड महादेव देवालय में ठहरे राजस्थान के रहने वाले पांच साल के बालक बलराम पुत्र बन्नू, छह साल के सौरभ पुत्र हेमराज, सात साल की बालिका मीन पुत्री रुकवीर ने पूछताछ करने पर इन बच्चों ने बताया कि अचानक ट्रेन में जोर का झटका लगा तो वे अपनी मम्मी की गोद में बैठकर आंख बंद करके उनसे लिपट गए थे। इन बच्चों ने डरे व सहमे हुए बताया कि अब वे कभी ट्रेन में नहीं बैठेंगे। राजस्थान के परिवारों का कहना था हादसे के वक्त उनको अपने से ज्यादा फिक्र महिलाओं और बच्चों का लग रहा था। महिलाएं और बच्चे करीब 15 मिनट तक गुमशुम बैठे रहे। आवाज लगाकर हिलाने ढुलाने पर काफी देर बाद धीमी आवाज में महिलाएं बोली हम और बच्चे सभी ठीक हैं। महिलाओं की इतनी बात सुनकर परिवार के सदस्यों की जान में जान आ सकी।

आतंकी साजिश की संभावना खारिज

घटना स्थल पर पहुंचे अधिकारी
उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद आतंकी साजिश की संभावना लगभग खारिज हो चुकी है। लखनऊ से खतौली पहुंची एटीएस की टीम ने बारीकी से पटरियों की जांच-पड़ताल के बाद आला अधिकारियों को फीडबैक दिया है कि हादसा निर्माण और स्पीड के कारणों की वजह से संभव है। एटीएस ने आसपास के प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ की है।   
खतौली में दुर्घटनाग्रस्त हुई उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन को लेकर केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक नजर बनाए हुए हैं। रेलवे महकमे के साथ पुलिस, एटीएस और खुफिया तंत्र ने भी इसी पड़ताल शुरू कर दी है। भयावह हादसे के बाद एटीएस शनिवार देर रात ही लखनऊ से खतौली पहुंच गई। एटीएस टीम के सदस्यों ने हादसे की फुटेज बनाने के साथ इसका बारीकी से निरीक्षण किया। एटीएस भी खतौली में ट्रैक क्रैक होने की सभी घटनाओं को नोटिस कर रही है। सूत्रों के अनुसार एटीएस शनिवार और पूर्व में क्रेक हुए ट्रैक के बारे में जानकारी जुटा रही है। 

रविवार को एटीएस के सदस्यों ने रेलवे कर्मचारियों के साथ आसपास के लोगों से घटनाक्रम की पूरी जानकारी ली है। घटना को लेकर आला अफसर लखनऊ से ही फीडबैक ले रहे हैं। रेलवे अधिकारी प्रारंभिक जांच में हादसा ट्रैक की मरम्मत और ट्रेन की स्पीड अधिक होना मान रहे हैं। एडीजी रेलवे वीके मौर्या ने बताया कि घटनास्थल का बारीकी से जायजा लिया गया है। ट्रैक बदल रहे कर्मचारियों से भी मामले की जानकारी ली जा रही है। अभी तक जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उनमें ट्रैक निर्माण और स्पीड अधिक होना माना जा रहा है।

सिंगल लाइन बनी जान-माल की दुश्मन

सिंगल लाइन बनी जान-माल की दुश्मन
दिल्ली-सहारनपुर वाया मेरठ मंडल की रेलवे लाइन पर लोगों के जान-माल का दुश्मन सिंगल रेलवे लाइन बन गई। ट्रैक पुराना होने के कारण ट्रेन के पहियों की भी पकड़ ढीली पड़ रही है। इसी ट्रैक से दिल्ली, अंबाला, देहरादून के साथ हरिद्वार, सहारनपुर आदि क्षेत्रों के लिए 24 घंटे में अप और डाउन में 55 ट्रेन गुजरती हैं। जिनमें सुपर फास्ट, एक्सप्रेस समेत
पैसेंजर गाड़ियां शामिल हैं।  

दिल्ली डिविजन मेरठ से सहारनपुर तक रेलवे लाइन का दोहरीकरण किया जा रहा है। 374 करोड़ रुपये इस प्रोजेक्ट से करीब 55 किलोमीटर तक नया ट्रैक बिछाया जा रहा है। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि मेरठ से दौराला तक ही रेलवे का दोहरीकरण मार्च 2017 में पूर्ण होना था, लेकिन यहां यह कार्य जुलाई माह में पूरा किया गया। हालांकि वर्ष 2017 के अंत तक मुजफ्फरनगर पूरा किया जाना था, लेकिन कभी मुआवजे की लड़ाई तो कभी रेलवे बोर्ड की लापरवाही ने दोहरीकरण की गति पर ब्रेेक लगा दिया। शनिवार को उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के पीछे ट्रैक की मरम्मत के साथ सिंगल रेलवे लाइन भी एक कारण माना जा रहा है। 

दिल्ली से अंबाला, अमृतसर और देहरादून, सहारनपुर के लिए यह ट्रैक सबसे व्यस्त में एक है। इस ट्रैक पर दिनभर में करीब 55 गाड़ियों को अप और डाउन में निकाला जाता है। जिनमें कई गाड़ियों की औसत स्पीड 100 से ऊपर है। ऐसे में खतौली और सकौती के साथ मंसूरपुर क्षेत्र में भी ट्रैक ही हालत हाईस्पीड के लायक नहीं हैं। हादसे और हादसे के बाद राहत में मद्द के लिए सबसे बड़ी बाधा सिंगल रेलवे लाइन बनी हैं। रेलवे के आलाधिकारियों को हाईपॉवर की क्रैन खतौली तक लाने में पसीने छूट गए, क्योंकि सिंगल रेलवे लाइन होने के कारण मशीन घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाई। रेलवे के डीआरएम आरएन सिंह भी दिन निकलते ही खतौली पहुंच गए। उन्होंने बताया कि दोहरीकरण में कई समस्याएं सामने आई थीं, जिन्हें दूर करने के बाद कार्य तीव्र गति से किया जा रहा है।

नया ट्रैक बिछाकर लाई गई क्रेन

नए ट्रैक पर काम जारी
उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद स्थिति बेकाबू रही। स्पीड से दौड़ रही ट्रेन ने स्लीपर के साथ ट्रैक तक उखाड़ फेंका। रविवार को राहत कार्य के लिए आई क्रेन को नए सिरे से ट्रैक बिछाकर चलाया गया। जिनता ट्रैक बिछता, उतनी ही क्रेन आगे बढ़ पाती। जिसके चलते ट्रैक पर पलटे पड़े कोचों को हटाने के लिए कड़ी मशक्कत की गई।  

12 घंटे के बाद  हटा पहला कोच : उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन शनिवार को 5:36 पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। जिसके चलते एक-दूसरे पर चढ़े डिब्बों को हटाने के लिए टीमों को करीब 14 घंटे लग गए। रविवार सुबह करीब छह बजे बड़ी क्रेन से पहला कोच हटाया जा सका। 

दूसरी बार खतौली पर लगा हादसे का कलंक : पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने से खतौली पर दूसरी बार रेल हादसे का कलंक लगा है। 25 साल पहले भी खतौली में ट्रेन हादसा हुआ था, तब अंबाला से दिल्ली जा रही मालगाड़ी बेपटरी हो गई थी। ट्रेन के 16 डिब्बे ट्रैक से उतरे थे, जो कि इसी तरह से आसपास के मकानों में जा घुसे थे, तब कोई जनहानि नहीं हुई थी।

25 साल पहले का ट्रेन हादसा याद आ गया

घटना स्थल पर हजारों की भीड़ जमा
खतौली में शनिवार शाम उत्कल एक्सप्रेस तहसील के सामने दुर्घटनाग्रस्त हुई। इस भीषण हादसे को देखकर यहां के लोगोें को 25 साल पहले का ट्रेन हादसा याद आ गया। दो जून 1992 की शाम करीब 4.30 बजे ट्रेन हादसा हुआ था। अंबाला से दिल्ली जा रही रनथ्रू मालगाड़ी ट्रेन खतौली स्टेशन से पहले अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। मालगाड़ी के 16 डिब्बे बेपटरी हुए थे। जिन लोगों ने इस हादसे की क्षति को झेला था, वे हादसे को याद कर सिहर उठे। 

ट्रैक के पास रहने वाले वीरेंद्र कुमार उर्फ बीरे हलवाई, मनीष आहूजा उर्फ बिल्ला के मकानों में मालगाड़ी के डिब्बे घुस गए थे। साथ ही शराब के ठेकों को भी डिब्बों ने चपेट में ले लिया था। हादसे के दौरान दोनों घरों के परिजन मकान के अन्य हिस्सों में बैठे थे। हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई थी। कई दिनों तक मेरठ-सहारनपुर के बीच रेल संचालन बंद रहा था। उस समय जिले में पहली बड़ी रेल दुर्घटना होने से खतौली का नाम चर्चाओं में आया था। शनिवार को कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने से खतौली कस्बे पर दूसरी बार ट्रेन हादसे का कलंक लग गया। इस भीषण ट्रेन हादसे में 22 यात्रियों की जान जाने से कसबा खतौली फिर से सुर्खियों में आ गया है।

हादसे का मंजर देखने की हिम्मत नहीं जुटा पाए

घटना स्थल की जांच करने पहुंचे अधिकारी
25 साल पहले ट्रेन हादसे का झेल चुके वीरेंद्र कुमार और मनीष आहूजा समेत उन्हें परिजन कलिंग उत्कल हादसे का मंजर देख कर पुराने हादसे को याद कर सिहर उठे। वीरेंद्र के बेटे विपिन ने बताया कि मम्मी-पापा की हिम्मत मकान की छत पर जाकर हादसे को देखने तक की नहीं हो सकी थी।  

मात्र 30 हजार रुपये का  मिला था मुआवजा 
मनीष आहूजा और बीरे हलवाई ने बताया कि मकान में मालगाड़ी के डिब्बे घुसने से करीब दो लाख रुपये का नुकसान हुआ था, मगर तब रेलवे ने क्षतिपूर्ति के नाम पर मात्र  30 हजार रुपये दिए थे। 

एक ही स्थान पर हुए दोनों हादसे 
यह भी दुर्भाग्य की बात है कि खतौली कसबे में दोनों ही हादसे एक ही स्थान पर हुए हैं। 25 साल पहले जिस स्थान पर ट्रेन हादसा हुआ था, उसी स्थान पर शनिवार को कलिंग उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हुई है।

सड़क हादसे के मृतकों को रेल हादसे में दर्शाया

जांच के लिये पहुंचे पुलिस के आला अफसर
रेल हादसे में मृतकों की गिनती में भी पुलिस प्रशासन ने चूक कर दी। सड़क हादसे में मारे गए दो लोगों के शव मोर्चरी पर रेलवे के हताहतों में गिन लिए गए, जिसकी सूचना लखनऊ तक चली गई। इसी रिपोर्ट के आधार पर डीजीपी कार्यालय से मृतकों का आंकड़ा ज्यादा बता दिया गया।

अस्पताल के अधिकारियों की लापरवाही से शवों को लेकर शासन तक में मृतकों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई। मोर्चरी पर मौजूद सभी शवों को रेल हादसे में शामिल कर दिया। इससे 22 शवों के प्रशासन के पास होने का मैसेज जारी हो गया। मेरठ में एक मौत होने की खबर के बाद 23 के मरने की सूचना लखनऊ से भी जारी कर दी गई। रात में जब अस्पताल के अधिकारियों को यह मालूम हुआ कि मोर्चरी पर गए शवों में दो शव अन्य हादसे के हैं। इनमें नावला के सोहनलाल और हापुड़ के राजेंद्र का शव है। अज्ञात में हॉस्पिटल आए दो शवों को अस्पताल के अधिकारियों ने रात में मोर्चरी से अस्पताल पहुंचा दिया। 

मामला तब खुला जब सुबह के समय जट मुझेड़ा के ग्रामीणों ने देखा की ट्रेन हादसे में मरे प्रमोद का शव वहां नहीं है। ग्रामीणों ने इसे लेकर हंगामा कर दिया। दूसरे सहारनपुर के सुमित गर्ग की पहचान के बाद भी उसका शव अज्ञात में डाल देने से परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। आनन-फानन में अस्पताल प्रशासन ने दोनों शवों को मोर्चरी में पहुंचाया और पंचनामा भरा गया। जिला अस्पताल के अधिकारियों की लापरवाही से प्रशासन से लेकर शासन तक कन्फ्यूजन में रहा।
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पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी नहीं होने पर नाराज हुए एडीजी

सामान की जांच करते पुलिसकर्मी
एडीजी रेलवे विजय कुमार मौर्य ने जटमुझेडा में पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचकर मृतकों के परिजनों से बातचीत की और स्थितियों के बारे में जानकारी ली। एडीजी ने शवों का पोस्टमार्टम करते वक्त वीडियोग्राफी नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक मृतक की डीएनए रिपोर्ट के साथ फोटो और बॉडी सौंपते हुए फोटो होना चाहिए। मौके पर रेल अधिकारियों के नहीं होने पर भी नाराजगी जताई।  

रविवार को एडीजी रेलवे बीके मौर्य  पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचकर स्थितियों के बारे में जानकारी ली।वहां मौजूद मृतकों के परिजनों ने उनसे शव के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं कराए जाने की शिकायत की। उन्होंने वहां मौजूद सीओ मंडी मणिलाल पाटीदार और एसडीएम शीतल प्रसाद गुप्ता से पूछा कि क्या रेलवे का कोई अधिकारी यहां नहीं आया। इंकार करने पर मौर्य ने हैरानी जताई। उन्होंने पीड़ित परिजनों को आश्वासन दिया कि शव को उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था प्रशासन करेगा। इसके बाद उन्होंने पोस्टमार्टम की कार्यप्रणाली को देखा। पीएम कर रहे डॉक्टरों से पूछा कि क्या उन्होंने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई है। इस पर ना में जवाब मिलने पर नाराजगी व्यक्त की। कहा कि सभी मृतकों की डीएनए रिपोर्ट होनी चाहिए। उनके ऐसे फोटो हो, जिससे उनके परिजन पहचान सके। इसी के साथ शव को सुपुर्द करते हुए फोटोग्राफ होना चाहिए। जिन लोगों को शव सौंपा जा रहा है, उनकी कुछ पहचान आधार कार्ड, पहचान पत्र आदि की फोटो प्रति होनी चाहिए।

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