आरवीसी सेंटर व कॉलेज के क्रास कंट्री मैदान पर मंगलवार सुबह रफ्तार का रोमांच देखने को मिला। जैसे ही घोड़े को लगाम से इशारा मिला तो वह पलक झपकते ही हवा से बातें करने लगा। 500 मीटर प्रति मिनट की रफ्तार से दो किमी की दूरी तय की। करीब चार घंटे तक क्रास कंट्री के दो इवेंट में 60 से अधिक घोड़ों ने दमखम दिखाए। कुछ लड़खड़ाए तो कोई गिरा भी। राहत बात यह रही कि किसी को गंभीर चोट नहीं आई। आरवीसी का क्रास कंट्री एरिना करीब एक साल बाद दमदार घोड़े और शानदार सवारों का एक बार फिर गवाह बनामंगलवार को आर्मी इक्वेस्ट्रियन चैंपियनशिप/मेरठ हॉर्स शो में प्री नोविस इवेंटिंग और नोविस इवेंटिंग की प्रतियोगिता हुई। एक से बढ़कर एक घोड़े और सवारों ने इसमें भाग लिया। 60 से अधिक घोड़ों ने दमखम दिखाया। दो किमी और 2800 किमी की दो प्रतियोगिता हुई। दो-तीन सवार ज्यादा रफ्तार और संतुलन नहीं बना पाने के कारण गिर गए।
सुनील और नीलकमल ने बनाई बढ़त
प्रतियोगिता अभी निर्णायक दौर में नहीं पहुंची है। पहले दिन के मुकाबले में नोविस इवेंटिंग में सबसे कम 52.34 पेनल्टी के साथ रिसालदार मेजर सुनील कुमार बढ़त बनाए हैं। दूसरे नंबर पर 55.42 पेनल्टी के साथ सवार विकास और तीसरे नंबर पर पीएसी के कैप्टन अभिषेक हैं। उनकी पेनल्टी 65.58 है। प्री नोविस में सवार नीलकमल 51.25 पेनल्टी के साथ सबसे आगे चल रहे हैं। दूसरे नंबर पर विश्वनाथ 55.60 पेनल्टी और बाला मुर्गन 55.89 पेनल्टी के साथ तीसरे नंबर पर हैं।
इस मैदान पर उतरना हर घुड़सवार की ख्वाहिश
140 एकड़ में फैला है आरवीसी क्रास कंट्री का मैदान, 1948 से अस्तित्व में
मेरठ। आरवीसी का क्रास कंट्री मैदान देश का सबसे अच्छा मैदान है। 140 एकड़ में फैला मैदान खासियतों से भरा पड़ा है। देश का हर घुड़सवार इस मैदान पर उतरना चाहता है। मैदान को इस तरह तैयार किया गया है कि घुड़सवार एक पल के लिए भी आंखों से ओझल नहीं हो सकता। उसकी गलती छिप नहीं सकती। इससे जज करने में आसानी रहती है और पूरी पारदर्शिता दिखती है।
देश में क्रास कंट्री के चार बड़े मैदान हैं। इनमें दिल्ली, जयपुर, बंगलूरू और मेरठ शामिल है। आरवीसी सेंटर का मैदान अन्यों से बेहतर है। इसकी सबसे बड़ी खासियत व्यू प्वाइंट है। ट्रैक साफ नजर आता है। ऊबड़-खाबड़ उछाल, ढलान और ऊंचाई कहीं पर भी घोड़ा आंखों से ओझल नहीं होता। मंगलवार को प्रतियोगिता में सवारों ने ट्रैक की तारीफ की। फुटिंग में आसानी हो रही थी। बालू में ज्यादा पैर नीचे जाने पर घोड़ा जल्द थकता है। इससे सवार खुश थे। हर तरह की बाधा मैदान पर मौजूद है। क्रास कंट्री के लिए इतना बड़ा एरिया है कि उसे अभी विकसित करने का काम किया जा रहा है। मैदान और भी बेहतर हो जाएगा।
तीन महीने पहले शुरू होती है तैयारी
क्रास कंट्री इवेंट के लिए घोड़े की तीन महीने पहले ट्रेनिंग शुरू हो जाती है। क्रास कंट्री स्पीड, स्टेमिना, स्किल और स्ट्रेंथ का खेल है। दौड़ में घोड़े का वेलफेयर का पूरा ध्यान रखा जाता है। तय अवधि से अगर 25 सेकेंड पहले घोड़ा प्रतियोगिता पूरी कर ले तो भी पेनल्टी लगती है। इसका मतलब सवार ने घोड़े को मानक से ज्यादा गति से दौड़ाया है। लेट होने पर चार सेकेंड पर एक पेनल्टी लगती है। प्रतियोगिता से पहले और बाद में घोड़े की फिटनेस चेक की जाती है। जरा भी घोड़ा घायल होने पर वह दौड़ से बाहर कर दिया जाता है।
क्रास कंट्री की दूरी और रफ्तार
प्री नोविस इवेंटिंग
दूरी 2000 मीटर
स्पीड 500 मीटर प्रति मिनट
न्यूनतम अवधि 4 मिनट
अधिकतम अवधि 8 मिनट
बाधा 20
नोविस इवेंटिंग
दूरी 2800 मीटर
स्पीड 520 मीटर प्रति मिनट
न्यूनतम अवधि 5 मिनट 24 सेकेंड
अधिकतम अवधि 10 मिनट 48 सेेकेंड
बाधा 21
स्टार वन
दूरी 4500 मीटर
स्पीड 520 मीटर प्रति मिनट
बाधा 25 से 30
1982 में एशियाड में मिला था गोल्ड
भारत ने 1982 के एशियाड में क्रास कंट्री में गोल्ड मेडल हासिल किया था। इसके बाद ब्रांज मेडल आए हैं।