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कसा शिकंजा: रफीक अंसारी ने पार्षद से शुरू किया था राजनीतिक सफर, दो बार बने विधायक, रह चुके हैं हिस्ट्रीशीटर

Tue, 28 May 2024 08:50 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

Rafiq Ansari News Meerut: इलाहाबाद हाईकोर्ट से गैर जमानती वारंट के मामले में मेरठ से सपा विधायक रफीक अंसारी को लखनऊ में गिरफ्तार कर लिया गया। उनका मेडिकल कराने के बाद सोमवार शाम को उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।
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रफीक अंसारी की जांच करते डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ के नौचंदी थाने के हिस्ट्रीशीटर रहे रफीक अंसारी 32 साल पहले जब बवाल हुआ तब वे पार्षद थे। सपा के टिकट पर वे लगातार तीन बार पार्षद चुने गए। 2012 में सपा के टिकट पर मेरठ सीट से विधायक का चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा के लक्ष्मीकांत वाजपेयी के सामने हार गए। चुनाव हारने के बाद भी रफीक को सपा सरकार में हथकरघा एवं पर्यटन विभाग में दर्जा प्राप्त मंत्री बनाया गया।

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2017 में अंसारी ने फिर से लक्ष्मीकांत वाजपेयी के सामने चुनाव लड़ा और उन्हें हराकर पहली बार विधायक बने। 2022 में कमल दत्त शर्मा को हराकर दोबारा विधायक बने। इस दौरान 101 गैर जमानती वारंट जारी हुए लेकिन रफीक अंसारी उन्हें अनदेखा करते रहे।

1992 में हापुड़ रोड पर मीट की दुकानों को लेकर अंसारी और कुरैशी बिरादरी के लोगों में मारपीट हो गई थी। भीड़ ने तोड़फोड़ करते हुए आगजनी कर दी थी। इस मामले में लिसाड़ी गेट और नौचंदी थाने में आईपीसी की धारा 147, 427 और 436 के अंतर्गत दो मुकदमे दर्ज किए गए थे।
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40 लोगों को आरोपी बनाया गया था। विवेचना में पुलिस ने मौजूद पार्षक रफीक अंसारी और हाजी बुंदू को भी आरोपी बना दिया था। पुलिस ने इस मामले में सन 1995 में 22 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था।

18 लोगों का नाम साक्ष्य नहीं होने के कारण मुकदमे से निकल गए थे। वर्ष 1997 में संबंधित अदालत ने आरोप पत्र पर संज्ञान लिया। रफीक अंसारी के कोर्ट में पेश नहीं होने पर 12 दिसंबर 1997 को उनके गैर जमानती वारंट जारी हो गए थे। इसके बाद रफीक अंसारी के 101 गैर जमानती वारंट जारी हुए।

सीआरपीसी की धारा 82 के अंतर्गत कुर्की प्रक्रिया के बावजूद भी रफीक कोर्ट में पेश नहीं हुए। वे हाईकोर्ट चले गए। उनके वकील ने पक्ष रखा कि 15 मई 1997 को फैसले में कोर्ट ने 22 आरोपियों को बरी कर दिया। ऐसे में उनके खिलाफ केस में कार्रवाई रद की जानी चाहिए। इसे कोर्ट ने नहीं माना।

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने यूपी के डीजीपी को निर्देश दिए कि रफीक अंसारी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा पहले जारी किए गए गैर-जमानती वारंट की तामील सुनिश्चित करें। अगर वह अब तक तामील नहीं हुए हैं तो अगली तारीख पर अनुपालन हलफनामा दायर किया जाएगा। अनुपालन हलफनामा दाखिल करने के सीमित उद्देश्य के लिए मामले को 28 मई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश कोर्ट ने दिए।

एसएसपी रोहित सिंह सजवाण ने रफीक अंसारी की गिरफ्तारी के लिए सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी के निर्देशन में टीम गठित की। पुलिस ने विधायक के घर दबिश दी लेकिन वह वहां से निकल गए। कई दिन से पुलिस उनकी तलाश में थी।

नौ थानों की पुलिस चप्पे-चप्पे पर रही मौजूद
विधायक को कोर्ट में पेश किए जाने के दौरान कोई बाधा न उत्पन्न करे इसको लेकर आरएएफ और नौ थानों की पुलिस को सिविल लाइन थाने में बुला लिया गया। कोर्ट में पेश किए जाने से लेकर जेल में दाखिल किए जाने तक करने तक बड़ी संख्या में पुलिस तैनात रही। कचहरी में फायर ब्रिगेड की गाड़ी को रखा गया। कमिश्नरी चौराहा, जेल चुंगी चौराहा, ईव्ज, बच्चा पार्क चौराहा, नौचंदी में तिरंगा गेट से लेकर लिसाड़ी गेट तक बड़ी संख्या में पुलिस सड़कों पर तैनात रही।

पुलिस क्यूआरटी की कड़ी सुरक्षा में सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी और सीओ कोतवाली आशुतोष कुमार ने रात 8.55 बजे विधायक रफीक अंसारी को कोर्ट में पेश किया। इस दौरान रफीक अंसारी ने कुछ भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।

उत्तर प्रदेश सरकार लिखी गाड़ी से लाया गया कचहरी
विधायक रफीक अंसारी को यूपी82-जेड-7833 क्रेटा कार से कचहरी लाया गया। गाड़ी पर उत्तर प्रदेश सरकार लिखा हुआ था।

पार्षदी से शुरू हुआ रफीक का राजनीतिक सफर
पार्षदी से राजनीति शुरू करने वाले रफीक अंसारी समाजवादी पार्टी के पुराने नेता हैं। उनका जन्म 5 नवंबर 1962 को मेरठ के एक बुनकर परिवार में हुआ। गरीबी में पले-बढ़े रफीक अंसारी ज्यादा पढ़ाई-लिखाई नहीं कर पाए। आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी।

रफीक अंसारी ने सबसे पहले पार्षदी का चुनाव जीता। समाजवादी पार्टी की टिकट पर लगातार तीन बार पार्षद चुने गए। इसी दौरान पार्टी के भीतर उनका कद भी बढ़ता गया। साल 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उन्हें मेरठ सिटी सीट से विधायकी का टिकट मिला।

वह भारतीय जनता पार्टी के पूर्व उत्तर प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी से करीब चार हजार वोटों के अंतर से हारे, लेकिन इससे पार्टी में उनका कद कम नहीं हुआ। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हारने के बाद भी अंसारी को हथकरघा एवं पर्यटन विभाग का अध्यक्ष बनाया गया।

मेरठ के मेयर पद के लिए भी लड़ा चुनाव
रफीक अंसारी ने मेरठ के मेयर पद का चुनाव लड़ा। इस चुनाव में भी उन्हें बीजेपी के हरिकांत अहलूवालिया के हाथों हार मिली। फिर आया साल 2017 का विधानसभा चुनाव। समाजवादी पार्टी की तरफ से एक बार फिर से रफीक अंसारी को टिकट दिया गया। इस बार फिर उनके सामने बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ही थे। हालांकि, इस बार बाजी पलट गई थी।

बीजेपी की लहर के बीच भी रफीक अंसारी ने लक्ष्मीकांत को 28 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हरा दिया। वह मेरठ जिले की कुल सात विधानसभा सीटों में अकेले गैर बीजेपी विधायक रहे। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में रफीक अंसारी भाजपा के कमलदत्त शर्मा को हराया।

पहले भी जारी हुए रफीक अंसारी के खिलाफ वारंट
इस मामले से पहले भी रफीक अंसारी के खिलाफ वारंट जारी हुए हैं। 30 जनवरी 2020 को रफीक अंसारी के खिलाफ मेरठ की एक अदालत ने गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था। ये वारंट 13 साल पहले के एक मामले में जारी किया गया था। साल 2007 में नगर निगम के एक ठेकेदार ने आरोप लगाया था कि रफीक अंसारी ने उनके ऊपर चाकू से हमला किया है। इस मामले में चार साल बाद 2011 में चार्जशीट दाखिल हुई थी। हालांकि, रफीक की गिरफ्तारी नहीं हुई।

कोर्ट के बाहर सपा समर्थकों ने लगाए रफीक अंसारी जिंदाबाद के नारे
कोर्ट के बाहर विधायक के पहुंचने पर सपा कार्यकर्ताओं ने रफीक अंसारी जिंदाबाद के नारे लगाए। रफीक अंसारी तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं, अखिलेश यादव जिंदाबाद और समाजवादी पार्टी जिंदाबाद के नारे लगाए। सपा जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी, आदिल चौधरी समेत दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

नामांकन में छिपाया था मुकदमा, कराएंगे धोखाधड़ी की रिपोर्ट
भाजपा के शहर विधानसभा प्रत्याशी रहे कमलदत्त शर्मा ने रफीक अंसारी की गिरफ्तारी के बाद कहा कि उन्होंने झूठा ब्योरा देकर चुनाव लड़ा है। अपने नामांकन के दौरान झूठा शपथ पत्र दिया था। जिसमें सिर्फ सिविल लाइन थाने में दर्ज एक मुकदमे का ही उल्लेख किया था। यह मामला धोखाधड़ी का है। जिसमें आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। इस मामले में अपने अधिवक्ता से बातचीत करके सपा विधायक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराएंगे।
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न्यायालय पर पूरा विश्वास: रफीक अंसारी
इस मामले में गैर जमानती वारंट जारी होने पर जब सपा विधायक रफीक अंसारी से बात की गई थी तो उनका कहना था कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। अब इनकी गिरफ्तारी हो गई है।
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