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रार ने रोकी परिवहन नीर की ‘धारा’

Fri, 12 Aug 2016 02:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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 उत्तर प्रदेश परिवहन निगम लिमिटेड और एक्सिस कांट्रेक्टर के बीच रॉयल्टी विवाद के चलते रोडवेज यात्री सस्ते परिवहन नीर से वंचित हो गए हैं। हाईकोर्ट ने परिवहन निगम को कमेटी गठित कर विवाद निपटाने को कहा है। बहरहाल समाधान होने तक सभी बस अड्डों पर परिवहन नीर नहीं मिलेगा।
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उत्तर प्रदेश परिवहन निगम लिमिटेड अपने यात्रियों को रेलवे के ‘रेल नीर’ की तर्ज पर सस्ता ‘परिवहन नीर’ मुहैया करा रहा था। इसका जिम्मा रोडवेज ने एक्सिस कांट्रेक्टर नाम की फर्म को दिया था। दोनों के बीच हुए करार के तहत एक्सिस फर्म पिछले एक साल से प्रदेश के सभी बस अड्डों पर परिवहन नीर की बिक्री कर रही थी। जिसके एवज में कंपनी परिवहन निगम को प्रतिमाह 2 करोड़ रुपये की रॉयल्टी दे रही थी। इस बीच विभाग और कंपनी के बीच रॉयल्टी को लेकर विवाद हो गया। कंपनी ने बस अड्डों की संख्या अनुबंध पत्र से कम होने की बात कहते हुए रॉयल्टी कम कराने की मांग की। विभाग ने कंपनी की मांग को नहीं माना, तो कंपनी ने घाटा होेने की बात कहते हुए रॉयल्टी रोक ली। इस पर विभाग ने कंपनी को दिया गया ठेका निरस्त कर दिया। ठेका खत्म होने पर बस अड्डों पर परिवहन नीर की बिक्री बंद हो गई।

कोर्ट ने घटित की कमेटी
एक्सिस कंपनी ने विभाग के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने स्टे देकर कंपनी को कोई राहत तो नहीं दी, लेकिन निगम को इस मामले के हल के लिए हाईपावर कमेटी बनाकर मामले का पटाक्षेप करने के निर्देश दिए हैं। कंपनी के सीईओ फतेह बहादुर सिंह ने बताया कि करार के वक्त परिवहन निगम ने प्रदेश में 242 बस अड्डों की सूची दी थी। इसमें से करीब दो दर्जन बस अड्डों का पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है। करीब पांच दर्जन बस अड्डे सूची के अनुसार मौके पर नहीं मिले।
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सस्ता होने से हो रहा था लोकप्रिय
परिवहन नीर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पानी के मुकाबले यात्रियों को सस्ता मिल रहा था। ब्रांडेड पानी की एक लीटर बोतल 18 से 20 रुपये की मिलती है, वहीं परिवहन नीर की बोतल 14 रुपये में मिलती थी। इसलिए परिवहन नीर तेजी से लोकप्रिय हो रहा था।

रोडवेज को 2 करोड़ प्रति माह का नुकसान
विवाद के चलते रोडवेज को हर महीने 2 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। तीन साल के लिए एक्सिस कंपनी को ठेका दिया गया था। इससे विभाग को 72 करोड़ रुपये की आमदनी होनी थी।
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