इसे राजनीति के प्रति मोह भंग कहें या नोट बंदी का असर। लेकिन पिछले चुनाव की तुलना में इस बार 33 नामांकन कम हुए हैं। जिनका नाम वापसी तक अभी और भी कम होना तय माना जा रहा है।
विस चुनाव 2012 में जनपद की सातों विधानसभा सीटों पर 118 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। लेकिन इस बार पर्चा मात्र 85 ने ही भरा। ऐसे में पिछले चुनाव की तुलना में अभी पर्चा भरने तक ही 33 प्रत्याशी कम हो चुके हैं। जबकि अभी नामांकन पत्रों की जांच और वापसी की प्रक्रिया पूरी होनी है। जिसमें निश्चित रूप से कुछ प्रत्याशी जरूर कम होंगे। यह आंकड़ा साफ बताता है कि चुनाव को लेकर इस बार उत्साह की कमी नजर आ रही है।
सिर्फ शहर पर बढ़े प्रत्याशी
पिछले साल विधानसभावार चुनाव लड़े प्रत्याशी और इस बार हुए नामांकन पर अगर नजर डालें तो सिर्फ शहर विधानसभा ही ऐसी है, जहां पर पिछले साल की तुलना में दो प्रत्याशी अभी ज्यादा नजर आ रहे हैं। जबकि बाकी सभी जगह प्रत्याशियों की संख्या घटी है। सबसे ज्यादा कम मेरठ कैंट सीट पर हुए हैं।
नोट बंदी का भी असर
इसके पीछे नोटबंदी का असर भी माना जा रहा है। राजनैतिक और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार नोटबंदी चुनाव के उत्साह पर बड़ा फैक्टर है। साथ ही निर्वाचन आयोग की लगातार सख्त होती नियमावली ने भी शौकिया चुनाव लड़ने वालों की संख्या में कमी की है।
तुलनात्मक आंकड़ा
विधानसभा 2017 में नामांकन 2012 में प्रत्याशी
सिवालखास 10 15
सरधना 10 21
हस्तिनापुर 08 13
किठौर 13 14
मेरठ कैंट 15 24
मेरठ शहर 16 15
मेरठ दक्षिण 13 16
कुल 85 118