मेरठ। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्किट में 17 करोड़ रुपये कीमत के भवन पर कुल 552 रुपये गृहकर लगाने की शिकायत के मामले में निगम ने जांच पूरी कर ली। शिकायतकर्ता लोकेश खुराना को जांच रिपोर्ट का हवाला देकर निगम ने बताया कि 1998 की भौगोलिक स्थिति के आधार पर गृहकर लगाया। सवाल उठता है कि जीआईएस सर्वे और निगम द्वारा नाम परिवर्तित के दौरान भी संशोधन नहीं किया गया।
सेंट्रल मार्किट में एक व्यवसायिक भवन है, इसकी कीमत लिखापढ़ी में 17 करोड़ रुपये बताई गई। निगम ने कुल 552 रुपये गृहकर लगाया है। इसकी शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने नगर आयुक्त से की। नगर आयुक्त ने अपर नगर आयुक्त शिवपूजन यादव से इस प्रकरण की जांच कराई। अपर नगर आयुक्त की जांच रिपोर्ट में इस भवन को निर्माणाधीन बताया और पुरानी दरों पर गृहकर लगने की बात कही। मंगलवार को निगम ने शिकायतकर्ता को जांच रिपोर्ट भेजी। उसमें बताया गया है कि सन 1998 में इस जगह पर एक कमरा और टीनशेड था, उस जगह पर गृहकर लगा है। सवाल उठता है कि भवन का नाम परिवर्तित तीन साल पहले हुआ, बावजूद गृहकर में संशोधन नहीं हुआ। सात साल तक जीआईएस सर्वे हुआ और वहां भी गृहकर में संशोधन नहीं किया गया। इस प्रकरण में निगम की लापरवाही सामने आई है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी एसके गौतम का कहना है कि इस भवन का दोबारा से भौतिक सत्यापन कराएंगे और नया गृहकर लगाकर बिल भेजेंगे।