मेरठ। नगर निगम द्वारा इंदौर और सूरत की तर्ज पर शहर में नई सफाई व्यवस्था शुरू करने का दावा किया गया है। इस नई व्यवस्था पर पार्षदों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्षदों का आरोप है कि यह करोड़ों रुपये की बंदरबाट करने की एक नई योजना है।
पार्षदों का कहना है कि नगर निगम के पास सफाई के सभी आवश्यक संसाधन मौजूद हैं। इनमें स्थायी व अस्थायी करीब तीन हजार कर्मचारी, आधुनिक मशीनरी और पर्याप्त बजट शामिल हैं। इसके बावजूद बाहरी एजेंसी को नया ठेका देना वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है। पार्षदों ने इस निर्णय को शहरवासियों के पैसे का दुरुपयोग बताया है। उन्होंने निगम के अपने संसाधनों को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया। पार्षदों ने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में बीवीजी कंपनी की विफलता पर भी प्रश्नचिह्न लगाया। नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने इसे इंदौर-सूरत की तर्ज पर शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने का प्रयास बताया है। नई व्यवस्था के तहत शहर की 119 किलोमीटर मुख्य सड़क और बाजार में सफाई होगी। यह सफाई दिन-रात दो शिफ्ट में कराई जाएगी।
नई व्यवस्था का शुभारंभ
शुक्रवार को नई सफाई व्यवस्था का शुभारंभ किया गया था। सांसद अरुण गोविल, महापौर हरिकांत अहलूवालिया और महानगर अध्यक्ष भाजपा विवेक रस्तोगी ने कूड़ा गाड़ियों को हरी झंडी दिखाई। यह कार्यक्रम सर्किट हाउस से शुरू हुआ था। शनिवार को मेरठ कॉलेज के पास और सिविल लाइन सहित कई इलाकों में मैनुअल सफाई कराई गई।
सफाई कार्य की योजना
वरिष्ठ स्वास्थ्य प्रभारी एवं अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी ने बताया कि मैनुअल सफाई के साथ-साथ अत्याधुनिक मशीनों का भी उपयोग किया जाएगा। यह प्रयास शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। पार्षदों के आरोपों के बावजूद निगम अपनी योजना पर आगे बढ़ रहा है।