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पीवीवीएनएल पहुंचा कूड़े से बनने वाली बिजली खरीद का आदेश

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पीवीवीएनएल पहुंचा कूड़े से बनने वाली बिजली खरीद का आदेश
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मेरठ। शहर में कूड़े से बनने वाली बिजली पीवीवीएनएल द्वारा खरीदने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग का पत्र ऊर्जा भवन पहुंच गया है। अब प्लांट मालिक पीवीवीएनएल एमडी से मिलकर प्लांट तक विद्युत लाइन डलवाने की मांग करेंगे।
आयोग ने प्लांट और पीवीवीएनएल के बीच हुए बिजली खरीद अनुबंध पीपीए पर पिछले वर्ष सितंबर को अपनी स्वीकृति दे दी थी। प्लांट की क्षमता एक मेगावाट बिजली रोजाना बनाने की है। इसके लिए रोजाना 30 टन कूड़े की आवश्यकता होगी। बिजली खरीदने के लिए पीवीवीएनएल को लाइन बनाकर देनी होगी या प्लांट के सामने से जा रही 33 केवी लाइन को ही प्लांट से जोड़ना होगा। आगे चलकर प्लांट की क्षमता 5 मेगावाट तक की जाएगी। दिल्ली रोड स्थित भूड़बराल में लगे बिजेंद्रा एनर्जी एंड रिसर्च के प्लांट ने पीवीवीएनएल के साथ बिजली खरीदने के लिए पीपीए साइन किया था। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की पहल पर ही पीपीए हुआ था।
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विद्युत नियामक आयोग से इसकी स्वीकृति लेने के लिए कंपनी ने 3 मई, 2020 को आयोग में पिटीशन फाइल की थी। 4 सितंबर को आयोग ने मामले की सुनवाई ऑनलाइन की थी। सुनवाई में पीवीवीएनएल की तरफ से एमडी अरविंद मल्लप्पा बंगारी और प्लांट पक्ष से बिजेंद्र चौधरी, नवीन चौधरी और एडवोकेट अमरजीत ने अपने-अपने पक्ष रखे थे।
स्वीकृति मिलने के बाद कंपनी एमडी नवीन चौधरी ने बताया कि प्लांट को नगर निगम कूड़ा मुहैया कराएगा। कूड़े से पॉलिथीन, प्लास्टिक आदि को अलग कर इससे पैलेट बनाए जाएंगे। पैलेट से प्लांट में गैस बनेगी, जिसका इस्तेमाल बिजली बनाने में होगा।
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खत्म होंगे कूड़े के पहाड़
कचरे से बिजली बनने की प्रक्रिया में प्लांट को बढ़ी क्षमता के अनुसार कूड़े की आवश्यकता होगी। इससे शहर में बने कूड़े के पहाड़ खत्म करने में मदद मिलेगी। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनने वाली बिजली की बिक्री 8.32 रुपये प्रति यूनिट की दर से की जाएगी।
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