मोदीपुरम स्थित चारागाह की जमीन एटूजेड बिल्डर्स एवं डेवलपर्स के नाम करने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। डीएम के निर्देश पर सरधना के तहसीलदार ने कोतवाली सरधना में एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें पूर्व एसडीएम कुमार भूपेंद्र और तीन तहसील कर्मियों के साथ मेसर्स एटूजेड बिल्डर्स एंड डेवलपर्स को नामजद किया गया है। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हल्के में हड़कंप मचा हुआ है।
अमर उजाला ने 23 नवंबर को माई सिटी में ‘अफसर मेहरबान, 30 करोड़ की जमीन बिल्डर के नाम’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसमें सरधना तहसील अंतर्गत एनएच-58 पर सिवाया के पास चारागाह की करीब 20 हजार वर्ग मीटर जमीन एटूजेड बिल्डर के नाम करने का खुलासा किया गया। यह जमीन तहसील सरधना के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बिल्डर से साठगांठ कर उनके नाम दर्ज कर दी थी। करीब 30 करोड़ रुपये से ज्यादा की इस बेशकीमती जमीन को बिल्डर को देने के लिए तीन साल से खेल चल रहा था। अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने पर डीएम बी. चंद्रकला ने पूरे मामले पर सख्ती के साथ कार्रवाई शुरू की। बृहस्पतिवार को ही डीएम ने रजिस्ट्रार कानूनगो के निलंबन और एसडीएम समेत अन्य दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करने की बात कही थी।
रिपोर्ट देखकर दिए कार्रवाई के निर्देश
इस मामले में एसडीएम सरधना राकेश कुमार की पूरी रिपोर्ट पढ़ने के बाद जिलाधिकारी ने एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। इस पर तहसीलदार वेद सिंह चौहान की तरफ से कोतवाली सरधना में धारा 420, 467, 468, 471, सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 के तहत धारा-3 व 4 और 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। मुकदमे में तत्कालीन एसडीएम कुमार भूपेंद्र, तत्कालीन हल्का लेखपाल राजपाल सिंह, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक मोहम्मद नसीम और तत्कालीन राजस्व अहलमद जगवीर सिंह के साथ मेसर्स एटूजेड डेवलपर्स को भी नामजद किया गया है।
जांच में सामने आई साठगांठ
एफआईआर में तहसीलदार वेद सिंह चौहान ने बताया कि अमर उजाला में 23 नवंबर को प्रकाशित समाचार पर डीएम ने एसडीएम सरधना राकेश कुमार से जांच कराई। इसमें तथ्यों को छिपाते हुए साठगांठ कर सरकारी जमीन बिल्डर को देने का दोष सिद्ध हुआ। इसके बाद डीएम के निर्देश पर एसडीएम राकेश कुमार ने तहसीलदार वेद सिंह चौहान को एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए।
इन पर भी लटक रही तलवार
इस मामले में डीएम बी चंद्रकला के सख्त रवैये से प्रशासनिक हल्के में हड़कंप मचा है। एफआईआर में बिल्डर ग्रुप और कर्मचारियों के साथ पीसीएस अधिकारी को भी नामजद किया गया है। वहीं अब पूर्व में जो अधिकारी इसमें संलिप्त रहे हैं, उन पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। इसे लेकर ज्यादा बेचैनी नजर आ रही है।
गया प्रसाद नहीं, चुनकूराम का था आदेश
एटूजेड बिल्डर की अपील पर अपर आयुक्त गया प्रसाद नहीं, बल्कि चुनकूराम पटेल ने एसडीएम अरविंद मिश्रा के आदेश को निरस्त कर पूर्व एसडीएम अखंड प्रताप सिंह के आदेश को बहाल किया था। बता दें कि शुक्रवार के अंक में भूलवश गया प्रसाद का नाम प्रकाशित हो गया था। उधर, इस मामले में सच संस्था के अध्यक्ष संदीप पहल एडवोकेट ने कहा है कि एफआईआर में अपर आयुक्त चुनकुराम को भी नामजद किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जो भी अधिकारी इस मामले में दोषी रहें हैं, सबके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए वह अपनी तरफ से लड़ाई लड़ेंगे।
केंद्र के एक मंत्री की पार्टनरशिप
मेसर्स एटूजेड बिल्डर्स एंड डेवलपर्स में एक केंद्रीय राज्य मंत्री की हिस्सेदारी को भी लेकर चर्चा तेज है। चर्चा है कि अब तक दबाकर रखे गये आदेश को उन्हीं के प्रभाव के चलते बाहर लाया गया और एटूजेड बिल्डर ग्रुप के दो पार्टनरों के नाम इस जमीन को खतौनी में दर्ज किया गया।